राग परिचय

रागों के प्रकार

रागों के प्रकार

मुग़ल़कालीन शासन के दौरान ही शायद रागों के गाने बजाने का निर्धारित समय कभी प्रचलन में आया। जिन्हें उनकी प्रकृति के आधार पर विभाजित किया गया। जिनका वर्णन निम्न प्रकार से दिया जा सकता है:- Read More : रागों के प्रकार about रागों के प्रकार

स्वर (संगीत)

स्वर (संगीत)

ध्वनियों में हम प्राय: दो भेद रखते हैं, जिनमें से एक को स्वर और दूसरे को कोलाहल या रव कहते हैं। कुछ लोग बातचीत की ध्वनि को भी एक भेद मानते हैं। Read More : स्वर (संगीत) about स्वर (संगीत)

संगीत संबंधी कुछ परिभाषा

संगीत संबंधी कुछ परिभाषा

संगीत- बोलचाल की भाषा में सिर्फ़ गायन को ही संगीत समझा जाता है मगर संगीत की भाषा में गायन, वादन व नृत्य तीनों के समुह को संगीत कहते हैं। संगीत वो ललित कला है जिसमें स्वर और लय के द्वारा हम अपने भावों को प्रकट करते हैं। कला की श्रेणी में ५ ललित कलायें आती हैं- संगीत, कविता, चित्रकला, मूर्तिकला और वास्तुकला। इन ललित कलाओं में संगीत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। Read More : संगीत संबंधी कुछ परिभाषा about संगीत संबंधी कुछ परिभाषा

रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग

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प्रमुख रागों में ऐसे स्वर समूह होते है जिनसे उनकी स्वतंत्र छवि बनती है। ऐसे ही स्वतंत्र छवि बनाने वाले स्वर समूह को रागांग कहते है तथा स्वतंत्र अंग वाले राग, रागांग प्रमुख राग माने जाते हैं। ऐसे रागों में विस्तार की विस्तृत संभावनायें रहती है। आधुनिक काल में हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति में रागांग वर्गीकरण पद्धति को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसी पद्धति एवं प्रमुख रागांग आदि का विश्लेषण इस लेख में प्रस्तुत किया गया है।
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सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि

सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि

सा और प को अचल स्वर माना जाता है। जबकि अन्य स्वरों के और भी रूप हो सकते हैं। जैसे 'रे' को 'कोमल रे' के रूप में गाया जा सकता है जो कि शुद्ध रे से अलग है। इसी तरह 'ग', 'ध' और 'नि' के भी कोमल रूप होते हैं। इसी तरह 'शुद्ध म' को 'तीव्र म' के रूप में अलग तरीके से गाया जाता है। 
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राग बहार

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 आरोह में गमपगमधनिसां इस प्रकार पंचम का वक्र प्रयोग भी होता है जिससे रागरंजकता बढ़ती है। इस राग का वादी स्वर षडज तथा संवादी स्वर मध्यम हैं। राग विस्तार मध्य व तार सप्तक में होने के कारण यह चंचल प्रकृति का राग माना जाता है। मपगम धनिसां इसकी मुख्य पकड़ है। यह राग बाकी अनेक रागों के साथ मिलाकर भी गाया जाता हैं। जिस राग के साथ उसे मिश्रित किया जाता है उसे उस राग के साथ संयुक्त नाम से जाना जाता है। उदाहरण के लिए बागेश्री राग में इसे मिश्र करने से बागेश्री-बहार, वसंत-बहार, भैरव-बहार इत्यादि। परंतु मिश्रण का एक नियम हे कि जिसमें बहार मिश्र किया जाय वह राग शुद्ध मध्यम या पंचम में होना चाहिए क्योंकि Read More : राग बहार about राग बहार

राग यमन (कल्याण)

राग यमन

इस राग को राग कल्याण के नाम से भी जाना जाता है। इस राग की उत्पत्ति कल्याण थाट से होती है अत: इसे आश्रय राग भी कहा जाता है। जब किसी राग की उत्पत्ति उसी नाम के थाट से हो तो उसे कल्याण राग कहा जाता है। इस राग की विशेषता है कि इसमें तीव्र मध्यम और अन्य स्वर शुद्ध प्रयोग किये जाते हैं। ग वादी और नि सम्वादी माना जाता है। इस राग को रात्रि के प्रथम प्रहर या संध्या समय गाया-बजाया जाता है। इसके आरोह और अवरोह दोनों में सातों स्वर प्रयुक्त होते हैं, इसलिये इसकी जाति सम्पूर्ण है। Read More : राग यमन (कल्याण) about राग यमन (कल्याण)

सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं।

सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। सातों स्वरों के नाम क्रमश: सा, रे, ग, म, प, ध और नि हैं। इसमें प्रत्येक स्वर की आन्दोलन संख्या अपने पिछले स्वर से अधिक होती है। दूसरे शब्दों में सा से जैसे-जैसे आगे बढ़ते जाते हैं, स्वरों की आन्दोलन संख्या बढ़ती जाती है। रे की आन्दोलन संख्या सा से, ग, की, रे, से, व, म, की, ग, से अधिक होती है। इसी प्रकार प, ध और नी की आन्दोलन संख्या अपने पिछले स्वरों से ज़्यादा होती है। पंचम स्वर की आन्दोलन संख्या सा से डेढ़ गुनी अर्थात् 3/2 गुनी होती है। उदाहरण के लिए अगर सा की आन्दोलन संख्या 240 है तो प की आन्दोलन संख्या 240 की 3/2 गुनी 360 होगी। प्रत् Read More : सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। about सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं।

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राग परिचय

भारतीय शास्त्रीय संगीत
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संगीत से सम्बन्धित 'स्वर' के बारे में है 1,347 2
रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। 755 2
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अल्कोहल ड्रिंक्स - ये दोनों आपके गले के पक्के (पक्के मतलब वाकई पक्के) दुश्मन हैं 162 1
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राग परिचय
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राग दरबारी कान्हड़ा 1,783 1
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षड्जग्राम-तान बोधिनी 267 0
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राग रागिनी पद्धति 2,313 0
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी 262 0
शुद्ध स्वर 1,907 0
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रागांग राग वर्गीकरण से अभिप्राय 586 0
स्वर (संगीत) 1,261 0
स्वर मालिका तथा लिपि 1,310 0
आविर्भाव-तिरोभाव 1,961 0
स्वर मालिका तथा लिपि 1,894 0
राग ललित! 1,510 0
वादी - संवादी 1,826 0
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 856 0
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‘राग’ शब्द संस्कृत की धातु 'रंज' से बना है 235 0
ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है 1,081 0
राग मुलतानी 712 0
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है 1,769 0
सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 1,614 0
रागों का विभाजन 493 0
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- 2,927 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
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अमवा महुअवा के झूमे डरिया 242 1
उस्ताद बड़े गुलाम अली खान वाला पटियाला घराना 107 1
फकीर हरिदास और तानसेन के संगीत में क्या अंतर है? 116 0
बैजू बावरा 818 0
तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 822 0
बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत 325 0
ठुमरी गायिका गिरिजा देवी हासिल कर चुकी हैं कई पुरस्कार और सम्मान 288 0
जब बेगम अख्तर ने कहा, 'बिस्मिल्लाह करो अमजद' 758 0
उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 790 0
पण्डित अजॉय चक्रबर्ती 99 0
बड़े गुलाम अली खान: जिन्होंने गाने के लिए रफी और लता से 50 गुना फीस ली 114 0
रचन: श्री वल्लभाचार्य 1,020 0
अकबर और तानसेन 829 0
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 707 0
स्वर परिचय
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स्वर और उनसे सम्बद्ध श्रुतियां 353 1
संगीत रत्नाकर के अनुसार स्वरों के कुल, जाति 513 0
संगीत के स्वर 962 0
स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 342 0
स्वर ऋषभ का शास्त्रीय परिचय 309 0
स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 294 0
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 253 0
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 251 0
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 295 0
स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय 247 0
सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 282 0
सिलेबस
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सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 490 0
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 345 0
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 252 0
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 378 0
शास्त्रीय नृत्य
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लता मंगेशकर का नाम : भारतीय संगीत की आत्मा 125 0
मेवाती घराने की पहचान हैं पंडित जसराज 91 0
भारतीय नृत्य कला 1,520 0
जयपुर- अतरौली घराने की देन हैं एक से बढ़कर एक कलाकार 84 0
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 763 0
शास्त्रीय संगीत क्या है 107 0
काशी की गिरिजा 105 0
भरत नाट्यम - तमिलनाडु 390 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत का आधार: 113 0
लोक कला की ध्वजवाहिका 79 0
राग क्या हैं 232 0
लोक और शास्त्र के अन्तरालाप की देवी 83 0
क्या अलग था गिरिजा देवी की गायकी में 137 0
कर्नाटक संगीत 123 0
वेद में एक शब्द है समानिवोआकुति 98 0
राग भीमपलास और भीमपलास पर आधारित गीत 266 0
माइक्रोफोन का कार्य 513 0
कर्नाटक गायन शैली के प्रमुख रूप 104 0
ठुमरी का नवनिर्माण 89 0
पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी 116 0
रागदारी: शास्त्रीय संगीत में घरानों का मतलब 107 0
सबसे पुराना माना जाता है ग्वालियर घराना 87 0
बेहद लोकप्रिय है शास्त्रीय गायकी का किराना घराना 107 0
आगरा का भी है अपना शास्त्रीय घराना 79 0
वीडियो
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कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया 132 0
वंदेमातरम् 308 0
ब्रेथलेसऔर अरुनिकिरानी 345 0
राग बागेश्री | पंडित जसराज जी 832 0
द ब्यूटी ऑफ राग बिलासखानी तोड़ी 438 0
नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती 492 0
राग यमन 491 0
मोरा सइयां 344 0
राग भीमपलासी पर आधारित गीत 1,718 0
कर्ण स्वर 423 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
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कैराना का किराना घराने से नाता 409 0
रामपुर सहसवां घराना भी है गायकी का मशहूर घराना 114 0
गुरु-शिष्य परम्परा 1,188 0
संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 4,443 0
भारत में संगीत शिक्षण 1,463 0