राग परिचय

सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है

सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है

संगीत में वह शब्द जिसका कोई निश्चित रूप हो और जिसकी कोमलता या तीव्रता अथवा उतार-चढ़ाव आदि का, सुनते ही, सहज में अनुमान हो सके, स्वर कहलाता है। भारतीय संगीत में सात स्वर (notes of the scale) हैं, जिनके नाम हैं - षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत व निषाद।

यों तो स्वरों की कोई संख्या बतलाई ही नहीं जा सकती, परंतु फिर भी सुविधा के लिये सभी देशों और सभी कालों में सात स्वर नियत किए गए हैं। भारत में इन सातों स्वरों के नाम क्रम से षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद रखे गए हैं जिनके संक्षिप्त रूप सा, रे ग, म, प, ध और नि हैं। Read More : सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है about सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है

सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान

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सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान
वाशिंगटन, एजेंसीअ+अ-

बच्चों को यदि सुर-ताल के साथ गणित की शिक्षा दी जाए तो वे इसकी समस्याओं को अपेक्षाकृत अधिक आसानी से समझ पाते हैं।

इसका खुलासा अमेरिका में हुए एक अध्ययन से हुआ है। इसके अनुसार, संगीत के विभिन्न माध्यमों, जैसे-ताली बजाकर, ड्रम बजाकर तथा गाना गा कर बच्चों को गणित के सवालों के बारे में आसानी से समझाया जा सकता है। Read More : सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान about सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान

रागों के प्रकार

रागों के प्रकार

मुग़ल़कालीन शासन के दौरान ही शायद रागों के गाने बजाने का निर्धारित समय कभी प्रचलन में आया। जिन्हें उनकी प्रकृति के आधार पर विभाजित किया गया। जिनका वर्णन निम्न प्रकार से दिया जा सकता है:- Read More : रागों के प्रकार about रागों के प्रकार

संगीत संबंधी कुछ परिभाषा

संगीत संबंधी कुछ परिभाषा

संगीत- बोलचाल की भाषा में सिर्फ़ गायन को ही संगीत समझा जाता है मगर संगीत की भाषा में गायन, वादन व नृत्य तीनों के समुह को संगीत कहते हैं। संगीत वो ललित कला है जिसमें स्वर और लय के द्वारा हम अपने भावों को प्रकट करते हैं। कला की श्रेणी में ५ ललित कलायें आती हैं- संगीत, कविता, चित्रकला, मूर्तिकला और वास्तुकला। इन ललित कलाओं में संगीत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। Read More : संगीत संबंधी कुछ परिभाषा about संगीत संबंधी कुछ परिभाषा

रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग

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प्रमुख रागों में ऐसे स्वर समूह होते है जिनसे उनकी स्वतंत्र छवि बनती है। ऐसे ही स्वतंत्र छवि बनाने वाले स्वर समूह को रागांग कहते है तथा स्वतंत्र अंग वाले राग, रागांग प्रमुख राग माने जाते हैं। ऐसे रागों में विस्तार की विस्तृत संभावनायें रहती है। आधुनिक काल में हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति में रागांग वर्गीकरण पद्धति को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसी पद्धति एवं प्रमुख रागांग आदि का विश्लेषण इस लेख में प्रस्तुत किया गया है।
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सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि

सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि

सा और प को अचल स्वर माना जाता है। जबकि अन्य स्वरों के और भी रूप हो सकते हैं। जैसे 'रे' को 'कोमल रे' के रूप में गाया जा सकता है जो कि शुद्ध रे से अलग है। इसी तरह 'ग', 'ध' और 'नि' के भी कोमल रूप होते हैं। इसी तरह 'शुद्ध म' को 'तीव्र म' के रूप में अलग तरीके से गाया जाता है। 
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राग बहार

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 आरोह में गमपगमधनिसां इस प्रकार पंचम का वक्र प्रयोग भी होता है जिससे रागरंजकता बढ़ती है। इस राग का वादी स्वर षडज तथा संवादी स्वर मध्यम हैं। राग विस्तार मध्य व तार सप्तक में होने के कारण यह चंचल प्रकृति का राग माना जाता है। मपगम धनिसां इसकी मुख्य पकड़ है। यह राग बाकी अनेक रागों के साथ मिलाकर भी गाया जाता हैं। जिस राग के साथ उसे मिश्रित किया जाता है उसे उस राग के साथ संयुक्त नाम से जाना जाता है। उदाहरण के लिए बागेश्री राग में इसे मिश्र करने से बागेश्री-बहार, वसंत-बहार, भैरव-बहार इत्यादि। परंतु मिश्रण का एक नियम हे कि जिसमें बहार मिश्र किया जाय वह राग शुद्ध मध्यम या पंचम में होना चाहिए क्योंकि Read More : राग बहार about राग बहार

राग यमन (कल्याण)

राग यमन

इस राग को राग कल्याण के नाम से भी जाना जाता है। इस राग की उत्पत्ति कल्याण थाट से होती है अत: इसे आश्रय राग भी कहा जाता है। जब किसी राग की उत्पत्ति उसी नाम के थाट से हो तो उसे कल्याण राग कहा जाता है। इस राग की विशेषता है कि इसमें तीव्र मध्यम और अन्य स्वर शुद्ध प्रयोग किये जाते हैं। ग वादी और नि सम्वादी माना जाता है। इस राग को रात्रि के प्रथम प्रहर या संध्या समय गाया-बजाया जाता है। इसके आरोह और अवरोह दोनों में सातों स्वर प्रयुक्त होते हैं, इसलिये इसकी जाति सम्पूर्ण है। Read More : राग यमन (कल्याण) about राग यमन (कल्याण)

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राग परिचय

राग परिचय
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रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग 4,868 44
रागों के प्रकार 5,151 10
सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि 11,820 8
स्वर (संगीत) 2,145 8
राग रागिनी पद्धति 2,978 7
रागांग राग वर्गीकरण से अभिप्राय 952 7
राग ललित! 2,241 5
वादी - संवादी 2,871 5
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 1,184 5
कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- 1,241 3
स्वर मालिका तथा लिपि 2,723 3
संगीत संबंधी कुछ परिभाषा 3,486 3
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सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 2,266 3
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- 3,924 3
रागों मे जातियां 3,124 3
राग भूपाली 2,913 3
स्वर मालिका तथा लिपि 2,069 2
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शुद्ध स्वर 2,659 2
राग दरबारी कान्हड़ा 2,350 2
आविर्भाव-तिरोभाव 2,988 1
नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज। 1,429 1
राग यमन (कल्याण) 2,643 1
रागों का विभाजन 693 1
षड्जग्राम-तान बोधिनी 369 1
सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। 847 1
सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान 2,253 1
शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व 3,019 1
राग- गौड़ सारंग 713 1
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‘राग’ शब्द संस्कृत की धातु 'रंज' से बना है 363 0
राग मुलतानी 942 0
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है 2,154 0
राग बहार 1,665 0
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी 374 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
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उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 1,057 7
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भारतीय शास्त्रीय संगीत
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भारतीय संगीत 830 1
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वीडियो
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स्वर परिचय
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संगीत के स्वर 1,246 1
स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 488 1
स्वर ऋषभ का शास्त्रीय परिचय 480 1
स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 406 1
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 420 1
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 343 0
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 338 0
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सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 407 0
संगीत रत्नाकर के अनुसार स्वरों के कुल, जाति 780 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
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संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 5,696 1
भारत में संगीत शिक्षण 1,941 1
रामपुर सहसवां घराना भी है गायकी का मशहूर घराना 220 1
गुरु-शिष्य परम्परा 1,607 0
कैराना का किराना घराने से नाता 513 0
सिलेबस
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सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 482 1
सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 665 0
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 314 0
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 520 0