राग ललित!

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अपने मित्रों को मैं यह कोई नई बात नहीं बता रहा कि मुझे भारतीय शास्त्रीय संगीत से लगाव है। संगीत की जानकारी में मैं बिल्कुल शून्य हूँ लेकिन हाँ उसे मन से महसूस करके उसका आनंद लेना मुझे आता है। बचपन से ही हिन्दी फ़िल्मों के शास्त्रीय संगीत पर आधारित गीतों ने अधिकांश लोगों की तरह मेरे मन को भी मगन किया है। आज शीला और मुन्नी के दौर में इन्हीं शास्त्रीय गीतों के आधार पर बॉलीवुड में संगीत का नाम जीवित है।

मेरे बहुत से पसंदीदा गीत शास्त्रीय संगीत पर आधारित हैं। रागों में मुझे राग बसंत-बहार और राग ललित की कुछ पहचान है सो इन पर आधारित गीत मुझे विशेष-प्रिय हैं।अन्य गीतों में प्रयुक्त रागों की पहचान करने की कोशिश भी मैं करता रहता हूँ। कल कुछ मित्रों से बातचीत के दौरान मुझे राग ललित पर आधारित एक बेहद खूबसूरत गीत याद आया। फ़िल्म “लीडर” का यह गीत दिलीप कुमार और वैजयंती माला पर फ़िल्माया गया है। इसके बोल लिखे हैं शकील बदायूंनी ने और संगीत दिया है नौशाद साहब ने। गीत है:

इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहल, सारी दुनिया को मोहब्बत की निशानी दी है

राग ललित पर आधारित यह गीत मैं आगे आपको सुनवाऊँगा भी –लेकिन इससे पहले मैं आपको यह बता दूं कि शकील साहब के इन दिलनशीं अश’आरों को शब्दों के जादूगर साहिर लुधियानवी ने बिल्कुल पसंद नहीं किया। साहिर की सोच कम्यूनिस्ट थी और उनकी नज़र में ताजमहल का निर्माण एक अमीर आदमी द्वारा ग़रीबों की मोहब्बत का मज़ाक उड़ाने जैसा था! इसलिए शकील साहब की नज़्म का जवाब देते हुए साहिर ने एक मशहूर नज़्म लिखी:

इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहल, हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक
मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझसे!

अब राग ललित के बारे में भी आपको बता दूं। यह सुबह के समय गाया जाने वाला राग है। ललित एक मीठा, दिलखुश और अध्यात्म को जगाने वाला राग माना जाता है। इसमें “रे” और “ध” स्वरों पर अधिक ज़ोर दिया जाता है लेकिन पाँचवा स्वर “प” इसमें नहीं होता।

राग ललित की साधना सामान्यत: कठिन मानी जाती है। हालांकि फ़िल्म “लीडर” के गीत में मोहम्म्द रफ़ी और लता मंगेशकर ने इस कठिन राग को जिस सहजता से गाया है वह इन दोनों कलाकारों की योग्यता को सिद्ध करता है। आइये सुनते हैं यह गीत:

 

इसके अलावा फ़िल्म “अमर प्रेम” का यह गीत भी राग ललित पर आधारित है और मुझे बहुत पसंद है: