संगीत और हमारा जीवन

माइक्रोफोन के प्रकार :

माइक्रोफोन के प्रकार :

माइक्रोफोन के भी अनेक प्रकार होते है, लेकिन इनके काम करने के तरीके और इनकी आवाज़ की गुणवत्ता को ध्यान में रख कर इन्हें तीन भागो में बांटा गया है. जो निम्नलिखित है.

1. Shotgun माइक्रोफोन : ये एक बूम पोल ( Boom Pole ) और बूम स्टैंड ( Boom Stand ) का बना होता है. इन माइक्रोफोन का इस्तेमाल बिलकुल सही ऑडियो को निकलने के लिए किया जाता है, इनमे आसपास हो रही हलचल या फिर शोर नही आता बल्कि ये सिर्फ आपके द्वारा इसमें बोली गई आवाज़ को ही एनालॉग डाटा के रूप में लेता है.

नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

स्वर यंत्र, गले के अंदर सूजन, श्वसनीशोथ के उपचार, कंठ रोग, गले के रोग का इलाज

नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

कारण :-

अधिक सर्दी लगना, पानी में अधिक भींगना, अधिक देर तक गाना गाना, गले में धूल का कण जमना, धुंआ मुंह में जाना, अधिक जोर से बोलना तथा अचानक मौसम परिवर्तन के कारण यह रोग होता है।

लक्षण :-

इस रोग में स्वरयंत्र की श्लैष्मिक झिल्ली फूल जाती है और उससे लसदार श्लेष्मा निकलने लगता है। गला कुटकुटाना और जलन होना, कड़ा श्लेष्मा निकलना, कुत्ते की तरह आवाज होना, सूखी खांसी आना, आवाज खराब होना या गला बैठ जाना, बुखार होना, प्यास अधिक लगना, भूख न लगना, सांस लेने में कष्ट होना आदि इस रोग के मुख्य लक्षण है।

क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर

मंच संचालन का तरीका, एंकरिंग टिप्स, एंकरिंग कैसे करे, पत्रकार बनने के लिए योग्यता

जब भी हम टीवी एंकर्स के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में जो नाम सबसे पहले आते हैं, उनमें शामिल हैं अमिताभ बच्चन, अर्चना पूरन सिंह, रक्षंदा खान, मंदिरा बेदी, शेखर सुमन, जावेद जाफरी, साजिद खान, सिमी ग्रेवाल, अमन वर्मा, मिनी माथुर, रागेश्वरी, रुबी भाटिया, तबस्सुम और इला अरुण. टीवी के इन तमाम एंकर्स की फेहरिस्त को गौर से देखें, तो एक बात सामने आती हैं कि टीवी एंकरिंग भी एक करियर के लिए एक अच्छा विकल्प है. मनोरंजन से भरपूर वर्तमान दौर में टेलीविजन रोजगार का बेहतर माध्यम बन गया है.

टांसिल होने पर

टांसिल होने पर

अनन्नास का जूस गर्म करके पियें। टांसिल के रोगी को अनन्नास के टुकड़े पर नींबू का रस निचोड़ कर खिलाना चाहिए, टॉसिल का रोग नष्ट हो जायेगा और पानी से कुल्ला करें, लाभ होगा। थोड़ी वेदना होगी, डरें नहीं। जिन लोगों को छाले होते रहते हैं वे खाने के बाद थोड़ी सौंफ लिया करें। छालें नहीं होंगे। देशी घी में कपूर मिलाकर नित्य चार बार लगायें और लार गिराऐं। फिर कुल्ला कर लें। पान में चना के बराबर कपूर का टुकडा रखकर चबाएं और पीक थूकते जाएं। ध्यान रहे पीक पेट में न जाए। मसूड़े फूलना, दर्द होना, टीस उठना आदि होने पर भुना हुआ जीरा और सेंधा नमक समान भाग पीसकर, छानकर मसूडे पर रगड़ें और लार टपका

नई स्वरयंत्र की सूजन

श्वसनीशोथ के उपचार, स्वर यंत्र, गले के अंदर सूजन, ब्रोंकाइटिस के लिए स्थायी इलाज, श्वसनीशोथ के लक्षण, ब्रोंकाइटिस की दवा, कंठ रोग, ब्रोंकाइटिस उपचार

नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

कारण :-

अधिक सर्दी लगना, पानी में अधिक भींगना, अधिक देर तक गाना गाना, गले में धूल का कण जमना, धुंआ मुंह में जाना, अधिक जोर से बोलना तथा अचानक मौसम परिवर्तन के कारण यह रोग होता है।

लक्षण :-

इस रोग में स्वरयंत्र की श्लैष्मिक झिल्ली फूल जाती है और उससे लसदार श्लेष्मा निकलने लगता है। गला कुटकुटाना और जलन होना, कड़ा श्लेष्मा निकलना, कुत्ते की तरह आवाज होना, सूखी खांसी आना, आवाज खराब होना या गला बैठ जाना, बुखार होना, प्यास अधिक लगना, भूख न लगना, सांस लेने में कष्ट होना आदि इस रोग के मुख्य लक्षण है।

गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की

गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की

अक्सर ज्यादा धूम्रपान करने (बीड़ी, सिगरेट पीने से), शराब पीने, खाने में ठंडी चीजे खाने से, ठंडी चीजों के खाने के बाद तुरंत ही गर्म चीजें खाने से, पेट में बहुत ज्यादा कब्ज रहने से, कच्चे फल खाने या फिर नाक तथा गला खराब करने वाली चीजों को सूंघने से, अम्लीय (खट्टे) चीजों को खाने से या ज्यादा देर तक बातें करने के कारण गले में खराबी आ जाती है जिससे गले में सूजन, दर्द, खुश्की तथा थूक निगलने में परेशानी या गला बैठ जाना आदि रोग पैदा हो जाते हैं।

लक्षण

वैदिक विज्ञान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत'रागों' में चिकित्सा प्रभाव होने का दावा किया है।

संगीत के तत्व, जीवन में संगीत का महत्व, संगीत का प्रभाव निबंध, संगीत द्वारा विभिन्न बीमारियों का इलाज, भारतीय संगीत में कुल कितने स्वर शुद्ध एवं विकृत होते हैं, संगीत और जीवन, दोपहर के राग, संगीत आणि आरोग्य

प्राचीन काल से ही संगीत को बारंबार चिकित्सीय कारक के रूप में उपयोग में लाया जाता रहा है। भारत में संगीत, मधुर ध्वनि के माध्यम से एक योग प्रणाली की तरह है, जो मानव जीव पर कार्य करती है तथा आत्मज्ञान की हद के लिए उनके उचित कार्यों को जागृत तथा विकसित करती हैं, जोकि हिंदू दर्शन और धर्म का अंतिम लक्ष्य है। मधुर लय भारतीय संगीत का प्रधान तत्व है।'राग' का आधार मधुर लय है। विभिन्न'राग' केन्द्रीय तंत्रिका प्रणाली से संबंधित अनेक रोगों के इलाज में प्रभावी पाए गए हैं। चिकित्सा के रूप में संगीत के प्रयोग करने से पहले यह अवश्य पता करना चाहिए कि किस प्रकार के संगीत का उपयोग हो.

कंठध्वनि

स्वर (Voice) या कंठध्वनि की उत्पत्ति उसी प्रकार के कंपनों से होती है जिस प्रकार वाद्ययंत्र से ध्वनि की उत्पत्ति होती है। अत: स्वरयंत्र और वाद्ययंत्र की रचना में भी कुछ समानता है। वायु के वेग से बजनेवाले वाद्ययंत्र के समकक्ष मनुष्य तथा अन्य स्तनधारी प्राणियों में निम्नलिखित अंग होते हैं :

1. कंपक (Vibrators) इसमें स्वर रज्जुएँ (Vocal cords)Clone भी सम्मिलित हैं।

2. अनुनादक अवयव (resonators) इसमें निम्नलिखित अंग सम्मिलित हैं :

क. नासा ग्रसनी (nasopharynx), ख. ग्रसनी (pharynx),

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राग परिचय

भारतीय शास्त्रीय संगीत
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राग परिचय
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