संगीत और हमारा जीवन

नई स्वरयंत्र की सूजन

श्वसनीशोथ के उपचार, स्वर यंत्र, गले के अंदर सूजन, ब्रोंकाइटिस के लिए स्थायी इलाज, श्वसनीशोथ के लक्षण, ब्रोंकाइटिस की दवा, कंठ रोग, ब्रोंकाइटिस उपचार

नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

कारण :-

अधिक सर्दी लगना, पानी में अधिक भींगना, अधिक देर तक गाना गाना, गले में धूल का कण जमना, धुंआ मुंह में जाना, अधिक जोर से बोलना तथा अचानक मौसम परिवर्तन के कारण यह रोग होता है।

लक्षण :-

इस रोग में स्वरयंत्र की श्लैष्मिक झिल्ली फूल जाती है और उससे लसदार श्लेष्मा निकलने लगता है। गला कुटकुटाना और जलन होना, कड़ा श्लेष्मा निकलना, कुत्ते की तरह आवाज होना, सूखी खांसी आना, आवाज खराब होना या गला बैठ जाना, बुखार होना, प्यास अधिक लगना, भूख न लगना, सांस लेने में कष्ट होना आदि इस रोग के मुख्य लक्षण है।

गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की

गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की

अक्सर ज्यादा धूम्रपान करने (बीड़ी, सिगरेट पीने से), शराब पीने, खाने में ठंडी चीजे खाने से, ठंडी चीजों के खाने के बाद तुरंत ही गर्म चीजें खाने से, पेट में बहुत ज्यादा कब्ज रहने से, कच्चे फल खाने या फिर नाक तथा गला खराब करने वाली चीजों को सूंघने से, अम्लीय (खट्टे) चीजों को खाने से या ज्यादा देर तक बातें करने के कारण गले में खराबी आ जाती है जिससे गले में सूजन, दर्द, खुश्की तथा थूक निगलने में परेशानी या गला बैठ जाना आदि रोग पैदा हो जाते हैं।

लक्षण

वैदिक विज्ञान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत'रागों' में चिकित्सा प्रभाव होने का दावा किया है।

संगीत के तत्व, जीवन में संगीत का महत्व, संगीत का प्रभाव निबंध, संगीत द्वारा विभिन्न बीमारियों का इलाज, भारतीय संगीत में कुल कितने स्वर शुद्ध एवं विकृत होते हैं, संगीत और जीवन, दोपहर के राग, संगीत आणि आरोग्य

प्राचीन काल से ही संगीत को बारंबार चिकित्सीय कारक के रूप में उपयोग में लाया जाता रहा है। भारत में संगीत, मधुर ध्वनि के माध्यम से एक योग प्रणाली की तरह है, जो मानव जीव पर कार्य करती है तथा आत्मज्ञान की हद के लिए उनके उचित कार्यों को जागृत तथा विकसित करती हैं, जोकि हिंदू दर्शन और धर्म का अंतिम लक्ष्य है। मधुर लय भारतीय संगीत का प्रधान तत्व है।'राग' का आधार मधुर लय है। विभिन्न'राग' केन्द्रीय तंत्रिका प्रणाली से संबंधित अनेक रोगों के इलाज में प्रभावी पाए गए हैं। चिकित्सा के रूप में संगीत के प्रयोग करने से पहले यह अवश्य पता करना चाहिए कि किस प्रकार के संगीत का उपयोग हो.

कंठध्वनि

स्वर (Voice) या कंठध्वनि की उत्पत्ति उसी प्रकार के कंपनों से होती है जिस प्रकार वाद्ययंत्र से ध्वनि की उत्पत्ति होती है। अत: स्वरयंत्र और वाद्ययंत्र की रचना में भी कुछ समानता है। वायु के वेग से बजनेवाले वाद्ययंत्र के समकक्ष मनुष्य तथा अन्य स्तनधारी प्राणियों में निम्नलिखित अंग होते हैं :

1. कंपक (Vibrators) इसमें स्वर रज्जुएँ (Vocal cords)Clone भी सम्मिलित हैं।

2. अनुनादक अवयव (resonators) इसमें निम्नलिखित अंग सम्मिलित हैं :

क. नासा ग्रसनी (nasopharynx), ख. ग्रसनी (pharynx),

पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य

चरण स्पर्श का महत्व, पैर छूने के फायदे

पैर छूने से ऊर्जा का संचार होता है
भारतीय सभ्यता और संस्कृति बहुत प्राचीन हैं | ऋषि मुनियों द्वारा स्थापित इस संस्कृति का आधार गूढ़ वैज्ञानिक रहस्य है | इन ऋषियों ने काफी शोध के बाद हमारी सभ्यता और संस्कृति के लिए कुछ नियम बनाएं हैं और उन्हें शास्त्रों में संजों के रखा है | ऐसा ही एक नियम है भारतीय सभ्यता में "पैर छूना " जो सिर्फ एक अभिवादन और आदर करने का तरीका नहीं है बल्कि उसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी काम करता है | हम सिर्फ पैर ही क्योंछूते हैं ? शरीर का कोई और हिस्सा जैसे पेट, पीठ और टांग छू कर आशीर्वाद क्यों नहीं लेते ? क्यूंकि इसके पीछे भी एक तार्किक वैज्ञानिक कारण है |

गायक बनने के उपाय और कैसे करें रियाज़

गायक बनने के उपाय और कैसे करें रियाज़

गायन हर किसी में यह विशेषता नहीं होती हैं। संगीत को भगवान की दें मानी जाती है और ऐसा सोंचा जाता है की जिसपे भगवान की कृपा होती है वही गा सकता है. परन्तु ईश्वर ने सबको अपनी कर्मठता से अपने सपने साकार करने की शक्ति दी है. अगर आपका गला और आवाज़ साधारण भी है, तो भी जबरदस्त रियाज़ करके आप अपनी आवाज़ में न सिर्फ नयी जान ला सकते है बल्कि संगीत की बुलंदियों को छू सकते हैं. गायन में बेहतर बनने के लिए दैनिक अभ्यास की जरूरत होती है। संगीत सीखने के लिए पहले संगीत का ज्ञान जरूरी है, बेहतर गायक बनने के समय लगेगा, लेकिन आप जल्दी परिणाम देखने के लिए निम्न टिप्स शुरू करना चाहिए।

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राग परिचय

राग परिचय
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सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 1,313 5
रागों के प्रकार 2,878 5
शुद्ध स्वर 1,517 5
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रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग 2,762 4
स्वर मालिका तथा लिपि 1,017 2
कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- 675 2
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 690 2
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संगीत और हमारा जीवन
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भारतीय शास्त्रीय संगीत
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गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी) 542 3
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हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है 872 1
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हारमोनियम के गुण और दोष 3,090 1
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भारतीय संगीत 573 0
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स्वरों का महत्त्व क्या है? 533 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है 908 0
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स्वर परिचय
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स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय 183 0
सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 216 0
शास्त्रीय नृत्य
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भारतीय नृत्य कला 1,254 9
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 579 5
लता मंगेशकर का नाम : भारतीय संगीत की आत्मा 62 1
भरत नाट्यम - तमिलनाडु 333 0
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माइक्रोफोन का कार्य 422 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
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संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 3,813 7
गुरु-शिष्य परम्परा 1,042 4
भारत में संगीत शिक्षण 1,327 1
कैराना का किराना घराने से नाता 363 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
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फकीर हरिदास और तानसेन के संगीत में क्या अंतर है? 3 3
उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 674 2
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तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 685 2
बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत 270 1
जब बेगम अख्तर ने कहा, 'बिस्मिल्लाह करो अमजद' 673 1
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अकबर और तानसेन 713 1
बैजू बावरा 684 1
ठुमरी गायिका गिरिजा देवी हासिल कर चुकी हैं कई पुरस्कार और सम्मान 230 0
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 605 0
सिलेबस
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सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 413 2
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 307 1
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 277 0
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 219 0