संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है

संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है

गुलज़ार साहब कहते है

" संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है , सुबह उठ कर पूजा के श्लोक , तकरीबन उसी समय दूधवाला आता है अपनी की साइकिल की घंटी और साथ में सिटी बजाने से लेकर एक फ़क़ीर के गाने की आवाज़ से लेकर हमारी माँ की खाना पकाते समय की गुनगुनाहट , और रात में लोरियों की गरमाहट , संगीत हमारे जीवन की खाली जगह को भर देता है और इसीलिए संगीत सब को पसंद है "

गुलज़ार साहब की बात बिलकुल सही है और क्यूँ न हो उन्होंने गाने ही इस तरह के लिखे है जो जीवन और दिल के बहुत करीब महसूस होते है , गुलज़ार साहब को पचास साल से ऊपर हो चुके है फ़िल्मी दुनिया में मगर इस सालो मे उन्होंने लगभग 122 फिल्मों के लिए अपना योगदान दिया है , यानि गुलज़ार ने थोक भाव में गीत नहीं लिखा। संख्या से ज्यादा उन्होंने गुणवत्ता का खयाल रखा। सिनेमा जैसे माध्यम में इसको बचाये रखना निश्चय ही बड़ी उपलब्धी है। इसी कारण से वो लगातार प्रासंगिक बने रहें हैं। उनके कम ही गीत होंगे जो गुमनामी के अंधेरे में खोये होंगे।

गुलज़ार के गीतों में व्यापक विविधता है पर जैसे उनके गीतों में रात, चांद, धूप, प्रेम बार बार आते रहतें हैं। वैसे ही कुछ खास ट्रेंड या प्रवृति को हम पहचान सकते हैं।गुलज़ार साहब ने अपना पहला गीत फिल्म श्रीमान सत्यवादी के लिए लिखा था गुलज़ार दानवी के नाम से .इस फिल्म में गुलज़ार साहब के साथ हसरत जयपुरी और गुलशन बावरा ने भी उनके साथ गीत लिखे थे , हालाँकि ये गुलज़ार साहब को सफलता मिली जब उन्होंने फिल्म बंदिनी का मोरा गोरा अंग लेइ ले " लिखा , ध्यान रहे इस फिल्म में उन्हें शैलेन्द्र साहब की सिफारिश पर लिया गया था , सारे गाने शैलेन्द्र साहब ने लिखे थे मगर एक गाना जो हटकर था वो गुलज़ार साहब का था ,

यहाँ से गुलज़ार साहब को दुनिया एक गीतकार के रूप में पहचानने लगी थी , उसके बाद हेमंत दा के साथ हवाओ पे लिख दो हवाओ के नाम भी हिट हो गया . मगर ख़ामोशी के गानों ने गुलज़ार साहब को दुसरे गीतकारो से मिलो आगे पंहुचा दिया ,... तुम पुकार लो , हमने देखी है इन आँखों की , वो शाम कुछ अजीब थी ,.ये ऐसे गीत है जो आज भी रातों को सुन लो तो रात और भी हसीं हो जाती है , इन गानों के बाद गुलज़ार साहब ने पीछे मुड़ के नहीं देखा ,ख़ामोशी के बाद गुड्डी और आनंद ,

1972 का साल हमारे फिल्म जगत के संगीत के लिए एक बहुत ही बेहतरीन समय साबित हुआ जब पंचम दा और गुलज़ार साहब की जोड़ी जमी फिल्म परिचय से . एक बार फिर गुलज़ार साहब ने सारे गाने ;लिखे और आज भी वो गाने सुने जाते है , परिचय के बाद पंचम दा और गुलज़ार साहब एक दुसरे के पर्यायवाची बन गए , अमूमन होता ये है के एक संगीतकार एक ट्यून बनाकर गीतकार को दे देता है और फिर गीतकार उस मीटर में गीत लिखता है मगर पंचम और गुलज़ार की जोड़ी कुछ अजीब तरह की थी यहाँ उल्टा होता था , गुलज़ार साहब गीत लिख के ले जाते और फिर पंचम दा उसकी ट्यून बनाते थे l

मुझे लगता है पंचम और गुलज़ार की इस जोड़ी पर एक ग्रन्थ लिखा जा सकता है , खैर परिचय के बाद नमक हराम , दूसरी सीता और उसके बाद आंधी , यहाँ पर मै जिक्र करना चाहूँगा गुलज़ार साहब की शैली का जो उनको दूसरो से अलग बहुत अलग बनती है , उनके गीत ऐसे शब्दों में बंधे होते है जिनका मतलब गीत को 4-5 बार सुनने के बाद समझ आता है . मगर एक बार समझ में आ गया तो बरसो तक आपके दिलोंदिमाग पे छाए रहता है , जैसे आंधी के एक गाने में उन्होंने लिखा है " तिनको के नशेमन तक" यहाँ नशेमन का मतलब है झोपडी , अब मुझे नहीं लगता के कोई भी गीतकार अपनी गाने में झोपडी का इतना सुन्दर प्रयोग कर सकता है , आंधी के बाद खुशबू , किनारा , हर एक गाना हीरे की तरह दमकता है ,

गुलज़ार साहब और पंचम दा की इस जोड़ी ने अजीबोगरिब और प्रयोगधर्मी गाने भी बनाये जैसे मास्टरजी की आ गयी चिट्ठी या घर का तेरे बिना जिया जाये ना , या कभी गुलज़ार साहब चाँद को चुराते हुए चर्च के पीछे बैठने की बात करते है , वही हसीं ठिठोल से भरपूर गोलमाल है भाई सब गोलमाल है ,या नमकीन के संजीदा और एक जीवन के फलसफे से भरा हुआ राह पे रहते है , या मासूम का तुझसे नाराज़ नहीं जिंदगी ,इजाजत के गाने कौन भूल सकता है , जब गुलज़ार साहब पंचम दा के पास मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है को लिख के पंचम के पास लेकर गए और बोले इस पर गाना बनाना है तो पंचम दा ने कहा यार कल से टाइम्स ऑफ़ इंडिया लेकर आ जाना बोलना इस न्यूज़ पर भी गाना बनाओ , जब ये गाना सुने तो क्या लिखा है और क्या बनाया , लिबास इस जोड़ी की आखिरी फिल्म थी , पंचम ,गुलज़ार के दोस्त और सबसे प्रिय सगीतकार थे । पंचम के साथ उन्होंने सबसे अधिक काम किया 21 फ़िल्मों मे, पंचम दा के जाने के बाद गुलज़ार साहब ने अपनी जोड़ी बनायीं एक नए उभरते हुए संगीतकार विशाल भारद्वाज के साथ एक दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक जंगल बुक से , और इस धारावाहिक का टाइटल सॉंग " जंगल जंगल बात चली है पता चला है " गली गली ने गूंजा , बाद में विशाल के साथ माचिस , सत्या , मकबूल , ओमकारा लगभग 12 फिल्मे की है और कर रहे है .

अपने गीतों मे गुलज़ार ने कुछ शब्द भी इजाद कियें हैं। चप्पा-चप्पा, चुपडी चुपडी ,छईयां छईयां, छईं छप्पा छईं, , मय्या मय्या, हुम हुम शब्दों के प्रयोग से गीत और खास हो जाता है।गुलज़ार वैसे सब को भाते हैं पर युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं क्योंकि उनके पास युवा मन की सारी अभिव्यक्तियां हैं। जिंदगी को फ़ूंक देने का जोश, दिल निचोडने का जज्बा, किसी को शिद्दत से अपना कह सकने की चाहत, उदास शाम का खालीपन और सबसे खुबसुरत, प्रेम को स्थान देने की सरल अभिव्यक्ति सिर्फ गुलज़ार साहब के पास ही है ,ज़माना बदला पर गुलज़ार साहब की कलम और तेज़ होती चली गयी , अब गुलज़ार साहब नए ज़माने के हिसाब से गीत लिखने लगे और वो भी सुनने वालों के दिलों में छाते चले गए , चल छैया छैया , कजरारे कजरारे , बीडी जलाई ले , जुबां पे लागा , बरसो रे मेघा ,दिल तो बच्चा है जी , आदि

जब गुलज़ार साहब फिल्मों में आये तब उस समय फ़िल्मों में गीतकार के तौर पर जगह बनाना आसान नहीं रहा होगा। गुलज़ार को उस समय साहिर लुधियानवी, शकील बदायुनी, शैलेन्द्र, हसरत जयपुरी, मजरुह सुल्तानपुरी, आनंद बक्षी जैसे गीतकारों के बीच जगह बनानी पडी। गुलज़ार हिन्दी सिनेमा में शैलेन्द्र के सबसे ज्यादे करीब हैं। शैलेन्द्र को वो सबसे महान गीतकार मानते हैं। उन्ही के शब्दों में
“ मेरी राय में शैलेन्द्र हिन्दी सिनेमा में सबसे महान गीतकार हुए। इससे पहले डी.एन. मधोक थे। शैलेन्द्र कविता और गीत के अंतर को जानते थे। उन्होंने गीतों की साहित्यिकता कायम रखते हुए उसे आम आदमी के छंद में पेश किया। साहिर साहब साहित्यिक कवि थे और रहे उन्होंने माध्यम को उतना स्वीकार नहीं किया जितना माध्यम नें उन्हें।”

गुलज़ार साहब ने गुलज़ार ने अपने समकालीन सभी संगीतकारों के साथ काम किया जैसे- सलिल चौधरी (आनंद. मेरे अपने), शंकर जयकिशन (सीमा), एस.डी. बर्मन (बंदिनी), हेमंतकुमार (खामोशी), मदनमोहन (मौसम), लक्ष्मीकांत प्यारेलाल (गुलामी), खययाम (थोडी सी बेवफ़ाई, मुसाफ़िर), भुपेन हजारिका (हु तु तु, रुदाली),हृदयनाथ मंगेशकर (लेकिन), अनु मलिक (फ़िजां अक्स, फ़िलहाल), शंकर एहसान लाय (बंटी और बबली, झुम बराबर झुम), ए. आर. रहमान (दिल से गुरु, स्लमडाग मिलेनर)। नये संगीतकारों में गुलज़ार ने सबसे ज्यादा विशाल भारद्वाज के साथ काम किया है ।

गुलज़ार साहब को पदम् भूषण से भी नवाज़ा गया है इसके अलावा गुलज़ार साहब को अवार्ड्स की कोई कमी नहीं है उनकी पोटली में 1 ऑस्कर ,5 राष्ट्रीय पुरस्कार ,20 फिल्मफेयर ,और न जाने कितने अवार्ड्स है पर गुलज़ार साहब आज इस उम्र में भी टाप टेन की सूची में टाप पर बजते है। जिस उम्र में आकर सभी नये दौर और नयी पीढी को कोसते हैं कि अब वैसी बात कहां?

गुलज़ार साहब आज भी सक्रिय है और फिल्म "मटरू की बिजली का मंडोला " उनकी आने वाली फिल्म है , उनके जैसा गीतकार एक किवदंती है , न जाने कितने गीतकार आये है और चले गए पर गुलज़ार साहब आज भी वही एक स्तम्भ की तरह मौजूद है ,

सोचा था कुछ गहराई वाली बाते लिखूंगा गुलज़ार साहब के गानों के बारे में मगर उनका हर एक गाना एक किताब की तरह महसूस होता है , जितनी बार सुनो कुछ नयी बात समझ आ जाती है ,आज जब तेज संगीत और शोर शराबे वाले बेमतलब गाने गला घोट देते है ,वही गुलज़ार साहब के गाने इस जिन्दगी को बचाए रखने के लिए शुद्ध हवा का काम करते है .....

पतझड में कुछ पत्तों के गिरने की आहट,कानों में पहन के लौट आई थी
पतझड की वो शाख अभी तक कांप रही है,वो शाख गिरा दो मेरा वो सामान लौटा दो....

Vote: 
No votes yet

आप भी अपने लेख फिज़िका माइंड वेबसाइट पर प्रकाशित कर सकते है|

आप अपने लेख WhatsApp No 7454046894 पर भेज सकते है जो की पूरी तरह से निःशुल्क है | आप 1000 रु (वार्षिक )शुल्क जमा करके भी वेबसाइट के साधारण सदस्य बन सकते है और अपने लेख खुद ही प्रकाशित कर सकते है | शुल्क जमा करने के लिए भी WhatsApp No पर संपर्क करे. या हमें फ़ोन काल करें 7454046894

 

 

 

राग परिचय

राग परिचय
Total views Views today
सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि 4,891 35
शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व 1,648 10
रागों के प्रकार 1,607 7
शुद्ध स्वर 908 4
स्वर मालिका तथा लिपि 1,025 4
रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत 718 4
रागों का विभाजन 223 3
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी 125 3
संगीत संबंधी कुछ परिभाषा 1,710 3
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 377 3
रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग 2,206 3
राग यमन (कल्याण) 978 2
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है 1,181 2
राग बहार 569 2
सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। 330 2
राग रागिनी पद्धति 1,368 2
राग भूपाली 1,110 2
राग दरबारी कान्हड़ा 1,036 2
आविर्भाव-तिरोभाव 774 2
राग ललित! 861 2
राग 'भैरव':रूह को जगाता भोर का राग 744 2
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- 1,256 1
षड्जग्राम-तान बोधिनी 136 1
रागांग राग वर्गीकरण से अभिप्राय 283 1
राग- गौड़ सारंग 225 1
स्वर मालिका तथा लिपि 532 1
वादी - संवादी 781 1
नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज। 508 1
थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या 1,459 1
स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ? 427 1
राग मुलतानी 397 1
सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 723 0
रागों मे जातियां 1,696 0
सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान 997 0
स्वर (संगीत) 667 0
कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- 421 0
ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है 631 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत
Total views Views today
अलंकार- भारतीय शास्त्रीय संगीत 2,035 12
निबद्ध- अनिबद्ध गान: व्याख्या, स्वरूप, भेद 818 8
'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है 539 6
ख्याल गायकी के घरानेएक दृष्टि : भाग्यश्री सहस्रबुद्धे 1,191 5
हारमोनियम के गुण और दोष 2,251 4
षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है 551 3
संगीत शास्त्र परिचय 2,212 3
जानिए भारतीय संगीत के बारे में 954 3
भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी 1,019 3
रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। 264 3
हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है 582 3
भारतीय संगीत 422 3
गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी) 337 2
राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं। 206 2
भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है 651 1
संगीत से सम्बन्धित 'स्वर' के बारे में है 457 1
भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। 153 1
संगीत का विकास और प्रसार 845 1
हिन्दुस्तानी संगीत प्रणाली में प्रचलित गायन के प्रकार 752 1
रागों का सृजन 402 0
निबद्ध- अनिबद्ध गान: 315 0
स्वरों का महत्त्व क्या है? 365 0
तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है 397 0
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 890 0
नाद-साधन भी मोक्ष प्राप्ति का ऐक मार्ग है। 299 0
संस्कृत में थाट का अर्थ है मेल 267 0
नाट्य-शास्त्र संगीत कला का प्राचीन विस्तरित ग्रंथ है 441 0
ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं 392 0
संगीत और हमारा जीवन
Total views Views today
गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका 837 8
नई स्वरयंत्र की सूजन 329 7
संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा 1,024 6
गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त 397 4
टांसिल होने पर 349 3
खर्ज और ओंकार का अभ्यास क्या है ? 529 3
भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज 383 3
गुरु की परिभाषा 1,141 3
रियाज़ कैसे करें 10 तरीके 727 2
गायक कलाकारों और बच्चों के लिए विशेष 454 2
संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है 325 2
गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की 427 2
संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा 458 2
भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत 702 2
संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव 338 2
भारतीय कलाएँ 412 2
संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव 628 1
माइक्रोफोन के प्रकार : 507 1
गायक बनने के उपाय और कैसे करें रियाज़ 980 1
वैदिक विज्ञान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत'रागों' में चिकित्सा प्रभाव होने का दावा किया है। 495 1
अबुल फजल ने 22 नाड़ियों में सात स्वरों की व्याप्ति बताई जो इस प्रकार 198 1
नवजात शिशुओं पर संगीत का प्रभाव 642 1
कैसे जानें की आप अच्छा गाना गा सकते हैं 423 0
चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख 653 0
कैसे रखें आवाज के जादू को बरकरार 855 0
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 234 0
माइक्रोफोन की हानि : 268 0
क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर 397 0
कंठध्वनि 309 0
नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला) 335 0
गायकी और गले का रख-रखाव 348 0
रागों में छुपा है स्वास्थ्य का राज 525 0
पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य 587 0
Sounds magic ध्वनियों का इंद्रजाल 432 0
शास्त्रीय संगीत और योग 539 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
Total views Views today
संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 2,802 8
भारत में संगीत शिक्षण 1,065 1
कैराना का किराना घराने से नाता 271 0
गुरु-शिष्य परम्परा 685 0
वीडियो
Total views Views today
राग भीमपलासी पर आधारित गीत 674 3
नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती 322 1
मोरा सइयां 215 0
कर्ण स्वर 270 0
वंदेमातरम् 191 0
राग बागेश्री | पंडित जसराज जी 420 0
ब्रेथलेसऔर अरुनिकिरानी 222 0
द ब्यूटी ऑफ राग बिलासखानी तोड़ी 259 0
राग यमन 269 0
शास्त्रीय नृत्य
Total views Views today
भरत नाट्यम - तमिलनाडु 223 2
भारतीय नृत्य कला 770 1
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 293 0
माइक्रोफोन का कार्य 256 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
Total views Views today
अकबर और तानसेन 510 1
बैजू बावरा 434 1
उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 401 1
जब बेगम अख्तर ने कहा, 'बिस्मिल्लाह करो अमजद' 551 1
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 384 0
तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 434 0
बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत 152 0
ठुमरी गायिका गिरिजा देवी हासिल कर चुकी हैं कई पुरस्कार और सम्मान 142 0
रचन: श्री वल्लभाचार्य 512 0
स्वर परिचय
Total views Views today
संगीत रत्नाकर के अनुसार स्वरों के कुल, जाति 133 1
स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय 84 0
स्वर और उनसे सम्बद्ध श्रुतियां 162 0
सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 133 0
संगीत के स्वर 263 0
स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 174 0
स्वर ऋषभ का शास्त्रीय परिचय 147 0
स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 154 0
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 140 0
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 128 0
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 111 0
सिलेबस
Total views Views today
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 200 1
सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 263 0
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 161 0
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 220 0