राग परिचय

गायकी और गले का रख-रखाव

एक गायक के लिए गला भगवान का दिया हुआ एक प्राकृतिक वाद्ययंत्र है जो बड़ी बखूबी से संगीत की ऐसी ऐसी ध्वनियों की प्रस्तुति कर सकता है जो किसी और इंसान के बनाए हुए वाद्ययंत्र के लिए संभव नहीं है. अच्छी सुरीली आवाज़ ईश्वर की दें है और इसलिए गायकी की चाह रखने वाले लोगों को, खासकर कलाकारों को अपने गले का अनिवार्य रूप से अपने गले का ध्यान रखना चाहिए. बहुत से बड़े बड़े गायक कलाकार और संगीतकार हैं जो विचारपूर्वक ध्यान रखते भी हैं. आइये जानें कि संगीत और सुर की साधना के साथ साथ गले का ध्यान कैसे रखा जाये ताकि बेहतर से बेहतर गायकी की ऊंचाईयों को छुआ जा सके.

अल्कोहल ड्रिंक्स - ये दोनों आपके गले के पक्के (पक्के मतलब वाकई पक्के) दुश्मन हैं

अल्कोहल ड्रिंक्स

 अल्कोहल ड्रिंक्स - ये दोनों आपके गले के पक्के (पक्के मतलब वाकई पक्के) दुश्मन हैं. इसकी वजह है कि अल्कोहल ड्रिंक्स ये दोनों ही आपके शरीर से पानी निकालते हैं और गले में सूखापन लाते हैं. इसीलिए अगर आप अगर अपनी संगीत साधना को लेकर गम्भीर हैं तो कॉफी और अल्कोहल ड्रिंक्स से कोसों दूर रहें.

स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ?

स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ?

स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई है। ‘स्वन’ शब्द के लिए अंग्रेजी में ‘Phone’ शब्द है। ध्वनि का लघुत्तम अनुभवगम्य विच्छिन्न खण्ड स्वन विज्ञान में ‘स्वन’ कहलाता है। ‘ध्वनि’ शब्द संस्कृत ‘ध्वन्’ (आवाज करना, शब्द करना) धातु के साथ इण (इ) प्रत्यय संम्पृक्त करने से बनता है। इसका अर्थ होता है-‘आवाज’ या ‘आवाज करना’। व्यक्ति जब बोलता है, तो उसके मुख-विवर से वायु निकलती है जो वागेन्द्रिय के माध्यम से कुछ वाणी (आवाज) प्रकट करती है, उसी को ‘ध्वनि’ कहा जाता है। संस्कृत में उसके लिए ध्वन और ध्वनन तथा स्वन और स्वनन शब्दों का प्रयोग किया गया है। किंतु सभी का आशय एक ही है। डॉ.

राग भीमपलास और भीमपलास पर आधारित गीत

यह राग काफी थाट से निकलता है। आरोह में ः?रे"' और ः?ध"' नहीं लगता और अवरोह में सब स्वर लगते हैं, इसलिये इस की जाति औडव-सम्पूर्ण मानी जाती है। इसमें ः?ग"' और ः?नी"' कोमल लगते हैं। वादी स्वर ः?म"' और सम्वादी स्वर ः?स"' माना जाता है।

गाने-बजाने का समय दिन का तीसरा प्रहर है।

आरोह--ड, स, ज्ञ, म प ड सं।

अवरोह--सं, ड, ध प, म ज्ञ रे स।

पकड़--ड स म, म ज्ञ, प म, ज्ञ म ज्ञ रे स।

रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत

रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत

मनमोहन मन में हो तुम्ही -कैसे कहूंअदाना अदाना
चाह बर्बाद करेगी – शाहजहां बागेश्री बागेश्री
शुभ घड़ी आई रे- बागेश्री बागेश्री
दीवाने तुम कि दीवाने हम -बागेश्री बागेश्री
जा रे बेईमान तुझे जन लिया- बागेश्री बागेश्री
बेदर्दी हुआ बलमा -बागेश्री बागेश्री
दगाबाज्ज तू नहीं बलमा मोरा बागेश्री
राधा ना बोले ना बोले आजाद बागेश्री बागेश्री
जाग दर्द ए इश्क जाग- अनारकली बागेश्री बागेश्री
चमन में रंग ए बहार उतरा तो मैंने देखा – ग़ज़ल गुलाम अली बागेश्री बागेश्री

स्वर मालिका तथा लिपि

स्वर मालिका तथा लिपि

भारतीय संगीत शास्त्री अन्य कई बातों में भी पाश्चात्य संगीत कारों से कहीं आगे और प्रगतिशील थे। भारतीयों ने ऐक ‘सप्तक’ ( सात स्वरों की क्रमबद्ध लडी – ‘सा री ग म प ध और नि’ को 22 श्रुतियों (इन्टरवल) में बाँटा था जब कि पाश्चात्य संगीत में यह दूरी केवल 12 सेमीटोन्स में ही विभाजित करी गयी है। भारतीयों ने स्वरों के नामों के प्रथम अक्षर के आधार पर ‘सरगमें’ बनायी जिन्हें गाया जा सकता है। ईरानियों और उन के पश्चात मुसलमानों ने भी भारतीय स्वर मालाओं (सरगमों) को अपनाया है।

खर्ज और ओंकार का अभ्यास क्या है ?

खर्ज और ओंकार का अभ्यास क्या है ?

गायकी में गले का तैयार होना बहुत आवश्यक है. गला अगर तैयार है तो गायकी स्वाभाविक रूप से, बिना ज्यादा प्रयास किये होती है. फिर सुर का सही ज्ञान हो तो संगीत सीखना आसान हो जाता है.

गले की तैयारी के दो हिस्से हैं.

गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका

गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका

साँस एक बड़ी अनोखी प्रक्रिया है. साँस शरीर को भी प्रभावित करती है और मन को भी. साँस के सही नियंत्रण से शरीर भी स्वस्थ होता है और मन भी. संगीत के रियाज़ में चूंकि शरीर और मन दोनों बड़ी भूमिका निभाते हैं इसलिए साँस का अभ्यास संगीत (गायन) में बड़ा महत्व रखता है और इसलिए इस पेज में हम साँस के बारें में जानेंगे
1. रियाज़ करते समय मुह से साँस लेना स्वाभाविक और आसान लग सकता है लेकिन, साँस सिर्फ नाक से ही लेना है.

भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज

भारतीय संगीत

भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज

भारत में संगीत, मधुर ध्वनि के माध्यम से एक योग प्रणाली की तरह है, जो मानव जीव पर कार्य करती है तथा आत्मज्ञान की हद के लिए उनके उचित कार्यों को जागृत तथा विकसित करती हैं, जोकि हिंदू दर्शन और धर्म का अंतिम लक्ष्य है। मधुर लय भारतीय संगीत का प्रधान तत्व है। 'राग' का आधार मधुर लय है। विभिन्न 'राग' केन्द्रीय तंत्रिका प्रणाली से संबंधित अनेक रोगों के इलाज में प्रभावी पाए गए हैं।

राग भूपाली

राग भूपाली

राग भूपाली
राग परिचय--

: यह राग भूप के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह पूर्वांग प्रधान राग है। इसका विस्तार तथा चलन अधिकतर मध्य सप्तक के पूर्वांग व मन्द्र सप्तक में किया जाता है। यह चंद्र प्रकाश के समान शांत स्निग्ध वातावरण पैदा करने वाला मधुर राग है। जिसका प्रभाव वातावरण में बहुत ही जल्दी घुल जाता है। रात्रि के रागों में राग भूपाली सौम्य है। शांत रस प्रधान होने के कारण इसके गायन से वातावरण गंभीर व उदात्त बन जाता है। राग भूपाली कल्याण थाट का राग है।

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