राग परिचय

षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है

षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है

भारत में शास्त्रीय संगीत की परंपरा बड़ी प्राचीन है। राग के प्रादुर्भाव के पूर्व जाति गान की परंपरा थी जो वैदिक परंपरा का ही भेद था। जाति गान के बारे में मतंग मुनि कहते हैं –

“श्रुतिग्रहस्वरादिसमूहाज्जायन्त इति जातय:”

अर्थात् – श्रुति और ग्रह- स्वरादि के समूह से जो जन्म पाती है उन्हें ‘जाति’ कहा है। Read More : षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है about षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है

भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है

भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है। सामवेद में संगीत के बारे में गहराई से चर्चा की गई है। भारतीय शास्त्रीय संगीत गहरे तक आध्यात्मिकता से प्रभावित रहा है, इसलिए इसकी शुरुआत मनुष्य जीवन के अंतिम लक्ष्य 'मोक्ष' की प्राप्ति के साधन के रूप में हुई। संगीत की महत्ता इस बात से भी स्पष्ट है कि भारतीय आचार्यों ने इसे 'पंचम वेद' या 'गंधर्व वेद' की संज्ञा दी है। भरतमुनि का 'नाट्यशास्त्र' पहला ऐसा ग्रंथ था, जिसमें नाटक, नृत्य और संगीत के मूल सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया था। Read More : भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है about भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है

सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं।

सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। सातों स्वरों के नाम क्रमश: सा, रे, ग, म, प, ध और नि हैं। इसमें प्रत्येक स्वर की आन्दोलन संख्या अपने पिछले स्वर से अधिक होती है। दूसरे शब्दों में सा से जैसे-जैसे आगे बढ़ते जाते हैं, स्वरों की आन्दोलन संख्या बढ़ती जाती है। रे की आन्दोलन संख्या सा से, ग, की, रे, से, व, म, की, ग, से अधिक होती है। इसी प्रकार प, ध और नी की आन्दोलन संख्या अपने पिछले स्वरों से ज़्यादा होती है। पंचम स्वर की आन्दोलन संख्या सा से डेढ़ गुनी अर्थात् 3/2 गुनी होती है। उदाहरण के लिए अगर सा की आन्दोलन संख्या 240 है तो प की आन्दोलन संख्या 240 की 3/2 गुनी 360 होगी। प्रत् Read More : सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। about सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं।

माइक्रोफोन की हानि :

माइक्रोफोन

माइक्रोफोन की हानि :

- माइक्रोफोन की आवाज की गुणवत्ता उतनी अच्छी नही होती.

- जब भी हम माइक्रोफोन में कुछ बोलते है तो उसके आसपास की हलचल भी माइक्रोफोन की आवाज की गुणवत्ता को कम करती है.

- बिना तार पर काम करने वाले माइक्रोफोन में बैटरी का इस्तेमाल होता है जो सिर्फ एक निर्धारित समय तक ही काम करती है.

- इनकी कीमत इनकी गुणवत्ता पर आधारित होती है. अगर आप अच्छी कीमत का माइक्रोफोन खरीदते हो तभी आपको आवाज़ की अच्छी गुणवत्ता मिलती है.

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स्वरों का महत्त्व क्या है?

स्वरों का महत्त्व क्या है?

किसी भी राग में दो स्वरों को विशेष महत्त्व दिया जाता है। इन्हें 'वादी स्वर' व 'संवादी स्वर' कहते हैं। वादी स्वर को "राग का राजा" भी कहा जाता है, क्योंकि राग में इस स्वर का बहुतायत से प्रयोग होता है। दूसरा महत्त्वपूर्ण स्वर है संवादी स्वर, जिसका प्रयोग वादी स्वर से कम मगर अन्य स्वरों से अधिक किया जाता है। इस तरह किन्हीं दो रागों में जिनमें एक समान स्वरों का प्रयोग होता हो, वादी और संवादी स्वरों के अलग होने से राग का स्वरूप बदल जाता है। उदाहरणत: राग भूपाली व देशकार में सभी स्वर समान हैं, किंतु वादी व संवादी स्वर अलग होने के कारण इन रागों में आसानी से अंतर बताया जा सकता है। हर राग में एक विशेष Read More : स्वरों का महत्त्व क्या है? about स्वरों का महत्त्व क्या है?

माइक्रोफोन के प्रकार :

माइक्रोफोन के प्रकार :

माइक्रोफोन के भी अनेक प्रकार होते है, लेकिन इनके काम करने के तरीके और इनकी आवाज़ की गुणवत्ता को ध्यान में रख कर इन्हें तीन भागो में बांटा गया है. जो निम्नलिखित है.

1. Shotgun माइक्रोफोन : ये एक बूम पोल ( Boom Pole ) और बूम स्टैंड ( Boom Stand ) का बना होता है. इन माइक्रोफोन का इस्तेमाल बिलकुल सही ऑडियो को निकलने के लिए किया जाता है, इनमे आसपास हो रही हलचल या फिर शोर नही आता बल्कि ये सिर्फ आपके द्वारा इसमें बोली गई आवाज़ को ही एनालॉग डाटा के रूप में लेता है. Read More : माइक्रोफोन के प्रकार : about माइक्रोफोन के प्रकार :

राग मुलतानी

राग मुलतानी

राग मुलतानी
थाठ: तोड़ी वादी: प संवादी: सा जाति: औडव-संपूर्ण आरोह में रे और ध वर्जित स्वर हैं गायन समय: दिन का चौथा प्रहर स्वर:- कोमल रे, कोमल ग, तीव्र म का प्रयोग, बाकी सब स्वर शुद्ध

नीचे आप जहाँ भी ~ चिन्ह देखें, ये मीड़ दर्शाने के लिये है।
और () खटका दिखाने के लिये। अर्थात अगर (सा) दिखाया गया है तो इसे 'रे सा ऩि सा' गाया जायेगा।
राग परिचय:

आरोह: ऩि सा म॑‍~ग॒ म॑~प, नि सां।

अवरोह: सां नि ध॒ प, म॑ ग॒ म॑ ग॒, रे॒ सा।

पकड़: ऩि सा म॑~ग॒ ऽ म॑ प, म॑ ग॒ म॑ ऽ ग॒ रे॒ सा। Read More : राग मुलतानी about राग मुलतानी

बैजू बावरा

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बैजू बावरा भारत के ध्रुपदगायक थे। उनको बैजनाथ प्रसाद और बैजनाथ मिश्र के नाम से भी जाना जाता है। वे ग्वालियर के राजा मानसिंह के दरबार के गायक थे और अकबर के दरबार के महान गायक तानसेन के समकालीन थे। उनके जीवन के बारे में बहुत सी किंवदन्तियाँ हैं जिनकी ऐतिहासिक रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती है। Read More : बैजू बावरा about बैजू बावरा

राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय-

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राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय-

थाट-कल्याण

गायन समय-रात्रि का द्वितीय प्रहर

जाति-ओडव-सम्पूर्ण (आरोह मे रे,ध स्वर वर्जित हैं)

विद्वानों को इस राग के वादी तथा संवादी स्वरों मे मतभेद है-

कुछ विद्वान मारू बिहाग मे वादी स्वर-गंधार व संवादी निषाद को मानते है इसके विपरीत अन्य संगीतज्ञ इसमे वादी स्वर पंचम व संवादी स्वर षडज को उचित ठहराते हैं ।

प्रस्तुत राग मे दोनो प्रकार के मध्यम स्वरों ( शुद्ध म व तीव्र म ) का प्रयोग होता है । शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयुक्त होते हैं । Read More : राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- about राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय-

माइक्रोफोन का कार्य

माइक्रोफोन एक ऐसा डिवाइस है जो आपकी आवाज़ को डिजिटल डाटा में बदलता है. इसको माइक भी कहा जाता है. ये कंप्यूटर में एक इनपुट डिवाइस की तरह इस्तेमाल होता है. इसकी मदद से आप अपने कंप्यूटर में ऑडियो डाटा को डाल सकते हो, साथ ही आप इसकी मदद से अपने कंप्यूटर में टाइप कर सकते हो क्योकि इसमें एक ऐसा यंत्र लगा रहता है जो आपकी आवाज़ को पहचानता है और उसी के आधार पर टाइप करता है. इसके लिए बस अपने माइक्रोफोन को अपने कंप्यूटर के साथ जोड़ना होता है और फिर माइक में जो आप टाइप करना चाहते हो उसे बोलना होता है. इस तरह से टाइप करने से आपका समय बचता है. Read More : माइक्रोफोन का कार्य about माइक्रोफोन का कार्य

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