राग परिचय

माइक्रोफोन की हानि :

माइक्रोफोन

माइक्रोफोन की हानि :

- माइक्रोफोन की आवाज की गुणवत्ता उतनी अच्छी नही होती.

- जब भी हम माइक्रोफोन में कुछ बोलते है तो उसके आसपास की हलचल भी माइक्रोफोन की आवाज की गुणवत्ता को कम करती है.

- बिना तार पर काम करने वाले माइक्रोफोन में बैटरी का इस्तेमाल होता है जो सिर्फ एक निर्धारित समय तक ही काम करती है.

- इनकी कीमत इनकी गुणवत्ता पर आधारित होती है. अगर आप अच्छी कीमत का माइक्रोफोन खरीदते हो तभी आपको आवाज़ की अच्छी गुणवत्ता मिलती है.

  Read More : माइक्रोफोन की हानि : about माइक्रोफोन की हानि :

स्वरों का महत्त्व क्या है?

स्वरों का महत्त्व क्या है?

किसी भी राग में दो स्वरों को विशेष महत्त्व दिया जाता है। इन्हें 'वादी स्वर' व 'संवादी स्वर' कहते हैं। वादी स्वर को "राग का राजा" भी कहा जाता है, क्योंकि राग में इस स्वर का बहुतायत से प्रयोग होता है। दूसरा महत्त्वपूर्ण स्वर है संवादी स्वर, जिसका प्रयोग वादी स्वर से कम मगर अन्य स्वरों से अधिक किया जाता है। इस तरह किन्हीं दो रागों में जिनमें एक समान स्वरों का प्रयोग होता हो, वादी और संवादी स्वरों के अलग होने से राग का स्वरूप बदल जाता है। उदाहरणत: राग भूपाली व देशकार में सभी स्वर समान हैं, किंतु वादी व संवादी स्वर अलग होने के कारण इन रागों में आसानी से अंतर बताया जा सकता है। हर राग में एक विशेष Read More : स्वरों का महत्त्व क्या है? about स्वरों का महत्त्व क्या है?

माइक्रोफोन के प्रकार :

माइक्रोफोन के प्रकार :

माइक्रोफोन के भी अनेक प्रकार होते है, लेकिन इनके काम करने के तरीके और इनकी आवाज़ की गुणवत्ता को ध्यान में रख कर इन्हें तीन भागो में बांटा गया है. जो निम्नलिखित है.

1. Shotgun माइक्रोफोन : ये एक बूम पोल ( Boom Pole ) और बूम स्टैंड ( Boom Stand ) का बना होता है. इन माइक्रोफोन का इस्तेमाल बिलकुल सही ऑडियो को निकलने के लिए किया जाता है, इनमे आसपास हो रही हलचल या फिर शोर नही आता बल्कि ये सिर्फ आपके द्वारा इसमें बोली गई आवाज़ को ही एनालॉग डाटा के रूप में लेता है. Read More : माइक्रोफोन के प्रकार : about माइक्रोफोन के प्रकार :

राग मुलतानी

राग मुलतानी

राग मुलतानी
थाठ: तोड़ी वादी: प संवादी: सा जाति: औडव-संपूर्ण आरोह में रे और ध वर्जित स्वर हैं गायन समय: दिन का चौथा प्रहर स्वर:- कोमल रे, कोमल ग, तीव्र म का प्रयोग, बाकी सब स्वर शुद्ध

नीचे आप जहाँ भी ~ चिन्ह देखें, ये मीड़ दर्शाने के लिये है।
और () खटका दिखाने के लिये। अर्थात अगर (सा) दिखाया गया है तो इसे 'रे सा ऩि सा' गाया जायेगा।
राग परिचय:

आरोह: ऩि सा म॑‍~ग॒ म॑~प, नि सां।

अवरोह: सां नि ध॒ प, म॑ ग॒ म॑ ग॒, रे॒ सा।

पकड़: ऩि सा म॑~ग॒ ऽ म॑ प, म॑ ग॒ म॑ ऽ ग॒ रे॒ सा। Read More : राग मुलतानी about राग मुलतानी

बैजू बावरा

बैजू बावरा का जीवन परिचय, बैजू बावरा गीत, बैजू बावरा 1952, बैजू बावरा की समाधि, बैजू बावरा का मकबरा, बैजू बावरा मन तड़पत हरि दर्शन को आज (राग मालकौंस), बैजू बावरा (1952 फ़िल्म), बैजू बावरा तू गंगा की मौज

बैजू बावरा भारत के ध्रुपदगायक थे। उनको बैजनाथ प्रसाद और बैजनाथ मिश्र के नाम से भी जाना जाता है। वे ग्वालियर के राजा मानसिंह के दरबार के गायक थे और अकबर के दरबार के महान गायक तानसेन के समकालीन थे। उनके जीवन के बारे में बहुत सी किंवदन्तियाँ हैं जिनकी ऐतिहासिक रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती है। Read More : बैजू बावरा about बैजू बावरा

राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय-

राग बिहाग, राग परिचय, राग मालकौंस, रागों के नाम, राग केदार, रागों का समय चक्र, राग सूची, संगीत राग लिस्ट

राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय-

थाट-कल्याण

गायन समय-रात्रि का द्वितीय प्रहर

जाति-ओडव-सम्पूर्ण (आरोह मे रे,ध स्वर वर्जित हैं)

विद्वानों को इस राग के वादी तथा संवादी स्वरों मे मतभेद है-

कुछ विद्वान मारू बिहाग मे वादी स्वर-गंधार व संवादी निषाद को मानते है इसके विपरीत अन्य संगीतज्ञ इसमे वादी स्वर पंचम व संवादी स्वर षडज को उचित ठहराते हैं ।

प्रस्तुत राग मे दोनो प्रकार के मध्यम स्वरों ( शुद्ध म व तीव्र म ) का प्रयोग होता है । शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयुक्त होते हैं । Read More : राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- about राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय-

माइक्रोफोन का कार्य

माइक्रोफोन एक ऐसा डिवाइस है जो आपकी आवाज़ को डिजिटल डाटा में बदलता है. इसको माइक भी कहा जाता है. ये कंप्यूटर में एक इनपुट डिवाइस की तरह इस्तेमाल होता है. इसकी मदद से आप अपने कंप्यूटर में ऑडियो डाटा को डाल सकते हो, साथ ही आप इसकी मदद से अपने कंप्यूटर में टाइप कर सकते हो क्योकि इसमें एक ऐसा यंत्र लगा रहता है जो आपकी आवाज़ को पहचानता है और उसी के आधार पर टाइप करता है. इसके लिए बस अपने माइक्रोफोन को अपने कंप्यूटर के साथ जोड़ना होता है और फिर माइक में जो आप टाइप करना चाहते हो उसे बोलना होता है. इस तरह से टाइप करने से आपका समय बचता है. Read More : माइक्रोफोन का कार्य about माइक्रोफोन का कार्य

ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री,

ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, संगीतज्ञ एवं हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार थे। उनका सम्बन्ध ग्वालियर घराने से था। Read More : ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, about ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री,

क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर

मंच संचालन का तरीका, एंकरिंग टिप्स, एंकरिंग कैसे करे, पत्रकार बनने के लिए योग्यता

जब भी हम टीवी एंकर्स के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में जो नाम सबसे पहले आते हैं, उनमें शामिल हैं अमिताभ बच्चन, अर्चना पूरन सिंह, रक्षंदा खान, मंदिरा बेदी, शेखर सुमन, जावेद जाफरी, साजिद खान, सिमी ग्रेवाल, अमन वर्मा, मिनी माथुर, रागेश्वरी, रुबी भाटिया, तबस्सुम और इला अरुण. टीवी के इन तमाम एंकर्स की फेहरिस्त को गौर से देखें, तो एक बात सामने आती हैं कि टीवी एंकरिंग भी एक करियर के लिए एक अच्छा विकल्प है. मनोरंजन से भरपूर वर्तमान दौर में टेलीविजन रोजगार का बेहतर माध्यम बन गया है. Read More : क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर about क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर

टांसिल होने पर

टांसिल होने पर

अनन्नास का जूस गर्म करके पियें। टांसिल के रोगी को अनन्नास के टुकड़े पर नींबू का रस निचोड़ कर खिलाना चाहिए, टॉसिल का रोग नष्ट हो जायेगा और पानी से कुल्ला करें, लाभ होगा। थोड़ी वेदना होगी, डरें नहीं। जिन लोगों को छाले होते रहते हैं वे खाने के बाद थोड़ी सौंफ लिया करें। छालें नहीं होंगे। देशी घी में कपूर मिलाकर नित्य चार बार लगायें और लार गिराऐं। फिर कुल्ला कर लें। पान में चना के बराबर कपूर का टुकडा रखकर चबाएं और पीक थूकते जाएं। ध्यान रहे पीक पेट में न जाए। मसूड़े फूलना, दर्द होना, टीस उठना आदि होने पर भुना हुआ जीरा और सेंधा नमक समान भाग पीसकर, छानकर मसूडे पर रगड़ें और लार टपका Read More : टांसिल होने पर about टांसिल होने पर

Pages