राग परिचय

ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है

ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है

ठुमरी भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक गायन शैली है। इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है। अर्थात जिसमें राग की शुद्धता की तुलना में भाव सौंदर्य को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।[1] यह विविध भावों को प्रकट करने वाली शैली है जिसमें श्रृंगार रस की प्रधानता होती है साथ ही यह रागों के मिश्रण की शैली भी है जिसमें एक राग से दूसरे राग में गमन की भी छूट होती है और रंजकता तथा भावाभिव्यक्ति इसका मूल मंतव्य होता है। इसी वज़ह से इसे अर्ध-शास्त्रीय गायन के अंतर्गत रखा जाता है। Read More : ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है about ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है

राग बागेश्री | पंडित जसराज जी

Feel both the serenity and the energy of dawn with this rendering of Raga Bageshri by the legendary Pandit Jasraj from the Raga by Sunrise collection. Blessed with a soulful and sonorous voice, which traverses masterfully over all four and a half octaves, Jasraj’s vocalizing is characterized by a harmonious blend of the classic and opulent elements projecting traditional music as an intense spiritual expression, at once chaste and yet densely coloured. This gives his music a unique and sublime emotional quality, reaching out to the very soul of the listener. Read More : राग बागेश्री | पंडित जसराज जी about राग बागेश्री | पंडित जसराज जी

गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी)

वातावरण पर प्रभाव डालने के लिये राग मे गायन, वादन के अविभाज्य 8 अंगों का प्रयोग होना चाहिये। ये 8 अंग या अष्टांग इस प्रकार हैं - स्वर, गीत, ताल और लय, आलाप, तान, मींड, गमक एवं बोलआलाप और बोलतान। उपर्युक्त 8 अंगों के समुचित प्रयोग के द्वारा ही राग को सजाया जाता है।

1. स्वर - Read More : गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी) about गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी)

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