राग परिचय

फकीर हरिदास और तानसेन के संगीत में क्या अंतर है?

फकीर हरिदास और तानसेन के संगीत में क्या अंतर है?

अकबर ने एक दिन तानसेन को कहा, तुम्‍हारे संगीत को सुनता हूं, तो मन में ऐसा ख्‍याल उठता है कि तुम जैसा गाने वाला शायद ही इस पृथ्‍वी पर कभी हुआ हो और न हो सकेगा। 
क्‍योंकि इससे ऊंचाई और क्‍या हो सकेगी। इसकी धारणा भी नहीं बनती। तुम शिखर हो। लेकिन कल रात जब तुम्‍हें विदा किया था, और सोने लगा तब अचानक ख्‍याल आया। हो सकता है, तुमने भी किसी से सीखा है, तुम्‍हारा भी कोई गुरू होगा। तो मैं आज तुमसे पूछता हूं। कि तुम्‍हारा कोई गुरू है? तुमने किसी से सीखा है? Read More : फकीर हरिदास और तानसेन के संगीत में क्या अंतर है? about फकीर हरिदास और तानसेन के संगीत में क्या अंतर है?

संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव

संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव

रेडियो तरंगों की तरह संगीत की भी शक्तिशाली तरंगें होती हैं। वे अपने प्रभाव क्षेत्र को प्रभावित करती हैं। उनसे वातावरण अनुप्राणित होता है। पदार्थों में हलचल मचती है और प्राणियों की मनोदशा पर उसका अनोखा प्रभाव पड़ता है। प्राणियों में मनुष्य की बौद्धिक एवं संवेदनात्मक क्षमता अन्य प्राणियों से विशिष्ट है। इसलिए संगीत का उस पर असाधारण प्रभाव पड़ता है। यों भाव संवेदना प्राणि मात्र पर पड़ती है। वे अपने सामान्य क्रिया कलाप रोक कर वादन ध्वनि के साथ लहराने लगते हैं। उनमें शब्द ज्ञान तो होता नहीं इसलिए गायनों का अर्थ समझने में असमर्थ रहने पर भी वे गीतों के साथ जुड़े हुए भाव संचार को ग्रहण करते और उससे Read More : संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव about संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव

नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

स्वर यंत्र, गले के अंदर सूजन, श्वसनीशोथ के उपचार, कंठ रोग, गले के रोग का इलाज

नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

कारण :-

अधिक सर्दी लगना, पानी में अधिक भींगना, अधिक देर तक गाना गाना, गले में धूल का कण जमना, धुंआ मुंह में जाना, अधिक जोर से बोलना तथा अचानक मौसम परिवर्तन के कारण यह रोग होता है।

लक्षण :-

इस रोग में स्वरयंत्र की श्लैष्मिक झिल्ली फूल जाती है और उससे लसदार श्लेष्मा निकलने लगता है। गला कुटकुटाना और जलन होना, कड़ा श्लेष्मा निकलना, कुत्ते की तरह आवाज होना, सूखी खांसी आना, आवाज खराब होना या गला बैठ जाना, बुखार होना, प्यास अधिक लगना, भूख न लगना, सांस लेने में कष्ट होना आदि इस रोग के मुख्य लक्षण है। Read More : नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला) about नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है

तानपुरे अथवा सितार

तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है और ध्वनि उत्पन्न होती है। संगीत में नियमित और स्थित कम्पन (आंदोलन) द्वारा उत्पन्न ध्वनि का उपयोग होता है, जिसे हम नाद कहते हैं। जब किसी ध्वनि की कम्पन कुछ समय तक चलती है तो उसे स्थिर आंदोलन और जब उसी ध्वनि का कंपन समान गति वाली होती है तो उसे नियमित आंदोलन कहते हैं। शोरगुल, कोलाहल आदि ध्वनियों में अनियमित और अस्थिर आंदोलन होने के कारण संगीत में इनका प्रयोग नहीं होता। सांगीतोपयोगी ध्वनि को नाद कहते हैं। नाद की मुख्य तीन विशेषताएँ हैं- Read More : तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है about तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है

ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं

ध्वनि विशेष को नाद

ध्वनि, झरनों की झरझर, पक्षियों का कूजन किसने नहीं सुना है। प्रकृति प्रदत्त जो नाद लहरी उत्पन्न होती है, वह अनहद नाद का स्वरूप है जो कि प्रकृति की स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन जो नाद स्वर लहरी, दो वस्तुओं के परस्पर घर्षण से अथवा टकराने से पैदा होती है उसे लौकिक नाद कहते हैं।
वातावरण पर अपने नाद को बिखेरने के लिये, बाह्य हवा पर कंठ के अँदर से उत्पन्न होने वाली वजनदार हवा जब परस्पर टकराती है, उसी समय कंठ स्थित 'स्वर तंतु' (Vocal Cords) नाद पैदा करते हैं। अत: मानव प्राणी द्वारा निर्मित आवाज लौकिक है।

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संगीत सुनने से दिमाग पर होता है ऐसा असर

संगीत सुनने से दिमाग पर होता है ऐसा असर

आधुनिक जीवनशैली में मानसिक दबाव से दिमाग पर काफी बुरा असर पड़ रहा है. इसके परिणामस्वरूप हम खुद में एकाकी महसूस कर मानसिक रोगों के गिरफ्त में आते जा रहे हैं. दिमाग को चुस्त रखने के लिए निश्चित समय पर विश्राम के साथ मनोरंजन भी मानसिक स्वस्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है. बढ़ती उम् का दबाव हो या किशोरावस्था का प्रतिबल, प्रत्येक प्रकार की चिंता को कम करके संगीत मस्तिष्क में कंपन कर शांति प्रदान करता है. Read More : संगीत सुनने से दिमाग पर होता है ऐसा असर about संगीत सुनने से दिमाग पर होता है ऐसा असर

क्या प्रभाव पड़ता है संगीत का किशोरों पर?

क्या प्रभाव पड़ता है संगीत का किशोरों पर?

संगीत सुनना किसे अच्छा नहीं लगता है। आजकल हर कोई अपने फोन से गाने सुनता रहता है। संगीत सुनने से हमारा मन और दिमाग शांत और खुशहाल हो जाता है। संगीत के अनेक फायदे हैं, जैसे: खेल-कूद के समय संगीत जोश और उत्साह बढ़ाता है। मंदिर में संगीत भक्ति और श्रद्धा बढ़ाता है। औफिस और घर में संगीत बोरियत दूर करता है। मार्केट और होटल में ग्राहकों को आकर्षित करता है। यही संगीत स्वास्थ्य के विभाग में एक उपचार या थेरेपी का भी काम करता है।

 

नवयुवक और किशोर बच्चे हर तरह का संगीत सुनते हैं। लेकिन कुछ संगीत और गाने ऐसे भी होते है जो युवा बच्चों के लिए उचित नहीं होते हैं। Read More : क्या प्रभाव पड़ता है संगीत का किशोरों पर? about क्या प्रभाव पड़ता है संगीत का किशोरों पर?

संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

किस तरह का संगीत एक किशोर चुनता है उससे उसके व्यक्तित्व का पता चलता है। शोध कार्य से पता चला है की कई तरह के संगीत का किशोर के दिमाग पर असर पड़ता है जैसे: Read More : संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है? about संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया

कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया

कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया - (३)
ठहर ठहर, ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे
मन भरमाये नयना बाँधे ये डगरिया - (२)
कहीं गए जो ठहर, दिन जायेगा गुज़र
गाडी हाँकन दे, हाँकन दे, कौन दिसा...

पहली बार हम निकले हैं घर से, किसी अंजाने के संग हो
अंजाना से पहचान बढ़ेगी तो महक उठेगा तोरा अंग हो
महक से तू कहीं बहक न जाना - (२)
न करना मोहे तंग हो, तंग करने का तोसे नाता है गुज़रिया - (२)
हे, ठहर ठहर, ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे, कौन दिसा... Read More : कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया about कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया

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