राग परिचय

रियाज़ कैसे करें 10 तरीके

सुरसाधना, खरज का रियाज, सरगम सीखना, गायकी टिप्स, गायन सीखना, हारमोनियम बजाना कैसे सीखे

रियाज़ करने की शुरुआत के लिए आप इस प्रकार से कोशिश करें -
1) संगीत सीखने का सबसे पहला पाठ और रियाज़ ओंकार . 3 महीनो तक आप रोज़ सुबह कम से कम 30 मिनट 'सा' के स्वर में ओंकार का लगातार अभ्यास करें.
2) अगर आप और समय दे सकते हैं तो ओंकार रियाज़ करने के बाद 5 मिनट आराम कर के, सरगम आरोह अवरोह का धीमी गति में 30 मिनट तक रियाज़ करें. जल्दबाजी नहीं करें.
3) सरगम का रियाज़ करते समय स्वर ठीक से लगाने का पूरा ध्यान रखें. अगर स्वर ठीक से नहीं लग रहा है तो बार बार कोशिश करें. संगीत अभ्यास में लगन की जरूरत होती है और शुरुआत में बहुत धीरज और इत्मीनान चाहिए.

वादी - संवादी

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राग एक माहौल या वातावरण विशेष का नाम है जो रंजक भी है। स्पष्ट रूप से इस वातावरण निर्मिती के केंद्र में वह स्वरावली है जो रागवाचक है इसे रागांग कहते हैं। इस रागांग का केंद्र बिंदु होता है वादी स्वर। इसे राग का जीव या प्राण स्वर भी कहा गया है। राग को राज्य की संज्ञा देकर वादी स्वर को उसका राजा कहा जाता है। स्पष्टतः वादी का प्रयोग अन्य स्वरों की अपेक्षा सर्वाधिक होता है तथा इस पर ठहराव भी अधिक होता है।

ख्याल गायकी के घरानेएक दृष्टि : भाग्यश्री सहस्रबुद्धे

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किसी भी ख्याल शैली की उत्पत्ति दो प्रकार से मानी गई है- एक तो किसी व्यक्ति या जाति के नाम से, जैसे सैनी घराना, कव्वाल घराना आदि और दूसरे किसी स्थान के नाम से|
ख्याल वर्तमान में प्रचलित सर्वाधिक लोकप्रिय शैली है| वस्तुत: एक गायक का चिंतन ख्याल में उभरकर सामने आता है| स्वर एक केंद्र बिंदु है, जिस पर साधक का ध्यान लगता है|

थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या

बिलावल ठाट, कल्याण ठाट, खमाज ठाट, आसावरी ठाट, काफ़ी ठाट, भैरवी ठाट, भैरव ठाट, मारवा ठाट, पूर्वी ठाट, तोड़ी ठाट

सप्तक के 12 स्वरों में से 7 क्रमानुसार मुख्य स्वरों के उस समुदाय को थाट कहते हैं, जिससे राग उत्पन्न होते है। स्वरसप्तक, मेल, थाट, अथवा ठाट एक ही अर्थवाचक हैं। प्राचीन संस्कृत ग्रन्थों में मेल शब्द ही प्रयोग किया गया है। अभिनव राग मंजरी में कहा गया है– मेल स्वर समूह: स्याद्राग व्यंजन शक्तिमान, अर्थात् स्वरों के उस समूह को मेल या ठाट कहते हैं, जिसमें राग उत्पन्न करने की शक्ति हो।

थाट के लक्षण

राग रागिनी पद्धति

राग रागिनी पद्धति

रागों के वर्गीकरण की यह परंपरागत पद्धति है। १९वीं सदी तक रागों का वर्गीकरण इसी पद्धति के अनुसार किया जाता था। हर एक राग का परिवार होता था। सब छः राग ही मानते थे, पर अनेक मतों के अनुसार उनके नामों में अन्तर होता था। इस पद्धति को मानने वालों के चार मत थे।

शिव मत
इसके अनुसार छः राग माने जाते थे। प्रत्येक की छः-छः रागिनियाँ तथा आठ पुत्र मानते थे। इस मत में मान्य छः राग-

1. राग भैरव, 2. राग श्री, 3. राग मेघ, 4. राग बसंत, 5. राग पंचम, 6. राग नट नारायण।

सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है

सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है

संगीत में वह शब्द जिसका कोई निश्चित रूप हो और जिसकी कोमलता या तीव्रता अथवा उतार-चढ़ाव आदि का, सुनते ही, सहज में अनुमान हो सके, स्वर कहलाता है। भारतीय संगीत में सात स्वर (notes of the scale) हैं, जिनके नाम हैं - षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत व निषाद।

यों तो स्वरों की कोई संख्या बतलाई ही नहीं जा सकती, परंतु फिर भी सुविधा के लिये सभी देशों और सभी कालों में सात स्वर नियत किए गए हैं। भारत में इन सातों स्वरों के नाम क्रम से षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद रखे गए हैं जिनके संक्षिप्त रूप सा, रे ग, म, प, ध और नि हैं।

सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

महागुजरात गाांधर्व सांगीत सममतत
गायन और र्ादन का अभ्यासक्रम
सांगीत उप वर्शारद
क्रक्रयात्मक - 300 अांक, लेखित – 100 अांक, कुल अांक – 400.
समय: - 1 साल (100 से 120 घांटे का प्रमशक्षण) परीक्षा समय: - 30 ममतनट.
क्रक्रयात्मक - 300 अांक : -
1) राग – 7, छायानट, गौड्मल्हार, बैरागी, बबभास(भैरव ठाट का), पूवी, मुलतानी, ससिंधुरा.
2) राग छायानट, गौड्मल्हार, मुलतानी, पूररयाधनाश्री, पूवी में से कोई भी 3 रागो में बड़ा ख्याल, छोटाख्याल की
गायकी अिंग से 20 समननट प्रस्तुनत की क्षमता.

सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

सिलेबस : सांगीत विनीत  (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

महागुजरात गाांधर्व सांगीत सममतत
गायन और र्ादन का अभ्यासक्रम
सांगीत वर्नीत (मध्यमा पूर्व)
क्रक्रयात्मक - 300 अांक, लेखित – 100 अांक, कुल अांक– 400.
समय: - 1 साल (100 से 120 घांटे का प्रमिक्षर्) परीक्षा समय: - 20 ममतनट.
क्रक्रयात्मक - 300 अांक : -
1) राग – 8, जयजयवंती, दरबारीकानडा, अड़ाना, काल ंगड़ा, पूररयाधनाश्री, सोहिनी, शंकरा, कामोद.
2) राग बागेश्री, बबिाग, दरबारीकानडा, भैरव (कोई भी 3) – इन रागो में बड़ा ख्या , छोटाख्या .

सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

महागुजरात गाांधर्व सांगीत सममतत
गायन और र्ादन का अभ्यासक्रम
सांगीत मध्यमा
क्रक्रयात्मक - 225 अांक, लेखित शास्त्र – 75 अांक, कुल अांक – 300.
समय: - 1 साल (80 से 100 घांटे का प्रमशक्षण) परीक्षा समय: - 20 ममतनट.
क्रक्रयात्मक - 225 अांक : -
1) राग – 7, अल्हैया बिलावल, हमीर, पटदीप, तिलंग, भैरव, पीलु, िहार.
2) ऊपर ददये हुए रागों में से कोई भी 2 राग में मुक्त आलाप और मध्यलय के स्थायी – अंिरा में िालिद्ध आलाप – िान (िीनिाल में) करने की क्षमिा और 5 से 7 ममतनट स्विंत्र प्रस्िुति की क्षमिा.

सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

महागुजरात गाांधर्व सांगीत सममतत
गायन और वादन का अभ्यासक्रम
सांगीत अलांकार (1).

क्रक्रयात्मक – कुल 600 अांक (क्रक्रयात्मक परीक्षा – 500 अांक + सभागायन 100 अांक), लेखित – 100 अांक, कुल अांक – 700.
समय: - सांगीत वर्शारद के बाद 1 साल (कम से कम 200 घांटे का प्रमशक्षण).
परीक्षा समय: - ज्यादा से ज्यादा 120 ममतनट (2 घांटे) और सभागायन का समय अलग.

क्रक्रयात्मक - 600 अांक : -
1) अभ्यासक्रम के बड़े ख्याल के राग: - कुल 10 राग करने है.

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