राग परिचय

सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

महागुजरात गाांधर्व सांगीत सममतत
गायन और वादन का अभ्यासक्रम
सांगीत अलांकार (1).

क्रक्रयात्मक – कुल 600 अांक (क्रक्रयात्मक परीक्षा – 500 अांक + सभागायन 100 अांक), लेखित – 100 अांक, कुल अांक – 700.
समय: - सांगीत वर्शारद के बाद 1 साल (कम से कम 200 घांटे का प्रमशक्षण).
परीक्षा समय: - ज्यादा से ज्यादा 120 ममतनट (2 घांटे) और सभागायन का समय अलग.

क्रक्रयात्मक - 600 अांक : -
1) अभ्यासक्रम के बड़े ख्याल के राग: - कुल 10 राग करने है.

स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ?

स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ?

स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई है। ‘स्वन’ शब्द के लिए अंग्रेजी में ‘Phone’ शब्द है। ध्वनि का लघुत्तम अनुभवगम्य विच्छिन्न खण्ड स्वन विज्ञान में ‘स्वन’ कहलाता है। ‘ध्वनि’ शब्द संस्कृत ‘ध्वन्’ (आवाज करना, शब्द करना) धातु के साथ इण (इ) प्रत्यय संम्पृक्त करने से बनता है। इसका अर्थ होता है-‘आवाज’ या ‘आवाज करना’। व्यक्ति जब बोलता है, तो उसके मुख-विवर से वायु निकलती है जो वागेन्द्रिय के माध्यम से कुछ वाणी (आवाज) प्रकट करती है, उसी को ‘ध्वनि’ कहा जाता है। संस्कृत में उसके लिए ध्वन और ध्वनन तथा स्वन और स्वनन शब्दों का प्रयोग किया गया है। किंतु सभी का आशय एक ही है। डॉ.

सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान

ताल क्या है, ताल के प्रकार, ताल की परिभाषा, ताल परिचय, सुर का अर्थ, सुर meaning, सुर और ताल, सुर संगीत

सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान
वाशिंगटन, एजेंसीअ+अ-

बच्चों को यदि सुर-ताल के साथ गणित की शिक्षा दी जाए तो वे इसकी समस्याओं को अपेक्षाकृत अधिक आसानी से समझ पाते हैं।

इसका खुलासा अमेरिका में हुए एक अध्ययन से हुआ है। इसके अनुसार, संगीत के विभिन्न माध्यमों, जैसे-ताली बजाकर, ड्रम बजाकर तथा गाना गा कर बच्चों को गणित के सवालों के बारे में आसानी से समझाया जा सकता है।

गायक कलाकारों और बच्चों के लिए विशेष

गायक कलाकारों और बच्चों के लिए विशेष

खाँसी रोग कई कारणों से पैदा होता है और यदि जल्दी दूर न किया जाए तो विकट रूप धारण कर लेता है। एक कहावत है, रोग का घर खाँसी। खाँसी यूँ तो एक मामूली-सी व्याधि मालूम पड़ती है, पर यदि चिकित्सा करने पर भी जल्दी ठीक न हो तो इसे मामूली नहीं समझना चाहिए, क्योंकि ऐसी खाँसी किसी अन्य व्याधि की सूचक होती है। आयुर्वेद ने खाँसी के 5 भेद बताए हैं अर्थात वातज, पित्तज, कफज ये तीन और क्षतज व क्षयज से मिलाकर 5 प्रकार के रोग मनुष्यों को होते हैं।

राग ललित!

राग मधुवंती, राग परिचय भाग, कौन सा राग कब गाया जाता है, रागों के नाम, सप्तक किसे कहते है, राग के प्रकार, राग सूची,

अपने मित्रों को मैं यह कोई नई बात नहीं बता रहा कि मुझे भारतीय शास्त्रीय संगीत से लगाव है। संगीत की जानकारी में मैं बिल्कुल शून्य हूँ लेकिन हाँ उसे मन से महसूस करके उसका आनंद लेना मुझे आता है। बचपन से ही हिन्दी फ़िल्मों के शास्त्रीय संगीत पर आधारित गीतों ने अधिकांश लोगों की तरह मेरे मन को भी मगन किया है। आज शीला और मुन्नी के दौर में इन्हीं शास्त्रीय गीतों के आधार पर बॉलीवुड में संगीत का नाम जीवित है।

भारत में संगीत शिक्षण

भारत में संगीत शिक्षण

१८ वीं शताब्दी में घराने एक प्रकार से औपचारिक संगीत-शिक्षा के केन्द्र थे परन्तु ब्रिटिश शासनकाल का आविर्भाव होने पर घरानों की रूपरेखा कुछ शिथिल होने लगी क्योंकि पाश्चात्य संस्कृति के व्यवस्थापक कला की अपेक्षा वैज्ञानिक प्रगति को अधिक मान्यता देते थे और आध्यात्म की अपेक्षा इस संस्कृति में भौतिकवाद प्रबल था।

जानिए भारतीय संगीत के बारे में

जानिए भारतीय संगीत के बारे में

भारतीय संगीत : संगीत और वाद्ययंत्रों का अविष्कार भारत में ही हुआ है। संगीत का सबसे प्राचीन ग्रंथ सामवेद है। हिन्दू धर्म का नृत्य, कला, योग और संगीत से गहरा नाता रहा है। हिन्दू धर्म मानता है कि ध्वनि और शुद्ध प्रकाश से ही ब्रह्मांड की रचना हुई है। आत्मा इस जगत का कारण है। चारों वेद, स्मृति, पुराण और गीता आदि धार्मिक ग्रंथों में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को साधने के हजारोहजार उपाय बताए गए हैं। उन उपायों में से एक है संगीत। संगीत की कोई भाषा नहीं होती। संगीत आत्मा के सबसे ज्यादा नजदीक होता है। शब्दों में बंधा संगीत विकृत संगीत माना जाता है।

जानिए भारतीय संगीत के बारे में

चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख

चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख

गीत स्वयं की अनुभूति है, स्वयं को जानने की शक्ति है एवं एक सौन्दर्यपूर्ण ध्वनि कल्पना है जिसका सृजन करने केलिए एक ऐसे अनुशासन की सीमा को ज्ञात करना है, जिसकी सीमा में रहते हुए भी असीम कल्पना करने का अवकाश है। मनुष्य अनुशासन की परिधि में रहकर संगीत को प्रकट करता है, किन्तु प्रत्येक व्यक्ति के विचार, संवेदना, बुद्धिमता एवं कल्पना में विविधता होने के कारण प्रस्तुति में भी विविधता अवश्य होती है। इसी प्रकार देश एवं काल क्रमानुसार संगीत के मूल तत्व समाज में उनके प्रयोग और प्रस्तुतिकरण की शैलियों में परिवर्तन होना स्वाभाविक है। संगीत कला में भी प्रत्येक गुण की राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक अवस्थाओं

संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा

संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा

संगीत के मोहन-सुर संगीत की मादकता जीव जगत पर जो प्रभाव पड़ता है, वह किसी से छिपा नहीं है। संगीत की स्वरलहरी पर मुग्ध होकर हिरन का व्याध के बाण से विद्ध होना, महाविषधर भुजंग का सपेरे के वशवर्ती होना हम बहुत दिनों से सुनते आ रहे हैं। किन्तु वर्तमान युग में संगीत के प्रभाव से मनुष्य की व्याधियों का उपचार करने का प्रयोग भी होने लगा है। एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जबकि विज्ञान चिकित्सा अपने रोगियों के लिए मिक्सचर, पिल या पाउडर की व्यवस्था न करके दिन-रात में उसके लिए दो-तीन बार संगीत श्रवण का व्यवस्था पत्र देंगे।

Pages