राग परिचय

गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका

गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका

साँस एक बड़ी अनोखी प्रक्रिया है. साँस शरीर को भी प्रभावित करती है और मन को भी. साँस के सही नियंत्रण से शरीर भी स्वस्थ होता है और मन भी. संगीत के रियाज़ में चूंकि शरीर और मन दोनों बड़ी भूमिका निभाते हैं इसलिए साँस का अभ्यास संगीत (गायन) में बड़ा महत्व रखता है और इसलिए इस पेज में हम साँस के बारें में जानेंगे
1. रियाज़ करते समय मुह से साँस लेना स्वाभाविक और आसान लग सकता है लेकिन, साँस सिर्फ नाक से ही लेना है.
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भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज

भारतीय संगीत

भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज

भारत में संगीत, मधुर ध्वनि के माध्यम से एक योग प्रणाली की तरह है, जो मानव जीव पर कार्य करती है तथा आत्मज्ञान की हद के लिए उनके उचित कार्यों को जागृत तथा विकसित करती हैं, जोकि हिंदू दर्शन और धर्म का अंतिम लक्ष्य है। मधुर लय भारतीय संगीत का प्रधान तत्व है। 'राग' का आधार मधुर लय है। विभिन्न 'राग' केन्द्रीय तंत्रिका प्रणाली से संबंधित अनेक रोगों के इलाज में प्रभावी पाए गए हैं। Read More : भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज about भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज

राग भूपाली

राग भूपाली

राग भूपाली
राग परिचय--

: यह राग भूप के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह पूर्वांग प्रधान राग है। इसका विस्तार तथा चलन अधिकतर मध्य सप्तक के पूर्वांग व मन्द्र सप्तक में किया जाता है। यह चंद्र प्रकाश के समान शांत स्निग्ध वातावरण पैदा करने वाला मधुर राग है। जिसका प्रभाव वातावरण में बहुत ही जल्दी घुल जाता है। रात्रि के रागों में राग भूपाली सौम्य है। शांत रस प्रधान होने के कारण इसके गायन से वातावरण गंभीर व उदात्त बन जाता है। राग भूपाली कल्याण थाट का राग है। Read More : राग भूपाली about राग भूपाली

रचन: श्री वल्लभाचार्य

शुद्धाद्वैतवाद का अर्थ, पुष्टिमार्ग की स्थापना, पुष्टिमार्गीय वैष्णव, सुबोधिनी टीका pdf, पुष्टिमार्ग दर्शन, पुष्टिमार्ग का जहाज, विट्ठलनाथ, द्वैताद्वैतवाद

रचन: श्री वल्लभाचार्य

अधरं मधुरं वदनं मधुरं
नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ १ ॥

वचनं मधुरं चरितं मधुरं
वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ २ ॥

वेणु-र्मधुरो रेणु-र्मधुरः
पाणि-र्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ३ ॥

गीतं मधुरं पीतं मधुरं
भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ४ ॥ Read More : रचन: श्री वल्लभाचार्य about रचन: श्री वल्लभाचार्य

गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त

गुनगुनाइए गीत, याददाश्त, म्यूजिक थेरेपी

म्यूजिक थेरेपी 
गीत गुनगुनाने से सिर्फ आपका मूड ही फ्रेश नहीं होता, बल्कि इससे आपकी याददाश्त भी दुरुस्त होती है. फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है. तेपो सरकामो के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के मुताबिक, गीत-संगीत विशेषकर गायन, डिमेंशिया रोग के शुरुआती चरण में काफी फायदा होता है.
इस शोध के अनुसार, संगीत मानसिक रोगियों की देखभाल में ज्यादा लाभकारी होता है. इसे डिमेंशिया की विभिन्न चरणों में असरदार माना गया है.
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शुद्ध स्वर

विकृत स्वर, तीव्र स्वर, कोमल स्वर, स्वर के भेद, संगीत के स्वर, हिंदुस्तानी संगीत में शुद्ध और विकृत कुल मिलाकर कितने स्वर होते हैं, सप्तक के प्रकार, संगीत के सात सुर

सा, रे, ग, म, प, ध, नि शुद्ध स्वर कहे जाते हैं। इनमें सा और प तो अचल स्वर माने गए हैं, क्योंकि ये अपनी जगह पर क़ायम रहते हैं। बाकी पाँच स्वरों के दो-दो रूप कर दिए गए हैं, क्योंकि ये अपनी जगह पर से हटते हैं, इसलिए इन्हें कोमल व तीव्र नामों से पुकारते हैं। इन्हें विकृत स्वर भी कहा जाता है। Read More : शुद्ध स्वर about शुद्ध स्वर

'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है

'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है

'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है। रंज् का अर्थ है रंगना। जिस तरह एक चित्रकार तस्वीर में रंग भरकर उसे सुंदर बनाता है, उसी तरह संगीतज्ञ मन और शरीर को संगीत के सुरों से रंगता ही तो हैं। रंग में रंगजाना मुहावरे का अर्थ ही है कि सब कुछ भुलाकर मगन हो जाना यालीन हो जाना। संगीत का भी यही असर होता है। जो रचना मनुष्य के मन को आनंद के रंग से रंग दे वही राग कहलाती है। Read More : 'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है about 'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है

भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी

भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी

भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी
Saturday, May 27, 2006
सात स्वर, अलंकार और हारमोनियम

भारतीय संगीत आधारित है स्वरों और ताल के अनुशासित प्रयोग पर। सात स्वरों के समुह को सप्तक कहा जाता है। भारतीय संगीत सप्तक के सात स्वर हैं-

सा(षडज), रे(ऋषभ), ग(गंधार), म(मध्यम), प(पंचम), ध(धैवत), नि(निषाद)

अर्थात

सा, रे, ग, म, प ध, नि Read More : भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी about भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी

राग दरबारी कान्हड़ा

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राग दरबारी कान्हड़ा

प्राचीन संगीत ग्रन्थों मे राग दरबारी कान्हड़ा के लिये भिन्न नामों का उल्लेख मिलता है। कुछ ग्रन्थों मे इसका नाम कणार्ट, कुछ मे कणार्टकी तो अन्य ग्रन्थों मे कणार्ट गौड़ उपलब्ध है। वस्तुत: कन्हण शब्द कणार्ट शब्द का ही अपभ्रंश रूप है। कान्हड़ा के पूर्व दरबारी शब्द का प्रयोग मुगल शासन के समय से प्रचलित हुआ ऐसा माना जाता है। कान्हड़ा के कुल कुल 18 प्रकार माने जाते हैं- Read More : राग दरबारी कान्हड़ा about राग दरबारी कान्हड़ा

संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा

कोई संगीत इसलिए सुनता है कि उसे संगीत का शौक है, तो कोई अपनी दिन भर की थकान संगीत से मिटाता है। वजह कुछ भी हो लेकिन हर किसी के जीवन से कहीं न कहीं जुड़ा है।

अगर आप भी रोज संगीत सुनकर खुदको तरोताजा करते हैं तो जा‌न लें कि यह न सिर्फ आपके मूड को बेहतर बनाता है बल्कि सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को सुलझाने में मदद करता है। Read More : संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा about संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा

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