राग परिचय

गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त

गुनगुनाइए गीत, याददाश्त, म्यूजिक थेरेपी

म्यूजिक थेरेपी 
गीत गुनगुनाने से सिर्फ आपका मूड ही फ्रेश नहीं होता, बल्कि इससे आपकी याददाश्त भी दुरुस्त होती है. फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है. तेपो सरकामो के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के मुताबिक, गीत-संगीत विशेषकर गायन, डिमेंशिया रोग के शुरुआती चरण में काफी फायदा होता है.
इस शोध के अनुसार, संगीत मानसिक रोगियों की देखभाल में ज्यादा लाभकारी होता है. इसे डिमेंशिया की विभिन्न चरणों में असरदार माना गया है.
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शुद्ध स्वर

विकृत स्वर, तीव्र स्वर, कोमल स्वर, स्वर के भेद, संगीत के स्वर, हिंदुस्तानी संगीत में शुद्ध और विकृत कुल मिलाकर कितने स्वर होते हैं, सप्तक के प्रकार, संगीत के सात सुर

सा, रे, ग, म, प, ध, नि शुद्ध स्वर कहे जाते हैं। इनमें सा और प तो अचल स्वर माने गए हैं, क्योंकि ये अपनी जगह पर क़ायम रहते हैं। बाकी पाँच स्वरों के दो-दो रूप कर दिए गए हैं, क्योंकि ये अपनी जगह पर से हटते हैं, इसलिए इन्हें कोमल व तीव्र नामों से पुकारते हैं। इन्हें विकृत स्वर भी कहा जाता है। Read More : शुद्ध स्वर about शुद्ध स्वर

'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है

'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है

'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है। रंज् का अर्थ है रंगना। जिस तरह एक चित्रकार तस्वीर में रंग भरकर उसे सुंदर बनाता है, उसी तरह संगीतज्ञ मन और शरीर को संगीत के सुरों से रंगता ही तो हैं। रंग में रंगजाना मुहावरे का अर्थ ही है कि सब कुछ भुलाकर मगन हो जाना यालीन हो जाना। संगीत का भी यही असर होता है। जो रचना मनुष्य के मन को आनंद के रंग से रंग दे वही राग कहलाती है। Read More : 'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है about 'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है

भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी

भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी

भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी
Saturday, May 27, 2006
सात स्वर, अलंकार और हारमोनियम

भारतीय संगीत आधारित है स्वरों और ताल के अनुशासित प्रयोग पर। सात स्वरों के समुह को सप्तक कहा जाता है। भारतीय संगीत सप्तक के सात स्वर हैं-

सा(षडज), रे(ऋषभ), ग(गंधार), म(मध्यम), प(पंचम), ध(धैवत), नि(निषाद)

अर्थात

सा, रे, ग, म, प ध, नि Read More : भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी about भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी

राग दरबारी कान्हड़ा

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राग दरबारी कान्हड़ा

प्राचीन संगीत ग्रन्थों मे राग दरबारी कान्हड़ा के लिये भिन्न नामों का उल्लेख मिलता है। कुछ ग्रन्थों मे इसका नाम कणार्ट, कुछ मे कणार्टकी तो अन्य ग्रन्थों मे कणार्ट गौड़ उपलब्ध है। वस्तुत: कन्हण शब्द कणार्ट शब्द का ही अपभ्रंश रूप है। कान्हड़ा के पूर्व दरबारी शब्द का प्रयोग मुगल शासन के समय से प्रचलित हुआ ऐसा माना जाता है। कान्हड़ा के कुल कुल 18 प्रकार माने जाते हैं- Read More : राग दरबारी कान्हड़ा about राग दरबारी कान्हड़ा

संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा

कोई संगीत इसलिए सुनता है कि उसे संगीत का शौक है, तो कोई अपनी दिन भर की थकान संगीत से मिटाता है। वजह कुछ भी हो लेकिन हर किसी के जीवन से कहीं न कहीं जुड़ा है।

अगर आप भी रोज संगीत सुनकर खुदको तरोताजा करते हैं तो जा‌न लें कि यह न सिर्फ आपके मूड को बेहतर बनाता है बल्कि सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को सुलझाने में मदद करता है। Read More : संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा about संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा

भारतीय कलाएँ

भारतीय कलाएँ

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रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है।

रागों की उत्पत्ति

हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है । रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। थाटों की संख्या गणित की दृष्टि से ‘72’ मानी गयी है किन्तु आज मुख्यतः ‘10’ थाटों का ही क्रियात्मिक प्रयोग किया जाता है जिन के नांम हैं बिलावल, कल्याण, खमाज, भैरव, भैरवी, काफी, आसावरी, पूर्वी, मारवा और तोडी हैं। प्रत्येक राग विशिष्ट समय पर किसी ना किसी विशिष्ट भाव (मूड – थीम) का घोतक है। राग शब्द सँस्कृत के बीज शब्द ‘रंज’ से लिया गया है। अतः प्रत्येक राग में स्वरों और उन के चलन के नियम हैं जिन का पालन करना अनिवार्य है अन्यथ्वा आपेक्षित भाव का सर्जन नहीं हो सकता। हिन्दूस्तानी संगीत में प्रत्येक राग अपने निर्धारि Read More : रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। about रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है।

जानिए भारतीय संगीत के बारे में

जानिए भारतीय संगीत के बारे में

भारतीय संगीत : संगीत और वाद्ययंत्रों का अविष्कार भारत में ही हुआ है। संगीत का सबसे प्राचीन ग्रंथ सामवेद है। हिन्दू धर्म का नृत्य, कला, योग और संगीत से गहरा नाता रहा है। हिन्दू धर्म मानता है कि ध्वनि और शुद्ध प्रकाश से ही ब्रह्मांड की रचना हुई है। आत्मा इस जगत का कारण है। चारों वेद, स्मृति, पुराण और गीता आदि धार्मिक ग्रंथों में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को साधने के हजारोहजार उपाय बताए गए हैं। उन उपायों में से एक है संगीत। संगीत की कोई भाषा नहीं होती। संगीत आत्मा के सबसे ज्यादा नजदीक होता है। शब्दों में बंधा संगीत विकृत संगीत माना जाता है।

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