राग परिचय

सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान

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सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान
वाशिंगटन, एजेंसीअ+अ-

बच्चों को यदि सुर-ताल के साथ गणित की शिक्षा दी जाए तो वे इसकी समस्याओं को अपेक्षाकृत अधिक आसानी से समझ पाते हैं।

इसका खुलासा अमेरिका में हुए एक अध्ययन से हुआ है। इसके अनुसार, संगीत के विभिन्न माध्यमों, जैसे-ताली बजाकर, ड्रम बजाकर तथा गाना गा कर बच्चों को गणित के सवालों के बारे में आसानी से समझाया जा सकता है।

राग ललित!

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अपने मित्रों को मैं यह कोई नई बात नहीं बता रहा कि मुझे भारतीय शास्त्रीय संगीत से लगाव है। संगीत की जानकारी में मैं बिल्कुल शून्य हूँ लेकिन हाँ उसे मन से महसूस करके उसका आनंद लेना मुझे आता है। बचपन से ही हिन्दी फ़िल्मों के शास्त्रीय संगीत पर आधारित गीतों ने अधिकांश लोगों की तरह मेरे मन को भी मगन किया है। आज शीला और मुन्नी के दौर में इन्हीं शास्त्रीय गीतों के आधार पर बॉलीवुड में संगीत का नाम जीवित है।

गायक कलाकारों और बच्चों के लिए विशेष

गायक कलाकारों और बच्चों के लिए विशेष

खाँसी रोग कई कारणों से पैदा होता है और यदि जल्दी दूर न किया जाए तो विकट रूप धारण कर लेता है। एक कहावत है, रोग का घर खाँसी। खाँसी यूँ तो एक मामूली-सी व्याधि मालूम पड़ती है, पर यदि चिकित्सा करने पर भी जल्दी ठीक न हो तो इसे मामूली नहीं समझना चाहिए, क्योंकि ऐसी खाँसी किसी अन्य व्याधि की सूचक होती है। आयुर्वेद ने खाँसी के 5 भेद बताए हैं अर्थात वातज, पित्तज, कफज ये तीन और क्षतज व क्षयज से मिलाकर 5 प्रकार के रोग मनुष्यों को होते हैं।

भारत में संगीत शिक्षण

भारत में संगीत शिक्षण

१८ वीं शताब्दी में घराने एक प्रकार से औपचारिक संगीत-शिक्षा के केन्द्र थे परन्तु ब्रिटिश शासनकाल का आविर्भाव होने पर घरानों की रूपरेखा कुछ शिथिल होने लगी क्योंकि पाश्चात्य संस्कृति के व्यवस्थापक कला की अपेक्षा वैज्ञानिक प्रगति को अधिक मान्यता देते थे और आध्यात्म की अपेक्षा इस संस्कृति में भौतिकवाद प्रबल था।

चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख

चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख

गीत स्वयं की अनुभूति है, स्वयं को जानने की शक्ति है एवं एक सौन्दर्यपूर्ण ध्वनि कल्पना है जिसका सृजन करने केलिए एक ऐसे अनुशासन की सीमा को ज्ञात करना है, जिसकी सीमा में रहते हुए भी असीम कल्पना करने का अवकाश है। मनुष्य अनुशासन की परिधि में रहकर संगीत को प्रकट करता है, किन्तु प्रत्येक व्यक्ति के विचार, संवेदना, बुद्धिमता एवं कल्पना में विविधता होने के कारण प्रस्तुति में भी विविधता अवश्य होती है। इसी प्रकार देश एवं काल क्रमानुसार संगीत के मूल तत्व समाज में उनके प्रयोग और प्रस्तुतिकरण की शैलियों में परिवर्तन होना स्वाभाविक है। संगीत कला में भी प्रत्येक गुण की राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक अवस्थाओं

संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा

संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा

संगीत के मोहन-सुर संगीत की मादकता जीव जगत पर जो प्रभाव पड़ता है, वह किसी से छिपा नहीं है। संगीत की स्वरलहरी पर मुग्ध होकर हिरन का व्याध के बाण से विद्ध होना, महाविषधर भुजंग का सपेरे के वशवर्ती होना हम बहुत दिनों से सुनते आ रहे हैं। किन्तु वर्तमान युग में संगीत के प्रभाव से मनुष्य की व्याधियों का उपचार करने का प्रयोग भी होने लगा है। एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जबकि विज्ञान चिकित्सा अपने रोगियों के लिए मिक्सचर, पिल या पाउडर की व्यवस्था न करके दिन-रात में उसके लिए दो-तीन बार संगीत श्रवण का व्यवस्था पत्र देंगे।

नवजात शिशुओं पर संगीत का प्रभाव

नवजात शिशुओं पर संगीत का प्रभाव

कई माता पिता को संगीत के लाभों के बारे में सुना है नवजात शिशुओं पर संगीत की

प्रभाव।विभिन्न धुनों, यहां तक कि आज के आधार पर, टुकड़ों नवजात शिशुओं पर एक लाभदायक प्रभाव हो सकता है जो चिकित्सा के विशेष पाठ्यक्रम, देखते हैं।अलग अलग धुन की रिकॉर्डिंग के साथ एक एमपी 3 प्लेयर के रूप में भी इस तरह के एक सरल उपकरण का उपयोग कर
बच्चे के भावनात्मक विकास और उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।लेकिन हर धुन एक सकारात्मक प्रभाव का उत्पादन करने में सक्षम है, तो यह इसे सही ढंग से चयन करने के लिए महत्वपूर्ण है।टुकड़ों का चयन करने के लिए संगीत का

कैसे रखें आवाज के जादू को बरकरार

कैसे रखें आवाज के जादू को बरकरार

आपका व्‍यक्तित्‍व कई चीजों से मिलकर बनता है. और इस सबमें अहम किरदार निभाती है आवाज. मधुर आवाज खुद-ब-खुद आपको खींच लेती है अपनी ओर. आप चाहकर भी उससे अपना ध्यान नहीं हटा पाते. आपकी नजरें उस आवाज के मालिक को तलाशने लगती हैं. चाह होती है, तो बस उसके दीदार की, जिसने आपके कदमों को बांध लिया है किसी मीठी जंजीर की तरह.
कई बार हमें ऐसे लोग मिल जाते हैं, जिनकी वाणी हमें किसी मोहपाश की तरह जकड़ लेती है. और शायद यही वजह है कि हम उनकी बातों ज्‍यादा तवज्जो देते हैं. ये उनकी आवाज का जादू नहीं, तो फिर और क्या है.

संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव

संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव

रेडियो तरंगों की तरह संगीत की भी शक्तिशाली तरंगें होती हैं। वे अपने प्रभाव क्षेत्र को प्रभावित करती हैं। उनसे वातावरण अनुप्राणित होता है। पदार्थों में हलचल मचती है और प्राणियों की मनोदशा पर उसका अनोखा प्रभाव पड़ता है। प्राणियों में मनुष्य की बौद्धिक एवं संवेदनात्मक क्षमता अन्य प्राणियों से विशिष्ट है। इसलिए संगीत का उस पर असाधारण प्रभाव पड़ता है। यों भाव संवेदना प्राणि मात्र पर पड़ती है। वे अपने सामान्य क्रिया कलाप रोक कर वादन ध्वनि के साथ लहराने लगते हैं। उनमें शब्द ज्ञान तो होता नहीं इसलिए गायनों का अर्थ समझने में असमर्थ रहने पर भी वे गीतों के साथ जुड़े हुए भाव संचार को ग्रहण करते और उससे

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