लिंगायत सम्प्रदाय के लोग कौन है

कर्नाटक का बीदर जिला जो कि महाराष्ट्र और तेलंगाना से जुड़ा हुआ है, के लिंगायत सम्प्रदाय के करीब 75000 से अधिक लोग सड़कों पर अपनी पहचान पाने के लिए आ गए. इस लिंगायत समाज के लोगों की कर्नाटक में संख्या करीब 18 प्रतिशत के आसपास है जो कि सबसे बड़ी संख्या है. यही नहीं कर्नाटक से जुड़े महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी इस लिंगायत समाज की संख्या बहुत बड़ी तादात में है.

1. बारहवीं सदी में समाज सुधारक बासवन्ना ने इस लिंगायत समाज की स्थापना की थी.

2. बासवन्ना जी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.

3. लिंगायत सम्प्रदाय के लोगों के अनुसार यह धर्म भी मुस्लिम,हिन्दू,क्रिश्चियन आदि की तरह ही है.

4. लिंगायत सम्प्रदाय के लोग वेदों में विश्वास नहीं रखते हैं. ये मूर्ति पूजा में भी विश्वास नहीं रखते हैं.

5. बासवन्ना जी का कहना था कि हमें लोगों को उनके जन्म के अनुसार नहीं बल्कि कर्मों के आधार पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए.

6. बासवन्ना के अनुसार जो लोग भी किसी की भी हत्या करते हैं,उन्हें सबसे निम्न जाती के लोगों में रखा जाना चाहिए. लिंगायत संप्रदाय के लोग पूर्ण शाकाहारी होते हैं.

7. आम मान्यता ये है कि वीरशैव और लिंगायत एक ही लोग होते हैं. लेकिन लिंगायत लोग ऐसा नहीं मानते.

8. लिंगायत समाज के लोगों का मानना है कि वीरशैव लोगों का अस्तित्व समाज सुधारक बासवन्ना के उदय से भी पहले से था. वीरशैव भगवान शिव की पूजा करते हैं जबकि लिंगायत समाज के लोग नहीं.

9. लिंगायत समाज के लोग देवपूजा,सतीप्रथा,जातिवाद, महिलाओं के अधिकारों का हनन आदि को गलत मानते हैं और इसीलिए अपने समाज को हिन्दू धर्म से भी अलग मानते हैं.

10. लिंगायत हिंदुओं के भगवान शिव की पूजा नहीं करते लेकिन अपने शरीर पर इष्टलिंग धारण करते हैं

11. ये अंडे के आकार की गेंदनुमा आकृति होती है जिसे वे धागे से अपने शरीर पर बांधते हैं. लिंगायत इस इष्टलिंग को आंतरिक चेतना का प्रतीक मानते हैं.

12. सामाजिक रूप से लिंगायत उत्तरी कर्नाटक की प्रभावशाली जातियों में गिनी जाती है. राज्य के दक्षिणी हिस्से में भी लिंगायत लोग रहते हैं.

13. सत्तर के दशक तक लिंगायत दूसरी खेतीहर जाति वोक्कालिगा लोगों के साथ सत्ता में बंटवारा करते रहे थे. वोक्कालिगा दक्षिणी कर्नाटक की एक प्रभावशाली जाति है.

14. देवराज उर्स ने लिंगायत और वोक्कालिगा लोगों के राजनीतिक वर्चस्व को तोड़ दिया.

15. पिछड़ी जातियों, अल्पसंख्यकों और दलितों को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर देवराज उर्स 1972 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने.

16. अस्सी के दशक की शुरुआत में लिंगायतों ने रामकृष्ण हेगड़े पर भरोसा जताया.

17. जब लोगों को लगा कि जनता दल राज्य को स्थायी सरकार देने में नाकाम हो रही है तो लिंगायतों ने अपनी राजनीतिक वफादारी वीरेंद्र पाटिल की तरफ़ कर ली.

18. पाटिल 1989 में कांग्रेस को सत्ता में लेकर आए. लेकिन वीरेंद्र पाटिल को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एयरपोर्ट पर ही मुख्यमंत्री पद से हटा दिया और इसके बाद लिंगायतों ने कांग्रेस से मुहं मोड़ लिया.

19. इस प्रकार एक बार फिर से रामकृष्ण हेगड़े लिंगायतों के एक बार फिर से चेहते नेता बन गए.

20. रामकृष्ण हेगड़े की वजह से ही लोकसभा चुनावों में लिंगायतों के वोट भारतीय जनता पार्टी को मिले और केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी.

21. रामकृष्ण हेगड़े के निधन के बाद लिंगायतों ने बीएस येदियुरप्पा को अपना नेता चुना और 2008 में वे सत्ता में आए.

22. जब येदियुरप्पा को कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद से हटाया गया तो लिंगायतों ने 2013 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की हार से अपना बदला लिया.

23. आगामी विधानसभा चुनावों में येदियुरप्पा को एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने की यही वजह है कि लिंगायत समाज में उनका मजबूत जनाधार है.

24. कुछ समय बाद ही कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसीलिए वर्तमान सिद्धारमैया के कुछ मंत्री लगातार लिंगायत समाज के पुरोहित के सीधे संपर्क में बने हुए हैं.

25. मंत्री की रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री केंद्र सरकार को लिंगायत समाज की मांगों को लेकर चिट्ठी लिखेगी.