श्रेणीनिर्धारण मापदंड

श्रेणीनिर्धारण मापदंड

ऋणदाता (बैंक, उद्यम पूँजीपति, आदि) विभिन्न मापदंडों के आधार पर आपकी व्यवसाय संबंधी जानकारियों का विश्लेषण कर आपकी ऋण-सुपात्रता का सावधानीपूर्वक निर्धारण करते हैं। व्यावसायिक संस्थाओं का श्रेणीनिर्धारण करने के लिए सामान्यत: प्रयोग किए जाने वाले मुख्य मापदंड निम्नवत् हैं:

प्रबंधतंत्र

कुछ मुख्य मापदंड, जिन पर विचार किया जाता है, निम्नवत् हैं:

  • पृष्ठभूमि
  • उद्योग संबंधी अनुभव और ज्ञान
  • बैंको के साथ उधारकर्ता का पिछला संव्यवहार
  • अर्हताएँ
  • प्रवर्तकों की संयुक्त निवल संपत्ति
  • सहयोगी प्रतिष्ठान

वित्तीय विवरण

कुछ मुख्य मापदंड, जिन पर विचार किया जाता है, निम्नवत् हैं:

  • चालू अनुपात
  • ऋण ईक्विटी अनुपात
  • औसत कुल बिक्री
  • निवल लाभ
  • आय में संवृद्धि
  • निवल नक़द उपचय
  • प्रस्तावित सहायता के लिए प्रतिभूति संबंधी प्रावधान

परिचालन

कुछ मुख्य मापदंड, जिन पर विचार किया जाता है, निम्नवत् हैं:

  • शाखा कार्यालय से दूरी
  • इकाई का स्थान
  • उधारकर्ता की बाज़ार से दूरी
  • प्रौद्योगिकी का स्वरूप
  • उपकरण आपूर्तिकर्ता
  • गुणवत्ता प्रमाणपत्र

उद्योग

कुछ मुख्य मापदंड, जिन पर विचार किया जाता है, निम्नवत् हैं:

  • उद्यम की प्रकृति- चक्रीय/मौसमी
  • सहायता योजना के तहत पात्रता, यदि कोई हो
  • प्रतिस्पर्धी बढ़त
  • उत्पादों का ब्रॉड होना
  • उत्पाद/ मशीनों के अनुप्रयोगों की संख्या

पिछले ऋण संबंधी निष्पादन

कुछ मुख्य मापदंड, जिन पर विचार किया जाता है, निम्नवत् हैं:

  • चुकौती इतिवृत्त
  • चूकगत किस्तें
  • ब्याजदर/ अवधि में पुनरीक्षण
  • समय-पूर्व भुगतान
  • चूक
    • चूक का माह
    • चूक की राशि
    • चूक का कारण, यदि दिया गया है
    • प्रतिभूति का पुनर्बिक्री मूल्य
    • बैंक को होने वाली पूँजीगत हानि