MSME क्या होता है

अधिकृत प्रयोगकर्ता कौन है?

•संबंधित वस्तु के उत्पादक/ निर्माता अधिकृत प्रयोगकर्ता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं•यह एक पंजीकृत भौगोलिक संकेतक के संबंध में होना चाहिए•आवेदन निर्धारित प्रारूप में लिखित रूप में निर्धारित शुल्क के साथ किया जाना चाहिए

 

अति लघु, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की परिभाषा क्या हॆ?

भारत सरकार ने अति लघु, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास(एमएसएमईडी) अधिनियम 2006 अधिनियमित किया हॆ जिसके अनुसार अति लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों की परिभाषा निम्नवत हॆः-

  • किसी वस्तु के निर्माण अथवा उत्पादन, प्रसंस्करण अथवा परिरक्षण करने वाले उद्यम निम्न के अनुसारः
  1. अति लघु (माइक्रो) उद्यम वह होता हॆ जिसमे संयंत्र एवं मशीनरी पर निवेश रु 25 लाख लक होता हॆ;
  2. लघु उद्यम वह हॆ जिसमें संयंत्र एवं मशीनरी पर निवेश रु 25 लाख से अधिक किंतु रु 5 करोड़ से अधिक नहीं होता; तथा
  3. मध्यम उद्यम वह हॆ जिसमे संयंत्र एवं मशीनरी पर व्यय रु 5 करोड़ से अधिक किंतु रु 10 करोड़ से अधिक नहीं होता।

उक्त उद्यमों के मामले में संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश उनकी मूल लागत होती हॆ जिसमें भूमि तथा भवन एवं लघु उद्योग मंत्रालय के 5 अक्तूबर, 2006 की अधिसूचना सं एस.ओ.1722(ई) में उल्लिखित मदें शामिल नहीं होतीं।

  • वे उद्यम जो सेवा प्रदान करने अथवा उपलब्ध कराते हॆं, तथा जिनका उपस्करो/ उपकरणों में निवेश (मूल लागत भूमि, भवन तथा फ़र्नीचर, फ़िटिंग्स एवं एमएसएमईडी अधिनियम 2006 में अधिसूचित उन मदों को छोड़कर जिनका प्रदान की जा रही सेवा से सीधा संबंध नहीं हॆ), का विवरण निम्नवत हॆः-
    1. अति लघु (माइक्रो) उद्यम वह होता हॆ जिसमे उपस्करों/उपकरणों पर निवेश रु 10 लाख से अधिक नहीं होता हॆ;
    2. लघु उद्यम वह हॆ जिसमें उपस्करों/उपकरणों पर निवेश रु 10 लाख से अधिक किंतु रु 2 करोड़ से अधिक नहीं होता; तथा
    3. मध्यम उद्यम वह हॆ जिसमे उपस्करों/उपकरणों पर व्यय रु 2 करोड़ से अधिक किंतु रु 5 करोड़ से अधिक नहीं होता।

 

क्लस्टर वित्तपोषण क्या हॆ?

ऋण प्रदान करने हेतु क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण का उद्देश्य यह हॆ कि अति लघु एवं लघु उद्यमों की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके जिसे चिह्नित क्लस्टरों में बॆंकिंग सेवायें उपलब्ध कराने के माध्यम से पूरा किया जा सकता हॆ। क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण निम्नांकित मामलों में लाभकारी सिद्ध हो सकता हॆ-(क) स्पष्ट रूप से परिभाषित तथा चिह्नित समूह के साथ व्यवसाय करने में;(ख) जोखिम के आकलन हेतु युक्तिसंगत जान्कारी की उपलब्धता(ग) ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा मानिटरिंग(घ) लागत में कमी।       अतएव, बॆंकों को निदेश दिया गया हॆ कि वे इस दृष्टिकोण को प्रमुखता दें तथा एसएमई वित्तपोषण हेतु इसे अधिकाधिक अपनायें। यूनाईटेड नेशंस इंडस्ट्रियल डेवेलपमेंट आर्गनाईज़ेशन (यूनिडो) ने देश के विभिन्न भागों के 21 राज्यों में फ़ॆले 388 क्लस्टरों को चिह्नित किया हॆ। माइक्रो, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने भी स्कीम फ़ार रिजेनेरेशन आफ़ ट्रॆडिशनल इंडस्ट्रीज़ (स्फ़ूर्ति) योजना के अंतर्गत तथा माइक्रो एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई-सीडीपी) के अंतर्गत 121 अल्पसंख्यक बहुल जिलों में स्थित क्लस्टरों की सूची अनुमोदित की हॆ। तदनुसार बॆंको को निदेश दिया गया हॆ कि वे देश के अल्ल्प संख्यक बहुल क्षेत्रों में रहने वाले अल्पसंख्यक उद्यमियों के चिह्नित क्लस्टरों को ऋण प्रवाह बढाने हेतु उपयुक्त कदम उठायें।

 

माइक्रो तथा लघु उद्यमों हेतु ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट क्या हॆ?

एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार तथा सिडबी ने संयुक्त रूप से माइक्रो तथा लघु उद्यमों हेतु ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट की स्थापना की हॆ जिसका उद्देश्य संपार्श्विक प्रतिभूति / तृतीय पक्ष गारंटी लिये बिना अति लघु तथा लघु उद्यम क्षेत्र को ऋण प्रवाह बढाना हॆ। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह हॆ कि ऋण देने वाली संस्था परियोजना की अर्थक्षमता को प्रमुखता दे तथा वित्तपोषित परिसंपत्तियों की मात्र प्राथमिक प्रतिभूति से अपने ऋण को सुरक्षित करें। क्रेडिट गारंटी योजना ऋण दात्री संस्था को आश्वस्त करने हेतु हॆ कि यदि कोई एमएसई इकाई, जिसने संपार्श्विक प्रतिभूति रहित ऋण सुविधा प्राप्त की हॆ, ऋण्दाता के प्रति अपनी देयताओं को नहीं पूरा कर पाता तो गारंटी ट्रस्ट ऋणदाता को होने वाले नुकसान की भरपायी चूक की बकाया राशि की 85% तक करेगा। सीजीटीएमएसई ऋण्दात्री संस्थाओं द्वारा बिना संपार्श्विक प्रतिभूति तथा/अथवा तृतीय पक्ष गारंटी लिये प्रदान किये गये रु 100 लाख तक की ऋण सुविधाओं हेतु कवर प्रदान करेगा। उक्त गारंटी कवर हेतु सीजीटीएमएसई द्वारा गारंटी तथा वार्षिक सेवा शुल्क प्रभारित किया जाता हॆ। वर्तमान में गारंटी शुल्क तथा वार्षिक सेवा शुल्क ऋणकर्ता द्वारा वहन किया जाता हॆ।

 

क्या एमएसई ऋणकर्ताओं हेतु क्रेडिट रेटिंग अनिवार्य हॆ?

नहीं। क्रेडिट रेटिंग अनिवार्य नहीं हॆं परंतु यह एमएसई ऋणकर्ताओं के हित में हॆ कि वे क्रडिट रेटिंग करवा लें क्योंकि इससे उनके द्वारा बॆंकों से लिये गये ऋण का मूल्य निर्धारित करने में सहायता मिलती हॆ।