श्री राम नाम लिखी ईटों का इस्तेमाल नाला बनवाने में किया जा रहा है

जिन ईंटों से अयोध्या में राम मंदिर बनना है उनका इस्तेमाल नाला बनाने में हो रहा है...' इस मैसेज के साथ वायरल हो रही है ये तस्वीर
क्या सच में 'श्री राम' नाम के ईंटों का इस्तेमाल नाला बनाने में हो रहा है ? ये है वायरल मैसेज का सच

अयोध्या विवाद सुनवाई की एक और तारीख मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई 29 जनवरी को होगी। इस बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है,
 जिसके साथ  मैसेज लिखा है कि जिन ईंटों से राम मंदिर बनाया जाना है उन ईंटों का इस्तेमाल नाला बनाने में किया जा रहा है। तस्वीर में दिख भी रहा है कि नाला बनाने में जो ईंट लगें हैं उनपर श्रीराम लिखा है। ऐसे में पोस्ट पढ़कर कुछ लोग ऐसे काम की आलोचना कर रहे हैं तो कुछ पोस्ट लिख अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या वाकई में ये वहीं ईंटें हैं जिनसे राम मंदिर का निर्माण होना है। आखिर क्या है तस्वीर के पीछे का सच।

क्या है वायरल मैसेज : वायरल तस्वीर के साथ लिखा है कि 'जो ईंटें राम-मंदिर के नाम पर इकट्ठा की गई थीं, वो अब UP सरकार के चहेते ठेकेदारों द्वारा अयोध्या में नाली बनाने के उपयोग में आ रही हैं..'। कुछ लोगों ने तस्वीर के नीचे लिखा कि धार्मिक आस्था का व्यवसायिक इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?

तस्वीर की पड़ताल : तस्वीर को सोशल मीडिया और गूगल पर सर्च करने पर कई लिंक मिले, उन्हीं में से एक लिंक इंडिया टुडे ग्रुप का मिला। खबर के मुताबिक पड़ताल करने पर पता चला कि ये तस्वीर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के स्टेशन रोड के पास की है। जहां पर नाले का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण करा रहे लोगों से इन ईंटों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्होंने एक स्थानीय ठेकेदार से ये ईंटें मंगाई हैं।

- स्थानीय ठेकेदार से बातचीत की गई तो मामले का खुलासा हुआ। दरअसल जहां से ये ईंटें मंगाई गईं वो 'श्री राम खन्ना एंड कंपनी' के हैं। जो शाहजहांपुर में ईंटों का लोकल सप्लायर है। कंपनी केऑनर अशोक कुमार खन्ना ने बताया कि उनका 35 साल से ईंटों का बिजनेस है। उनके पिता श्री राम खन्ना का नाम ईंटों पर लिखा जाता है।

आचार्य सतेंद्र दास ने क्या कहा : अयोध्या में राम मंदिर में प्रमुख पुजारी आचार्य सतेंद्र दास ने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में जो ईंटें इकट्ठा की गईं हैं वो यहां से कहीं नहीं गईं हैं। ये सरासर झूठ है कि यहां की ईंटों से कहीं पर निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि 1989 में शिला पूजा के दौरान विभिन्न प्रदेशों और दूसरे देशों से ये ईंट अयोध्या में लाई गईं। ईंटों पर विभिन्न भाषाओं और स्टाइल में श्री राम लिखा है।