सिंथेटिक दूध

 

दूध एक अपारदर्शी सफेद द्रव है जो मादाओं के दुग्ध ग्रन्थियों द्वारा बनाया जता है। नवजात शिशु तब तक दूध पर निर्भर रहता है जब तक वह अन्य पदार्थों का सेवन करने में अक्षम होता है। साधारणतया दूध में ८५ प्रतिशत जल होता है और शेष भाग में ठोस तत्व यानी खनिज व वसा होता है। गाय-भैंस के अलावा बाजार में विभिन्न कंपनियों का पैक्ड दूध भी उपलब्ध होता है। दूध प्रोटीन, कैल्शियम और राइबोफ्लेविन (विटामिन बी -२) युक्त होता है, इनके अलावा इसमें विटामिन ए, डी, के और ई सहित फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयोडीन व कई खनिज और वसा तथा ऊर्जा भी होती है। इसके अलावा इसमें कई एंजाइम और कुछ जीवित रक्त कोशिकाएं भी हो सकती हैं

दूध का मूल्यवर्धन

दूध एक पूर्ण, स्वच्छ, स्तन ग्रन्थियों का झारण है। पौष्टिकता की दृष्टि से दूध एक मात्र सम्पूर्ण आहार है जो हमको प्रकृति की देन है। हमारे शरीर को लगभग तीस से अधिक तत्वों की आवश्यकता होती है। कोई भी अकेला पेय या ठोस भोज्य पदार्थ प्रकृति में उपलब्ध नहीं है जिससे इन सबको प्राप्त किया जा सके। परन्तु दूध से लगभग सभी पोषक तत्व प्राप्त हो जाते हैं। इसलिए बच्चों के लिए सन्तुलित व पूर्ण भोजन का स्तर दिया गया है। दूध में मौजूद संघटक हैं पानी, ठोस पदार्थ, वसा, लैक्टोज, प्रोटीन, खनिज वसाविहिन ठोस। अगर हम दूध में मौजूद पानी की बात करें तो सबसे ज्यादा पानी गधी के दूध में 91.5% होता है, घोड़ी में 90.1%, मनुष्य में 87.4%, गाय में 87.2%, ऊंटनी में 86.5%, बकरी में 86.9% होता है।

दूध की उत्पादन का लक्ष्य 12वें पंचवर्षीय प्लान (2010-2017) में बढ़कर 26.95 लाख मैट्रिक टन करने की है जबकि 2010-11 में हमारी दूध की मांग या जरूरत 33.69 लाख मैट्रिक टन थी। यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि हमारी पूर्ति माँग से काफी कम है जिसके लिए हमें नस्ल सुधार से लेकर जानवरों के लिए चारा, दाना, पानी और प्रबंधन पर बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत है।

दूध सम्पूर्ण आहार के साथ-साथ जल्दी खराब हो जाने वाली पेय है। इसलिए दूध के स्वरूप को बदल कर हम ज्यादा दिनों तक रख सकते हैं साथ ही साथ दूध के मूल्यवर्धन द्वारा ज्यादा आमदनी बना सकते हैं। दूध से उत्पादित पदार्थों के पहले हमें यह जानकारी हासिल करना जरूरी है कि दूध की मांग किस रूप में ज्यादा है।

दूध के प्रकार

(क) सम्पूर्ण दूध- स्वस्थ पशु से प्राप्त किया गया दूध जिसके संघटन में ठोस परिवर्त्तन न किया गया हो, पूर्ण दूध कहलाता है। इस प्रकार के दूध को गाय, बकरी, भैंस की दूध कहलाती है। पूर्ण दूध में वसा तथा वसाविहीन ठोस की न्यूनतम मात्रा गाय में 3.5% तथा 8.5% और भैंस में 6% तथा 9%, क्रमशः रखी गई है।

(ख) स्टेण्डर्ड दूध- यह दूध जिसमें वसा तथा वसाविहीन ठोस की मात्रा दूध से क्रीम निकल कर दूध में न्यूनतम वसा 4.5% तथा वसाविहीन ठोस 8.5% रखी जाती है।

(ग) टोण्ड दूध- पूर्ण दूध में पानी तथा सप्रेश दूध पाऊडर को मिलाकर टोण्ड दूध प्राप्त किया जाता है जिसकी वसा 3% तथा वसाविहीन ठोस की मात्रा 8.5% निर्धारित की गयी है।

(घ) डबल टोण्ड दूध- इस दूध में वसा 1.5% तथा वसाविहीन ठोस 9% निर्धारित रहती है।

(ड.) रिक्न्सटिट्यूटेड दूध- जब दूध के पाऊडर को पानी में घोल कर दूध तैयार किया जाता है जिसमें 1 भाग दूध पाऊडर तथा 7 से 8 भाग पानी मिलाते हैं तो उसमें रिकन्सटिट्यूटेड दूध कहते हैं।

(च) रिकम्बाइण्ड दूध- यह दूध जो बटर आयल, सप्रेस दूध पाऊडर तथा पानी की निश्चित मात्राओं को मिलाकर तैयार किया जाता है उसे रिकम्बाइण्ड दूध कहते हैं। जिसमें वसा की मात्रा 3% तथा वसाविहीन ठोस की मात्रा 8.5% निर्धारित की गई है।

(छ) फिल्ड दूध- जब पूर्ण दूध में से दुग्ध वसा को निकाल कर उसके स्थान पर वनस्पति वसा को मिलाया जाता है उसे फिल्ड दूध कहते हैं।

 

सिंथेटिक दूध (synthetic milk) क्या हैं 

सिंथेटिक दूध (synthetic milk) कृत्रिम रूप से बनाया गया दूध होता हैं,जो गाय या भैंस के दूध से वसा निकालकर बचे हुये सपरेटा दूध में यूरिया,डिटरजेंट़,कास्टिक सोड़ा, स्टार्च आयल,ग्लूकोज शेंपू,हाइड्रोजन पराआँक्साइड़,डालडा आयल,चाक,चूना आदि मिलाकर बनाया जाता हैं.स्किमड़ दूध पावड़र में भी यही वस्तुएँ मिलाकर उसे दूध में परिवर्तित कर दिया जाता हैं.

सिंथेटिक दूध से जान को खतरा :::
सिंथेटिक दूध मानव के लिये धीमा ज़हर होता हैं,इससे मानव शरीर बीमारी के घर में बदल जाता हैं,आईयें जानतें हैं, इससे होनें वाली स्वास्थ समस्याओं को 
० सिंथेटिक दूध का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव छोट़े बच्चों पर होता हैं,क्योंकि उनका सम्पूर्ण आहार दूध ही होता हैं, इस दूध के सेवन से बच्चा कुपोषित हो जाता हैं,क्योंकि बच्चों के विकास के लिये ज़रूरी विटामिन, प्रोटीन इस दूध से बच्चों को नही मिलतें हैं.
० सिंथेटिक दूध में यूरिया,पेंट,और डिटरजेंट मिला होता हैं, जिनसे किड़नी फेल होनें का का खतरा पैदा हो जाता हैं.
० वर्षों तक लगातार सिंथेटिक दूध के सेवन से स्त्रीयों को बार - बार गर्भपात का होता हैं.
० सिंथेटिक दूध से बनें मावा,मिठाई खानें से कैंसर होनें की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती हैं,क्योंकि इसमें उपस्थित प्लास्टिक पेंट गर्म होनें पर खतरनाक कार्सिनोम का निर्माण करता हैं.
० सिंथेटिक दूध की अस्वच्छता कई संक्रामक रोग के लिये उत्तरदायी हैं जैसें डायरिया,टाइफाइड, पेचिस,पेप्टिक अल्सर आदि.
सिंथेटिक दूध से होनें वाली इन समस्याओं से सम्पूर्ण विश्व पीड़ित हैं,अत : सिंथेटिक दूध को पहचाननें वाली तकनीकों को अधिक विकसित किया जाकर इस दूध को बनानें व बेचनें वालों पर कठोर दंड़ात्मक कार्यवाही करनी चाहियें ताकि जीनें के मूलभूत अधिकार की रक्षा की जा सके.

दूध में डिटर्जेंट की जाँच करने के उपाय

दूध में डिटर्जेंट की जाँच करने के उपाय

आम तौर पर दूध की गुणवत्ता जांचने के लिए लैक्टोमीटर प्रयोग किया जाता है या फिर रसायनों की सहायता से इसे परखा जा सकता है.

लेकिन रसायनों का इस्तेमाल आम लोग नहीं कर सकते और लैक्टोमीटर से सिर्फ़ दूध में पानी की मात्रा का पता चल सकता है, इससे सिंथेटिक दूध को नहीं पकड़ा जा सकता है.