सिद्धारमैया लिंगायत धर्मगुरुओं के साथ

सिद्धारमैया लिंगायत

सिद्धारमैया लिंगायत धर्मगुरुओं के साथ. सिद्धारमैया ने ये फैसला इस तरह लिया है कि कम से कम उनके हाथ तो इसमें नहीं ही जलेंगे. (फोटोःट्विटर) लेकिन इस बात से वीरशैव खास खुश नहीं हैं. वीरशैव लिंगायतों के धर्मगुरुओं ने कर्नाटक सरकार को एक ज्ञापन दिया है. इनकी मांग है कि नागमोहन दास पैनल की सिफारिशें ज्यों कि त्यों न मानी जाएं. अगर अलग धर्म का दर्जा दिया ही जाना है तो वीरशैव-लिंगायत नाम से दिया जाए. ऐसा न होने पर उन्होंने प्रदर्शन करने की बात की है. बंदरबांट में किसे क्या मिलेगा?फिलहाल लिंगायत पिछड़े वर्ग में गिने जाते हैं. लेकिन लिंगायतों ने वक्त के साथ काफी कुछ हासिल किया है. इस संप्रदाय से कर्नाटक में कई हस्तियों का भी ताल्लुक है, जैसे पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, दिवंगत पत्रकार गौरी लंकेश और दिवंगत स्कॉलर एम.एम. कलबुर्गी. राज्य में लिंगायतों के कई अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान भी हैं. अल्पसंख्यक धर्म के दर्जे का सबसे बड़ा फायदा इन्हें ही होगा. फिलहाल पूरी स्थिति साफ नहीं है, लेकिन अलग धर्म के लिए आंदोलन चला रहे लोगों का मानना है कि लिंगायतों को बतौर अल्पसंख्यक संविधान के अनुच्छेद 25, 28, 29 और 30 के तहत फायदा मिलेगा. ये शिक्षा के अधिकार कानून से बाहर हो जाएंगे और अपने यहां 50% सीटें लिंगायत छात्रों के लिए आरक्षित कर पाएंगे. ये बात कॉलेज में मेडिकल और इंजीनियरिंग सीटों पर भी लागू होगी. अल्पसंख्यक दर्जा मिलने के बाद लिंगायत केंद्र द्वारा दिए जाने वाले खास अल्पसंख्यक फंड का भी फायदा ले पाएंगे.