सेरेस

सेरेस मंगल और बृहस्पति मे मध्य स्थित मुख्य क्षुद्र ग्रह पट्टे मे है। यह इस पट्टे मे सबसे बड़ा पिंड है। सेरेस का आकार और द्रव्यमान उसे गुरुत्व के प्रभाव मे गोलाकार बनाने के लिये पर्याप्त है। अन्य बड़े क्षुद्रग्रह जैसे 2 पलास, 3 जुनो तथा 10 हायजीआ अनियमित आकार के है।

सेरेस की संरचना

सेरेस की संरचना

सेरेस का एक चट्टानी केन्द्रक है और 100 किमी मोटी बर्फ की परत है। यह 100 किमी मोटी परत सेरेस के द्रव्यमान का 23-28 प्रतिशत तथा आयतन का 50प्रतिशत है। यह पृथ्वी पर के ताजे जल से ज्यादा है। इस के बाहर एक पतली धूल की परत है।

सेरेस की सतह ‘C’ वर्ग के क्षुद्रग्रह के जैसे है। सेरेस पर एक पतले वातावरण के संकेत मीले है।

सेरेस तक कोई अंतरिक्ष यान नही गया है लेकिन नासा का डान इसकी यात्रा 2015मे करेगा।

 
  1. सेरेस - सबसे छोटा बौना ग्रह (क्षुद्रग्रह)
  2. सेरेस यह सबसे छोटा बौना ग्रह है। इसे पहले 1-सेरेस के नाम से क्षुद्रग्रह माना जाता था।
  3. इसकी कक्षा सूर्य से 4,46,000,000 किमी माना जाता है।
  4. व्यास - 950 किमी । इसका व्यास बुध के व्यास का 1/5 भाग है।
  5. सेरेस कृषी का रोमन देवता है।
  6. इसकी खोज इटली के खगोलशास्त्री गुईसेप्पे पिआज्जी ने 1 जनवरी 1801 मे की थी।
  7. सेरेस मंगल और बृहस्पति मे मध्य स्थित मुख्य क्षुद्र ग्रह पट्टे मे है। यह इस पट्टे मे सबसे बड़ा पिंड है। सेरेस का आकार और द्रव्यमान उसे गुरुत्व के प्रभाव मे गोलाकार बनाने के लिये पर्याप्त है। अन्य बड़े क्षुद्रग्रह जैसे 2 पलास, 3 जुनो तथा 10 हायजीआ अनियमित आकार के है।
  8. सेरेस का एक चट्टानी केन्द्रक है और 100 किमी मोटी बर्फ की परत है। यह 100 किमी मोटी परत सेरेस के द्रव्यमान का 23-28 प्रतिशत तथा आयतन का 50प्रतिशत है। यह पृथ्वी पर के ताजे जल से ज्यादा है। इस के बाहर एक पतली धूल की परत है।
  9. आई. ए. यू. की नई परिभाषा के अनुसार इसे बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया है, जहाँ पर इसे संख्या 1 से जाना जाएगा।
  10. सेरेस की सतह ‘C’ वर्ग के क्षुद्रग्रह के जैसे है। सेरेस पर एक पतले वातावरण के संकेत मीले है।
  11. सेरेस तक कोई अंतरिक्ष यान नहीं गया है लेकिन नासा का डान इसकी यात्रा 2015 मे करेगा। नासा अमरीका की स्पेश एजेंसी का नाम है।
  12. अन्य बौने ग्रह हैं, चेरॉन एवं 2003 UB 313 (इरिस)।

विज्ञान के क्षेत्र

 विज्ञान के क्षेत्र

वाशिंगटन : साल 2014 3डी प्रिंटिंग और धूमकेतु पर उपग्रह के पदार्पण जैसी क्रांतिकारी खोजों का साल रहा और आने वाले साल में विज्ञान के क्षेत्र में महान आविष्कारों के होने की पूरी संभावना है.

विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित शोध पत्रिका ‘नेचर’ के अनुसार, आने वाला साल भी नई खोजों वाला साबित होगा और साल की पहली बड़ी खबर मार्च में ब्रह्मांड की स्थापना का रहस्य खोजने के लिए चल रहे अभियान के तहत लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर के दो वर्ष के बाद दोबारा शुरू होने के साथ मिल सकती है.