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गुरु बसव लिंगायत संप्रदाय शुरू करने वाले माने जाते हैं.

गुरु बसव लिंगायत संप्रदाय शुरू करने वाले माने जाते हैं. लेकिन इस बात पर मतभेद भी है. (फोटोःविकिमीडिया कॉमन्स) ऐसे समय में हुए बासवन्ना या गुरु बसव. ब्राह्मण समाज से आने वाले बसव एक समाज-सुधारक थे और उन्होंने जाति प्रथा के खिलाफ खूब काम किया. वो आज़ादी, बराबरी और भाईचारे जैसे मूल्यों पर खूब ज़ोर देते थे और अपने विचारों का प्रसार 'वचन' गाकर करते थे. बसव के लिखे एक वचन का मतलब कुछ यूं निकलता है - 'आत्मा की कोई जाति नहीं होती, वो रीतियों में बंधी नहीं होती' बसव और उनके अनुयायियों ने ब्राह्मणवादी रीति-रिवाज़ों और वेदों को मानने से इनकार कर दिया था. वो मूर्ति पूजा के भी खिलाफ थे.

कौन हैं लिंगायत

कर्नाटक में चुनाव होने वाले हैं. मोटा भाई वहां भी सरकार बनाना चाहते हैं. जैसे उन्होंने त्रिपुरा में सरकार बनाई. या जैसे उन्होंने मेघालय में बना ली. लेकिन ये सब तब होगा, जब सिद्धारमैया उन्हें चैन लेने दें. कर्नाटक में कांग्रेस सरकार चला रहे सिद्धारमैया एक के बाद एक मास्टर स्ट्रोक चल रहे हैं. विधानसभा चुनाव से ऐन पहले उन्होंने कर्नाटक के लिए अलग झंडे का प्रस्ताव बनाकर केंद्र की एनडीए (भाजपा पढ़ें) सरकार के पाले में डाल दिया और अब उन्होंने कर्नाटक में लिंगायत सम्प्रदाय को एक अलग धर्म (अल्पसंख्यक) के रूप में मान्यता देने की कवायद शुरू कर दी है.

सिद्धारमैया लिंगायत धर्मगुरुओं के साथ

सिद्धारमैया लिंगायत

सिद्धारमैया लिंगायत धर्मगुरुओं के साथ. सिद्धारमैया ने ये फैसला इस तरह लिया है कि कम से कम उनके हाथ तो इसमें नहीं ही जलेंगे. (फोटोःट्विटर) लेकिन इस बात से वीरशैव खास खुश नहीं हैं. वीरशैव लिंगायतों के धर्मगुरुओं ने कर्नाटक सरकार को एक ज्ञापन दिया है. इनकी मांग है कि नागमोहन दास पैनल की सिफारिशें ज्यों कि त्यों न मानी जाएं. अगर अलग धर्म का दर्जा दिया ही जाना है तो वीरशैव-लिंगायत नाम से दिया जाए. ऐसा न होने पर उन्होंने प्रदर्शन करने की बात की है. बंदरबांट में किसे क्या मिलेगा?फिलहाल लिंगायत पिछड़े वर्ग में गिने जाते हैं. लेकिन लिंगायतों ने वक्त के साथ काफी कुछ हासिल किया है.

Facebook ने मांगी माफी दीया डेटा सुरक्षा का भरोसा

 Facebook ने मांगी माफी  दीया डेटा सुरक्षा का भरोसा

Facebook के के सीईओ ने डाटा चोरी पर चुप्पी तोड़ते हुए 2 अरब यूजरों के साथ बड़े विश्वासघात पर माफी मांगी है बृहस्पतिवार को पहले सार्वजनिक बयान में उन्होंने भरोसा दिया कि भविष्य में यूजर डेटा को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे |

प्राइम टाइम : योगी अपने ही गढ़ में क्यों हार गए?

प्राइम टाइम : योगी अपने ही गढ़ में क्यों हार गए?

बबुआ तो बुआ को लेकर सीरीयस है. तभी तो जीत के बाद बबुआ बुआ के घर पहुंच गया. राजनीति में नारे और प्रतीक कितनी जल्दी बदलते हैं. पिछले साल राहुल और अखिलेश की जोड़ी यूपी के लड़के कहलाए, नहीं चले तो अब बुआ बबुआ नारा चल निकला है. अखिलेश यादव गुलदस्ता लेकर बसपा नेता मायावती के घर मिलने पहुंच गए. यूपी की राजनीति में इस प्रणाम पाती से लंबे समय का समीकरण बनने वाला है. इस जोड़ी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सांप छुछूंदर की जोड़ी कह दिया. उनकी यह बात न तो बुआ के घरवालों को पसंद आई और न ही भतीजे के गांव वालों को.

भगवान नहीं हैं बताने वाले महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का हुआ निधन

स्टीफन हॉकिंग

दुनिया के महान भौतिकी और ब्रह्मांड वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग अब हमारे बीच नहीं रहे। हालही में 76 साल की उम्र में उनका निधन हो गया इस खबर से दुनिया भर में शोक छा गया। स्‍टीफन हॉकिंग ने अपने जीवन में अंतरिक्ष से संबंधी कई अहम सिद्धांत दिए और साथ ही कई रहस्‍यों पर से पर्दा उठाया।  स्टीफन हॉकिंग अब नहीं रहे, लेकिन जब-तक जिंदा रहे उनकी गिनती धरती के सबसे स्मार्ट व्यक्तियों में होती रही। वह विश्व प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी और कॉस्मोलॉजिस्ट रहे, जिन्होंने कॉस्मोलॉजी, क्वांटम फिजिक्स, ब्लैक होल और स्पेस-टाइम की प्रकृति के क्षेत्र में अपने काम के लिए कई सम्मान प्राप्त किए।

गोरखपुर: ये हैं आदित्यनाथ योगी को पटखनी देने वाले प्रवीण कुमार निषाद

गोरखपुर: ये हैं आदित्यनाथ योगी को पटखनी देने वाले प्रवीण कुमार निषाद

पिछले साल उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत हुई और आदित्यनाथ योगी को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया जिसके बाद गोरखपुर लोकसभा सीट खाली हो गई थी.

इस सीट पर अब उप-चुनाव के नतीजे आए हैं और जो शख़्स लोकसभा में गोरखपुर की नुमाइंदगी करेगा वो भी एक युवा चेहरा ही है.

उपचुनाव के नतीजे हमारे लिए एक सबक: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

हार के कारणों पर योगी ने कहा कि उपचुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं, जबकि आमचुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों पर मतदान होता है। ऐसे में हम इस हार से सबक लेकर मंथन करेंगे। हमें यकीन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जो गरीब कल्याण की योजनाएं चलाई जा रही हैं या देश में परिवर्तन के जो काम हुए हैं, उन्हें जनता समझेगी।

उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन को राजनीतिक सौदेबाजी करार दिया और कहा कि हम इस गठबंधन को नहीं समझ सके हैं। हमें इसके लिए एक रणनीति बनानी होगी। उन्होंने अतिआत्मविश्वास को भी हार का एक कारण बताया।

बरेली पूर्व चेयरमैन को हलाला के बाद भी नहीं मिला पति |

रंजीत से बनी फातिमा समाज सेवी फरत नक़वी की सरण में पहुची फातिमा पति ने दिया धोखा मुख्यमंत्री से शिकायत करने की कही तो देने लगे जान से मारने की धमकी फातिमा परेशान होकर पहुची समाज सेवी फरत नक़वी के पास फातिमा ने अपना दर्द मिडिया को सुनाया।

 

दो सौ से ज्यादा कॉलेजों में घटेंगी सीटें

एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के करीब दो सौ कॉलेजों की स्नातक और परास्नातक की सीटों पर इस बार कैंची चल सकती है। कॉलेज उतने ही एडमिशन कर पाएंगे जिस अनुपात में उनके यहां अनुमोदित शिक्षक होंगे। विश्वविद्यालय इसके लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार करा रहा है जिसका प्रयोग एडमिशन प्रक्रिया में किया जाएगा। कॉलेज शिक्षकों के अनुपात के हिसाब से ही सीट लॉक कर सकेंगे। परीक्षाओं के दौरान कई कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षक न होने के मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसका निर्णय लिया। आलम यह है कि स्नातक की पढ़ाई कर रहे छात्र परीक्षा में ड्यूटी कर रहे हैं। यही छात्र वहां पढ़ाते भी हैं। अगर अनुमोदित शिक्षक

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