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जम्मू-कश्मीर में लगा राज्यपाल शासन, राष्ट्रपति शासन क्यों नहीं?

जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद राज्यपाल शासन लगा दिया गया है. पिछले 40 सालों में आठवीं बार राज्य में राज्यपाल शासन लगाया गया है.

वर्तमान राज्यपाल एन एन वोहरा के कार्यकाल में यह चौथा मौका है जब राज्य में राज्यपाल शासन लगाया गया है. पूर्व नौकरशाह वोहरा 25 जून 2008 को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल बने थे.

मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी ने यह कहते हुए कि 'जम्मू-कश्मीर में बढ़ते कट्टरपंथ और चरमपंथ के चलते सरकार में बने रहना मुश्किल हो गया था' पीडीपी के साथ राज्य में क़रीब तीन साल तक गठबंधन में रहने के बाद समर्थन वापसी की घोषणा कर दी.

 

मोदी ने दिखाया ममता को ‘सही रास्ता’, बदले में 'दीदी' ने पीएम के लिए राज्यपाल को परे हटाया

राजनीतिक तौर पर एक दूसरे के धुर विरोधी कहे जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच शुक्रवार को सियासी रिश्तों की नई गर्मजोशी देखने को मिली। 

 

शिवसेना का जोरदार हमला, कहा- सनकी खूनी की तरह है भाजपा, ढोंगी हैं योगी

पालघर लोकसभा उपचुनाव को लेकर महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना के बीच तलवारें तन गई हैं। पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना पर धोखा देने का आरोप लगाया। उसके बाद शिवसेना ने भी पलटवार किया है। शिवसेना ने भाजपा को सनकी खूनी बताते हुए कहा है कि इसके रास्ते में जो भी आ रहा है वह उसे खंजर मार रही है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिवसेना ने ढोंगी करार दिया है।

 

शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र में 'खंजर, विश्वासघात और योगी की चप्पल' नामक शीर्षक के तहत संपादकीय लिखा है जिसमें कहा गया है कि ढोंगी योगी आदित्यनाथ पालघर लोकसभा उपचुनाव में रैली करने आए थे। 

शिवसेना का जोरदार हमला, कहा- सनकी खूनी की तरह है भाजपा, ढोंगी हैं योगी

पालघर लोकसभा उपचुनाव को लेकर महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना के बीच तलवारें तन गई हैं। पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना पर धोखा देने का आरोप लगाया। उसके बाद शिवसेना ने भी पलटवार किया है। शिवसेना ने भाजपा को सनकी खूनी बताते हुए कहा है कि इसके रास्ते में जो भी आ रहा है वह उसे खंजर मार रही है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिवसेना ने ढोंगी करार दिया है।

 

शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र में 'खंजर, विश्वासघात और योगी की चप्पल' नामक शीर्षक के तहत संपादकीय लिखा है जिसमें कहा गया है कि ढोंगी योगी आदित्यनाथ पालघर लोकसभा उपचुनाव में रैली करने आए थे। 

WhatsApp में जल्द नंबर बदलने पर नहीं होगी झंझट

WhatsApp में जल्द आएगा ये नया फीचर, नंबर बदलने पर नहीं होगी झंझट

इस समय व्हाट्सएप के 1.5 अरब एक्टिव मंथली यूजर्स हैं, जो प्रतिदिन 60 अरब मैसेज एक्सचेंज करते हैं. भारत में व्हाट्सऐप के दो करोड़ यूजर्स हैं.| WhatsApp ने बीटा अपडेट में एक फीचर को जारी किया है, जिसकी मदद से ios, एंड्रॉयड और विंडोज यूजर्स जल्द ही बिना किसी झंझट के अपने डेटा को एक नए नंबर में ट्रांसफर कर पाएंगे. नया 'चेंज नंबर' फीचर फिलहाल गूगल प्ले स्टोर पर 2.18.97 एंड्रॉयड बीटा अपडेट के साथ उपलब्ध है.

U.P के CM योगी आदित्यनाथ से 'सीधी बात' | Bharat Tak

योगी आदित्यनाथ ने देश के नंबर 1 न्यूज़ चैनल ‘आजतक’ के दोबारा शुरू हुए फ्लैगशिप शो ‘सीधी बात’पर पहुंचे थे. यहां उन्‍होंने शो की एंकर श्‍वेता सिंह के सवालों के बेबाक जवाब दिए. यहीं नहीं उन्‍होंने भविष्‍य में प्रधानमंत्री पद को लेकर अपने विचार भी साझा किए.

उत्‍तर प्रदेश के CM योगी आदित्‍यनाथ से जब पूछा गया कि क्या आप भविष्य में कभी अपने आप को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देखते हैं, तो उन्होंने कहा, “नहीं, मैं किसी पद के लिए दावेदार नहीं हूं, मैं एक योगी हूं, मुझे पार्टी ने प्रदेश की जनता की सेवा का अवसर दिया है, मैं प्रदेश की जनता की सेवा कर रहा हूं.”

लिंगायत क्यों चाहते हैं हिंदुओं से अलग होना

लिंगायत समुदाय लंबे समय से मांग कर रहा था कि उन्हें हिंदू धर्म से अलग घोषित किया जाए। इस मांग को लेकर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस नागामोहन दास की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। इस समिति ने लिंगायत समुदाय के लिए अलग धर्म के साथ अल्पसंख्यक दर्जे की सिफारिश की थी, जिसे सिद्धारमैया कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।लिंगायत भारतवर्ष के प्राचीनतम धर्म का एक हिस्सा है इस धर्म के ज्यादातर अनुयायी दक्षिण भारत में हैं। ये भगवान शिव की स्तुति आराधना पर आधारित है.भगवान शिव जो सत्य सुंदर और सनातन हैं जिनसे सृस्टि का उद्गार हुआ। जो आदि अनंत हैं। हिंदु धर्म मे त्रिदेवों का वर्णन है जिसम

लिंगायत सम्प्रदाय के लोग कौन है

कर्नाटक का बीदर जिला जो कि महाराष्ट्र और तेलंगाना से जुड़ा हुआ है, के लिंगायत सम्प्रदाय के करीब 75000 से अधिक लोग सड़कों पर अपनी पहचान पाने के लिए आ गए. इस लिंगायत समाज के लोगों की कर्नाटक में संख्या करीब 18 प्रतिशत के आसपास है जो कि सबसे बड़ी संख्या है. यही नहीं कर्नाटक से जुड़े महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी इस लिंगायत समाज की संख्या बहुत बड़ी तादात में है.

1. बारहवीं सदी में समाज सुधारक बासवन्ना ने इस लिंगायत समाज की स्थापना की थी.

2. बासवन्ना जी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.

दिवंगत पत्रकार गौरी लंकेश पत्रिके लिंगायत समुदाय से ही आती थीं

दिवंगत पत्रकार गौरी लंकेश पत्रिके लिंगायत समुदाय से ही आती थीं. पिछले साल उनकी हत्या हो गई थी. (फोटोःट्विटर) अपने को हिंदू मानने वाले वीरशैव खुद को 'वीरशैव लिंगायत' भी कह देते हैं. इस नाते से लिंगायत हिंदू धर्म के और करीब लगने लगते हैं. खासकर इसलिए कि बसवन्ना ने लिंगायत 'धर्म' की स्थापना की थी कि नहीं, इसे लेकर मतभेद है. लेकिन सारे लिंगायत खुद को वीरशैव नहीं मानते. वो लिंगायत कहलाना ही पसंद करते हैं. सारा मामला पहचान का है और कोई अपनी पहचान से समझौता नहीं करना चाहता.

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