स्वास्थ्य समाचार

खासी का काढ़ा

खासी का काढ़ा

दवा लेने से फायदा तो तुरंत हो जाता है लेकिन इन दवाओं के कई साइड इफेक्ट भी होते हैं। वैसे भी हर बार दवा लेना सही नहीं है। बेहतर यही होगा कि सर्दी-खांसी के लिए घरेलू उपाय आजमाए जाएं। इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है और सर्दी जड़ से दूर हो जाती है।

सामग्री: 
साफ पानी 
काली तुलसी की पत्ती 
लौंग 
काली मिर्च 
छोटी इलायची 
अदरक 
गुड़ 
चायपत्ती 

स्पर्म काउंट कितना होना चाहिए

स्पर्म काउंट कितना होना चाहिए

आपको बता दें कि स्वस्थ पुरुष के वीर्य या सीमेन में 40 मिलियन से 300 मिलियन के बीच में स्पर्म प्रति मिलिलीटर होना चाहिए। यदि स्पर्म प्रति मिलिलीटर 10 मिलियन से 20 मिलियन के बीच है तो इसे खराब यानि लो स्पर्म काउंट माना जाता है। यदि स्पर्म हेल्दी है तो प्रेग्नेंसी के लिए 20 मिलियन स्पर्म प्रति मिलिलीटर पर्याप्त हो सकता है।

लो स्पर्म काउंट के नुकसान

 

जानिए अनार का जूस पीने के और अनार को खाने के फायदे

आज हम आपको बताने जा रहे है अनार के बारे में जिसके खाने के अनेक फायदे है वैसे अनार का नाम आते ही हम सबके जह्न में यही कहावत याद आती हे की ‘एक अनार सो बीमार’। हम सभी लोग जानते हैं कि अनार और अनार का ज्यूस स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। नियमित रुप से इसका सेवन करने से सिर्फ खून बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि रूप निखारने के लिए भी काम करता हे

अनार में उच्च मात्रा में Vitamin A, E और C होता है. ये Vitamin बढ़ती उम्र के लक्षणों को जल्दी आने से रोकते हैं ये त्वचा की महीन रेखाओं और झुर्रियों को जल्दी आने से रोकता है।

सुपारी के सेवन से किया जा सकता है पागलपन को कम

पान का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सुपारी आपके स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है. सुपारी पेट से जुड़ी समस्याओं जैस गैस, सूजन, कब्ज, पेट के कीड़े आदि के इलाज के लिए बहुत कारगर होती है.

पान का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सुपारी आपके स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है. सुपारी पेट से जुड़ी समस्याओं जैस गैस, सूजन, कब्ज, पेट के कीड़े आदि के इलाज के लिए बहुत कारगर होती है.

हर 4 में से 1 भारतीय बच्चे को है डिप्रेशन!

आज विश्व स्वास्थ्य दिवस यानी वर्ल्ड हेल्थ डे है. विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO की स्थापना के उपलक्ष्य में हर साल 7 अप्रैल को मनाए जानेवाले इस दिन हर वर्ष स्वास्थ्य से संबंधित एक थीम का चयन किया जाता है. इस साल वर्ल्ड हेल्थ डे की थीम है डिप्रेशन. प्रस्तुत हैं डिप्रेशन से संबंधित WHO की ताज़ा रिपोर्ट की ख़ास बातें.  

स्मार्टफोन का बुरा असर

स्मार्टफोन का छात्रों पर बढ़ता प्रभाव, मोबाइल से क्या नुकसान, मोबाइल के हानिकारक प्रभावों, ज्यादा मोबाइल चलाने से क्या होता है, नवजात शिशु के पास मोबाइल फोन का उपयोग, मोबाइल फोन के स्कूल में अनुमति दी जानी चाहिए, स्मार्ट फोन के नुकसान, मोबाइल का बच्चों पर पड़ता दुष्प्रभाव

इस रिसर्च पेपर ने अंदेशा जताया है कि एलईडी लाइट्स के बढ़ते इस्तेमाल का दिमाग़ी तौर पर बीमार लोगों के इलाज पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. इसी तरह, अगर सेहतमंद लोगर वो मोबाइल या दूसरे तरह के डिजिटल ऐप के ज़रिए अपनी सेहत की निगरानी करते हैं. जैसे कि मूड में बदलाव, या ब्लड प्रेशर नापना और अगर वो ये काम सोने से ठीक पहले करते हैं. तो, इसका बुरा असर उनकी नींद पर पड़ता है. उनकी बॉडी क्लॉक गड़बड़ हो जाती है. इसका उनकी सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव होता है.

'सोने के पहले न देखें फोन'

रात को सोते समय क्या करना चाहिए, रात को सोने से पहले क्या करना चाहिए

नीली रोशनी के हमारे ऊपर असर को लेकर पहले भी रिसर्च हुई हैं. ये रिसर्च बताती हैं कि नीली रोशनी की वजह से हमारे शरीर को नींद की याद दिलाने वाले केमिकल मेलाटोनिन का रिसाव रुक जाता है. इससे हमारी नींद पर प्रभाव पड़ता है. नींद न आने से हमारी 'क्वालिटी ऑफ़ लाइफ़' गिरती है. दिमाग़ी सेहत बुरी होती जाती है.

हमारे दिमाग़ी तौर पर बीमार होने का ख़तरा बढ़ जाता है. बच्चों और किशोरों में नींद न आने या बेवक़्त आने पर हुई रिसर्च बताती हैं कि इसक सीधा ताल्लुक़, उनके डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल से है. मसलन, कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्टफ़ोन.

बाइपोलर डिस-ऑर्डर को न्योता?

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण, बाइपोलर डिसऑर्डर क्या है, बाइपोलर डिसऑर्डर के घरेलू उपाय, बाइपोलर मीनिंग इन हिंदी, मूड डिसऑर्डर

इस पेपर में मनोचिकित्सकों ने नीली रोशनी के हमारी नींद और शरीर की अंदरूनी घड़ी पर पड़ने वाले बुरे असर के प्रति आगाह किया था. हम जिस तरह से अपनी सेहत के लिए डिजिटल ऐप और दूसरी मशीनें इस्तेमाल कर रहे हैं, इससे किशोरों और युवाओं में एलईडी लाइट्स के कई बुरे प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.

नीली रोशनी के ख़तरे?

पेरिस से लेकर ब्रुकलिन तक स्थानीय परिषदों और निकायों ने ज़्यादा बिजली खाने और गर्मी पैदा करने वाले पीले सोडियम बल्बों की जगह एलईडी बल्ब लगाने का अभियान छेड़ रखा है. एलईडी बल्ब में एक डायोड होता है, जिससे नीली रोशनी निकलती है. ये पुराने बल्बों की पीली रोशनी के मुक़ाबले आंखों को चुभने वाली हो सकती है.

स्मार्टफ़ोन बिगाड़ रहा है आंखों की सेहत

स्मार्टफ़ोन बिगाड़ रहा है आंखों की सेहत

स्मार्टफ़ोन अब स्मार्टनेस का स्टेटस सिंबल बन चुका है. लेकिन यही स्मार्टफ़ोन अब धीरे-धीरे आंखों के स्मार्टनेस को ख़त्म करने का कारण भी बनता जा रहा है.

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक़, अंधेरे में स्मार्टफ़ोन का उपयोग करने से आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगती है. रिपोर्ट के अनुसार दो महिलाओं में इसके लक्षण भी देखे गए जो इन दिनों स्मार्टफ़ोन ब्लाइंडनेस से पीड़ित हैं.

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