अब लीजिए दिमाग़ का बैक-अप

अब लीजिए दिमाग़ का बैक-अप

इंसान सदियों से गुफ़ाओं की दीवारों पर चित्र उकेरकर अपनी यादों को विस्मृत होने से बचाने की कोशिश कर रहा है.

पिछले काफ़ी समय से मौखिक इतिहास, डायरी, पत्र, आत्मकथा, फ़ोटोग्राफ़ी, फ़िल्म और कविता इस कोशिश में इंसान के हथियार रहे हैं.

आज हम अपनी यादें बचाए रखने के लिए इंटरनेट के पेचीदा सर्वर पर - फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, जीमेल चैट, यू-ट्यूब पर भी भरोसा कर रहे हैं.

ये इंसान की अमर बने रहने की चाह ही हो सकती है कि इटर्नी डॉट मी नाम की वेबसाइट तो मौत के बाद लोगों की यादों को सहेज कर ऑनलाइन रखने की पेशकश करती है.

लेकिन आपको किस तरह से याद किया जाना चाहिए?

अब तो ये भी संभव है कि हमारी आने वाली पुश्तों के लिए हमारे दिमाग को संरक्षित करके रखा जा सके.

मतलब ये कि यदि आपके ब्रेन को हार्ड ड्राइव पर सेव करना संभव हो, तो क्या आप ऐसा करना चाहेंगे?

दादी ने सहेजना बंद किया

अपनी मृत्यु से कुछ महीने पहले, मेरी दादी ने एक फ़ैसला किया. उन्होंने 1950 के दशक से परिवार के सदस्यों के फ़ोटो, दादा को लिखे प्रेम पत्र और कई और चीज़ों को संभालकर रखा था.

पर मृत्यु से कुछ महीने पहले, इन यादों को सहेजने की बजाय उन्होंने इन्हें साझा करना शुरु कर दिया. मैं जब उन्हें मिलकर आती तो मेरी कार में उनकी भीगी और पुरानी किताबें, शीशे के खाली जार, धुँधलाते पुराने फ़ोटोग्राफ्स भरे होते थे.

अपने अनुभवों से भरे पत्र उन्होंने अपने बच्चों, पोते-पोतियों और मित्रों को भेज दिए. जिस रात उन्होेंने अंतिम सांस ली, उससे पहले की दोपहर को उन्होंने अपने स्वर्गीय पति के एक घनिष्ठ मित्र को डाक से एक पत्र और कुछ फ़ोटो भेजे और लिखा - “ये फ़ोटो आपके पास अवश्य होने चाहिए.” यह एक मांग थी, पर एक आग्रह भी था.

आज हम अपनी यादों का संग्रहण और रक्षण पहले के मुक़ाबले कहीं ज्यादा व्यापक रूप से करते हैं.

क्या यह पर्याप्त है? हम उसे सेव करते हैं जिसे महत्वपूर्ण समझते हैं. लेकिन क्या होगा अगर हम उसे खो दें जो महत्वपूर्ण है? या, क्या होगा जब हमारे शब्दों और चित्रों के ज़रूरी संदर्भ खो जाएँ?

आपके दिमाग़ की हू-ब-हू कॉपी

क्या सब कुछ सेव करना कितना बेहतर होगा? न सिर्फ कुछ लिखे हुए विचारों को, बल्कि पूरे मस्तिष्क को, हर उस चीज़ को जिसे हम जानते हैं और जो हमें याद है, हमारे प्रेम-प्रसंग और दिलों का टूटना, विजयी और शर्मनाक क्षण, हमारे झूठ और सच.

ये सवाल कुछ लोग हमसे जल्द पूछेंगे. ये वो इंजीनियर हैं जो ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जो हमारे दिमाग़ और याददाश्त की हू-ब-हू कॉपी बनाकर रख पाएँगे.

अगर वो सफल रहे, तो क्या मौत से हमारा संबंध ही हमेशा के लिए बदल जाएगा?

सेन फ्रांसिस्को के एरोन सनशाइन की दादी का हाल ही में निधन हुआ. 30 वर्षीय सनशाइन कहते हैं, “मुझे ये बात खटकी कि उनके पीछे उनकी कुछ ही यादें रह गई हैं. उनकी टी-शर्ट, जो मैं कभी-कभी पहनता हूँ, उनकी संपत्ति है पर वो तो किसी भी डॉलर के नोट के समान है...”

उनकी मौत ने सनशाइन को इटर्नी डॉट मी वेब सर्विस में साइनअप करने के लिए प्रेरित किया.

इस वेब सर्विस का दावा है कि ये आपकी याद को मृत्यु के बाद ऑनलाइन कायम रखेगी.

जब तक आप ज़िंदा हैं तब तक आप इसे अपने फ़ेसबुक, ट्विटर और ईमेल तक पहुँचने की इजाज़त देते हैं, फ़ोटो अपलोड करते हैं और यहाँ तक कि गूगल ग्लास से उन चीजों की रिकॉर्डिंग भी दे सकते हैं जिन्हें आपने देखा है.

वो इस तरह आपके बारे में डेटा का संग्रह करते हैं, उसको फिल्टर करते हैं और फिर उस अवतार को ट्रांस्फ़र कर देते हैं जो आपके चेहरे के लुक और आपके व्यक्तित्व की नकल करता है.

आपका अवतार

जीते जी आप अवतार से जितनी ज़्यादा बात करते हैं, वह आपके बारे में उतना ही ज़्यादा जान पाता है. समय बीतने के साथ वह आपकी पर्सनेलिटी को अपना लेता है.

इटर्नी डॉट मी के सह संस्थापकों में से एक मारियस उर्साच का कहना है, “उद्देश्य एक ‘इंटरएक्टिव लेगेसी’ तैयार करने और भविष्य में पूरी तरह भुला दिए जाने से बचना है. आपकी नाती-पोते के भी नाती-पोते आपके बारे में जानने के लिए किसी सर्च इंजन या टाइमलाइन का प्रयोग करने के बजाय इसका प्रयोग करेंगे."

इटर्नी डॉट मी और इसी तरह की अन्य सेवाएं समय बीतने के साथ-साथ खो जाने वाली यादों को सहेजने का तरीका इजाद कर रहे हैं.

गूगल, यूएस, ईयू, ऑक्सफ़ोर्ड...

हमें डिजिटल फॉर्म में क्या रखना है और क्या छोड़ना है, इसके चुनाव में सिर खपाने से क्या ये बेहतर न हो कि मस्तिष्क की विषय वस्तु को ही पूरी तरह रिकॉर्ड कर लिया जाए?

यह काम न तो विज्ञान की काल्पनिक कथा की परिधि में आता है और न ही यह अति महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक कार्य है.

सैद्धान्तिक रूप से, इस प्रक्रिया की सफलता के लिए तीन महत्वपूर्ण बातें जरूरी हैं.

वैज्ञानिकों को सबसे पहले यह पता लगाना पड़ेगा कि मरने के बाद किसी के मस्तिष्क को बचाकर रखा जाए कि वह नष्ट न हो.

दूसरा, इस मस्तिष्क में मौजूद विवरणों का विश्लेषण और उसकी रिकॉर्डिंग ज़रूरी होंगे.

और अंततः इस तरह इंसानी दिमाग़ के अंदर की बातों को “कैप्चर” करने के बाद सिम्यूलेशन से इसी तरह के दिमाग़ का निर्माण.

इसके लिए ज़रूरी है कि पहले एक कृतिम मानव दिमाग़ बनाया जाए. जिसमें याददाश्त के बैकअप को 'रन' किया जा सके.

यूएस ब्रेन प्रौजेक्ट, ईयू ब्रेन प्रौजेक्ट लाखों न्यूरॉन्स से दिमाग़ में होने वाली हरकतों को रिकॉर्ड कर इसके मॉडल तैयार कर रहे हैं.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के फ्यूचर ऑफ ह्यूमैनिटी इन्स्टीच्यूट से जुड़े एंडर्स सैंडबर्ग के 2008 में लिखे शोध पत्र ने इन प्रयासों को सीढ़ी बताया है.

उन्होंने कहा कि यह इंसानी मस्तिष्क का पूर्ण तरीके से अनुकरण करने की दिशा में महत्वपूर्ण है.

गूगल ने ब्रेन एम्यूलेशन के क्षेत्र में ख़ासा पूँजी निवेश किया है और रे कुर्ज़वेल को गूगल ब्रेन प्रौजेक्ट का निदेशक बनाया है.

वर्ष 2011 में एक रूसी उद्यमी दिमित्री इत्स्कोव ने "2045 इनिशिएटिव" शुरु किया.

ये नाम रे कुर्जवेल की इस भविष्यवाणी पर आधारित था कि वर्ष 2045 में हम अपने दिमाग़ का क्लाउड तकनीक पर बैक-अप बना पाएंगे.

मेमोरी डंप

इंसानी दिमाग़ की नकल करना एक बात है और याददाश्त का डिजिटल रिकॉर्ड बनाना दूसरी बात.

यह साधारण सी प्रक्रिया उपयोगी होगी कि नहीं इस बारे में सैंडबर्ग थोड़े आशंकित हैं.

सैंडबर्ग कहते हैं, "यादें कम्यूटर में सफ़ाई से उन फाइलों की तरह स्टोर नहीं की जातीं, जिनको हम एक इंडेक्स के माध्यम से खोज सकें."

एक समस्या यह भी है कि किसी व्यक्ति के दिमाग़ से उसकी याददाश्त को निकालने की प्रक्रिया को, दिमाग़ को क्षति पहुंचाए बिना कैसे अंजाम दिया जाए.

सैंडबर्ग का कहना है कि दिमाग़ को क्षति पहुंचाएं बिना इसको स्कैन कर पाएँगे, इस बारे में शक़ है.

पर वे इस बात से सहमत हैं कि अगर हम सिम्यूलेटिड दिमाग़ को पूरी तरह से 'रन' कर पाते हैं तो किसी व्यक्ति विशेष की यादों का डिजिटल अपलोड संभव है.

इसके नैतिक और नीतिगत मुद्दों पर भी ग़ौर करना पड़ेगा. जैसे वॉलाटियर्स का चुनाव, विशेषकर तब जब स्कैनिंग से शरीर को क्षति पहुँच सकती हो. नए तरह के अधिकारों की भी बात उठेगी.

परिसंपत्ति क़ानून

किसी व्यक्ति की निजता की सीमाएँ क्या हैं और उसकी विशेष यादों के स्वामित्व का मामला भी जटिल है.

अपने आत्मलेख में आप अपनी किन यादों को रिकॉर्ड करना चाहते हैं इसका चुनाव आप कर सकते हैं.

अगर आपकी किन यादों तक कोई पहुँच सकता है, यह तय करने की आप में क्षमता ही नहीं है तो यह एक बहुत ही अलग तरह का मामला बन जाता है.

और फिर यह सवाल कि क्या किसी 'एम्यूलेटिड दिमाग़' को हम इंसान मान सकते हैं?

असमंजस कायम

मैं सनशाइन से पूछता हूं कि वह क्यों अपने जीवन को इस तरह रिकॉर्ड कराना चाहते हैं?

वह कहते हैं, "सच पूछो तो मुझे पता नहीं है. मेरी जिंदगी के जो यादगार लम्हे हैं वो हैं दावतें, संभोग, दोस्ती का आनंद. और इनमें सब इतने क्षणिक हैं कि इनको किसी सार्थक तरीके से संरक्षित नहीं किया जा सकता.

सनशाइन कहते हैं, "मेरा एक मन चाहता है मेरे लिए कोई स्मारक हो और दूसरा कहता है पूरी तरह से बिना कोई निशान छोड़े गायब हो जाऊं."

मुझे लगता है कि हम सब इसी तरह से सोचते हैं.

शायद हम सभी यही चाहते हैं कि हमारे बारे में वो याद रखा जाए जो याद रखने लायक है. बाक़ी को छोड़ देना ही बेहतर है.

Health: 

New Health Updates

Icon Total views
Three cups of Coffee may prevent heart attacks हार्ट अटैक से बचना है तो रोज़ पीजिये 3 से 5 बार कॉफी: शोध 1,164
स्किन कैंसर से नहीं बचा सकते सन्सक्रीन स्किन कैंसर से नहीं बचा सकते सन्सक्रीन 173
श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक इलाज श्वेत प्रदर का आयुर्वेदिक इलाज 448
चमकती हुई त्वचा के लिए हर्बल ब्यूटी टिप्स चमकती हुई त्वचा के लिए हर्बल ब्यूटी टिप्स 1,919
इडली को क्‍यूं माना जाता है वर्ल्‍ड का बेस्‍ट ब्रेकफास्‍ट इडली को क्‍यूं माना जाता है वर्ल्‍ड का बेस्‍ट ब्रेकफास्‍ट 204
खुश रहने के लिये खूब खाएं फल और सब्‍जियां खुश रहने के लिये खूब खाएं फल और सब्‍जियां 1,057
शोरगुल से बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा शोरगुल से बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा 885
कॉफी बना सकता है आपको बहरा कॉफी बना सकता है आपको बहरा 977
एरोबिक एक्‍सरसाइज हार्टफेल से बचाएगा एरोबिक एक्‍सरसाइज 975
शयनकक्ष में बहुत रोशनी बढ़ा सकती है मोटापा शयनकक्ष में बहुत रोशनी बढ़ा सकती है मोटापा 127
तुलसी का काढ़ा फायदा ही फायदा तुलसी का काढ़ा फायदा ही फायदा 359
गर्मियों में हृदय को दे सुरक्षा गर्मियों में हृदय को दे सुरक्षा 155
ब्‍लड ग्रुप के अनुसार कैसा होना चाहिये आपका आहार ब्‍लड ग्रुप के अनुसार कैसा होना चाहिये आपका आहार 307
हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी का प्रयोग। हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी का प्रयोग। 195
प्राकृतिक चिकित्सा प्राकृतिक चिकित्सा 176
सावधान! प्रेग्नेंट हैं, तो दूर रहें माइक्रोवेव और मोबाइल से 164
मोती जैसे सफेद दांत पाने के लिए ट्राई करें ये 5 घरेलू उपाय मोती जैसे सफेद दांत पाने के लिए ट्राई करें ये 5 घरेलू उपाय 512
इस पॉपुलर डाइट का सेवन करने वाले लोग हो सकते हैं अंधे, जानिए बचने के उपाय 118
क्यों रहते हैं हाथ-पैर ठंडे? क्यों रहते हैं हाथ-पैर ठंडे? 258
माइग्रेन के दर्द से बचाता है ये आहार माइग्रेन के दर्द से बचाता है ये आहार 241