काफी खतरनाक है हाइपोग्लाइसीमिया, इसकी मार से रहें सजग

हाइपोग्लाइसीमिया

जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर 60 ‘एम.जी. / डी.एल.Ó से कम हो जाता है, तो यह स्थिति हाइपोग्लाइसीमिया कहलाती है और 40 ‘एम.जी./ डी.एल.Ó से कम होने पर गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं…

 भोजन के बाद ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है फिर करीब 4 से 6 घंटे बाद घटने लगता है। यदि फिर से भोजन नहीं किया गया, तो कुछ व्यक्तियों में इसका स्तर सीमा से अधिक कम हो जाता है और सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, थकान, आंखों के सामने अंधेरा छाना आदि समस्याएं होने लगती हैं। उपवास रखने पर सजगताएं न बरतने पर हाइपोग्लाइसीमिया से ग्रस्त होने की आशंका रहती है। शराब सेवन विशेष रूप से खाली पेट पीने से भी अचानक रक्त ग्लूकोज स्तर के कम होने की आशंका रहती है। मधुमेह के मरीजों में शराब के कारण दुष्परिणाम होने की ज्यादा आशंका रहती है। कुछ दवाओं के सेवन से भी रक्त में ग्लूकोज कम होने का खतरा होता है । भोजन समय से नहीं करने, खाली पेट व्यायाम करने से हाइपोग्लाइसीमिया की समस्या पैदा हो सकती है।

लक्षण

हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण विविधतापूर्ण होते हैं। अनेक व्यक्तियों में तो इसका पूर्वाभास हो जाता है। रक्त में ग्लूकोज के स्तर का कम होना शरीर के लिए तनाव की स्थिति जैसा है। इस कारण एड्रीनेलीन नामक हार्मोन का सा्रव बढ़ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर का रंग सफेद या पीला हो जाता है। अत्यधिक पसीना आता है। हाथों में कंपन होता है, भूख लगती है और बेचैनी महसूस होती है। हृदयगति बढ़ जाती है। हृदय के तेजी से धड़कता महसूस होने से मरीज घबरा जाते हैं। रक्त में ग्लूकोज की कमी से सर्वप्रथम मस्तिष्क की कार्यप्रणाली गड़बड़ा जाती है। मरीर को सिरदर्द होता है। चक्कर आते हैं और वे अनिर्णय की स्थिति में रहते हैं, वे भ्रमित रहते हैं। उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है और अंत में मरीज बेहोश हो जाते हैं। समय से समुचित उपचार उपलब्ध न होने पर मौत हो सकती है।

बचाव

-नियमित अंतराल पर रक्त ग्लूकोज(ब्लड शुगर) की जांच करानी चाहिए। दवाओं या इंसुलिन की मात्रा को रक्त ग्लूकोज के स्तर के अनुसार डॉक्टर के परामर्श से निर्धारित करना चाहिए

-मधुमेह रोगियों को रक्त ग्लूकोज स्तर की कमी से बचाव के लिए थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में कई बार हल्का आहार ग्रहण करना चाहिए।

-मधुमेह के कुछ मरीज भूख से ज्यादा भोजन कर लेते हैं और फिर मनमर्जी से दवा या इंंसुलिन की मात्रा बढ़ा लेते हैं, जिससे शुगर के अनियंत्रित होने की आशंका बढ़ जाती है।

-गर्भवती महिलाएं यदि मधुमेह से ग्रस्त हैं, तो उनके लिए उपवास वर्जित है।

-ऐसे मरीज खाली पेट व्यायाम नहीं करें। व्यायाम करने से पूर्व भरपेट जल पिएं।

-मधुमेह के मरीजों को सदैव अपने पास शर्करा युक्त खाद्य पदार्थ रखना चाहिए। हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण महसूस होते ही तुरंत इनका सेवन करें। पहले करीब 15 से 20 ग्राम (3 से 4 छोटी चम्मच) शुगर या ग्लूकोज का सेवन करें। दस मिनट बाद यदि राहत नहीं मिलती तो पुन: इतनी मात्रा और लें।

-मधुमेह रोगियों को सदैव एक पहचान पत्र रखना चाहिए। इस पहचान पत्र में उनका नाम, पता, टेलीफोन नंबर, डॉक्टर का नाम, रोग और दवा का विवरण दर्ज होना चाहिए ताकि घर के बाहर समस्या पैदा होने पर समुचित उपचार शीघ्र ही मिल सके।

उपचार

हाइपोग्लाइसीमिया का अगर अतिशीघ्र निदान और उपचार नहीं किया गया, तो इलाज में देरी होना मौत का कारण बन सकता है। यदि मरीज होश में हो, तो उसे पर्याप्त मात्रा में शर्करायुक्त भोजन, शर्बत, चीनी का घोल या ग्लूकोज दिया जाना चाहिए। इनसे तुरंत ही मरीज बेहतर महसूस करने लगता है।

यदि मरीज बेहोश हो गया है, तो उसे ग्लूकोज का घोल ड्रिप के जरिये चढ़ाया जाता है। यदि मधुमेह का पुराना मरीज बेहोश हो जाता है, तो यह समस्या रक्त में ग्लूकोज के कम या अधिक होने के कारण हो सकती है प्राथमिक उपचार के रूप में उसे ग्लूकोज का घोल देना चाहिए। यदि मरीज हाइपोग्लाइसीमिया से ग्रस्त है, तो उसे तुरंत होश आ जाता है।

(डॉ.विनोद गुजराल मधुमेह रोग विशेषज्ञ, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली)

 

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