किडनी रोग का आयुर्वेदिक उपचार

किडनी रोग का आयुर्वेदिक उपचार

1. कासनी नाम का पौधा आयुर्वेदिक गुणों से परिपूर्ण है। इसकी पत्तियाँ किडनी, डायबिटीज़, लीवर और बवासीर जैसी बीमारियों के उपचार में रामबाण का काम करती हैं। ये हर्बल प्लांट आपको घर के पास की नर्सरी में मिल जाएगा। किडनी रोग का उपचार करने के लिए रोज़ आपको इसकी कुछ पत्तियाँ चबानी चाहिए। इस पौधे का वैज्ञानिक नाम सिकोरियम इंटिबस _ Cichorium Intybus है।
2. नीम की छाल,पीपल की छाल,पुनर्नवा की जड़,शीशम की छाल सभी10-10 ग्राम लीजिये और 400 ml पानी लीजिये सभी छालों को लेकर 400 ml पानी धीमी आग पर पकाएं और 150 ml रहने तक पायें जब पानी 150 ml रह जाये तो उससे ठंडा कर लीजिये और फिर छान लीजिये और कांच या चीनी मिटटी के वर्तन मैं रख लीजिये इस तरह आपकी दवा तैयार हो जाती है|इस काडे को आपको daily सुबह बनाना है और सुबह खाना खाने के बाद 50 ml लेना है इसी तरह दोपहर को कुछ खाने के बाद 50 ml लेना है और शाम को भी खाना खाने के बाद 50 ml लेना है| इस प्रयोग से आपको 10-15 दिन मैं creatinine,blood urea नार्मल हो 
3. 10 ग्राम पीपल की छाल और 10 ग्राम नीम की छाल को 3 गिलास पानी में तब तक उबालिए, जब तक पानी आधा न रह जाए। फिर इसे ठंडा करके छान लीजिए। आपको इसका एक चौथाई भाग दिन में 3-4 बार पीना है। इस उपचार को एक हफ़्ता करने से क्रीअटनीन _ Creatinine कंट्रोल में आ जाता है।
4. सेब का सिरका: एप्पल साइडर सिरका का उपयोग किडनी के इंफेक्शन से राहत दिलाता है। एक गिलास पानी में दो चम्मच एप्पल साइडर सिरका मिलाकर दिन में दो बार लें। एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण यह गुर्दे में इंफ़ेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया का अंत करता है। सेब का सिरका पथरी को भी धीरे धीरे गला देता है। इसके अलावा एप्पल साइड विनेगर उन हानिकारक तत्वों को किडनी से बाहर निकालता है, जिनसे नुक़सान हो सकता है।
5. 4 लीटर पानी में 250 ग्राम गोखरू कांटा एक चौथाई भाग रह जाने तक उबालिए, ठंडा होने दीजिए और छानकर एक बोतल में भर लीजिए। इसे 100 मिली सुबह शाम खाली पेट पीना चाहिए। काढ़ा पीने के एक घंटे तक कुछ खायें पिएं नहीं। जो लोग एलोपैथिक इलाज करवा रहे हैं, वो अपनी दवाइयाँ समय पर लेते रहें। अगर डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह है, तो इसक प्रयोग को अवश्य आज़माना चाहिए। गोखरू में वो गुण है जो ट्रांसप्लांट की नौबत से किसी को भी बचा सकता है। गोखरू कांटा आप पंसारी की दुकान ख़रीद सकते हैं और दो हफ़्ते प्रयोग करने बाद आपको चमत्कारिक बदलाव दिखने शुरु हो जाएंगे।
6. बेकिंग सोडा
ब्रिटिश वैज्ञानिकों के अनुसार सोडियम बाइ कार्बोनेट किडनी रोग में लाभदायक होता है। यह रक्त में एसिडिटी को कम करता है, जिससे गुर्दे की बीमारी हो सकती है।
7. सब्ज़ियों का जूस
गुर्दे में कोई परेशानी होने पर लौकी, खीरा, गाजर और पत्ता गोभी का रस पीना अत्यंत लाभकारी है। इसके अलावा तरबूज़ और आलू का रस भी काफ़ी फ़ायदेमंद रहता है। जल्दी राहत पाने के लिए दिन में दो बार सब्ज़ियों का जूस पीना चाहिए।
8. मुन्नका का पानी
रोज़ रात सोने से पहले कुछ मुन्नके पानी भिगो दें और सुबह उसका पानी पी जाएँ। भीगे मुन्नके खाने की ज़रूरत नहीं है। कुछ दिन में आपको फ़ायदा नज़र आने लगेगा।
9. पानी की मात्रा
गुर्दों को स्वस्थ रखने के लिए ज़रूरी है कि आप ज़्यादा से ज़्यादा टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकाल दीजिए। इसके लिए आपको सिर्फ़ दिन में 4 लीटर या उससे अधिक पानी पीने की ज़रूरत है। आप कभी कभार नींबू पानी में ले सकते हैं। इससे किडनी के लिए आवश्यक वाइटमिन सी प्राप्त हो जाएगा।
• प्रतिदिन तीन टुकड़े कच्ची लहसुन के चबाएं, जब तक कि इंफेक्शन दूर न हो जाएं। (इंफेक्शन का प्रभाव कम न हो जाएं)
• हल्दी किडनी के संक्रमण को दूर करने का एक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक उपाय है। हमेशा अपने खाने में हल्दी डालें एवं एक गिलास गर्म दूध में प्रतिदिन आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीएँ।
• जब कोई व्यक्ति इसे किडनी इंफेक्शन के लिए उपयोग में लेता है, तो यह किडनी में बनने वाले बैक्टीरियल मेटाबॉलिज्म से छुटकारा दिलाती है। उबलते पानी में कटा हुटा अजवाइन डालें। 5 मिनिट तक अच्छे से उबालने के बाद इस अजवाइन जूस को दिन में दो या तीन बार पीएं।
• अदरक वाली चाय पीने से गुर्दे के संक्रमण में राहत मिलती है। लगभग 1 चम्मच बारीक कटी हुई अदरक गर्म पानी में डालें (करीब 15 मिनट तक) यह गर्म अदरक की चाय पीएँ।

 

 

 

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