गन्ने के जूस के फायदे

गन्ने का रस
गन्ने का रस, गन्ने का सबसे शुद्ध उत्पाद है। गन्ने के रस में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, पोटैशियम, सोडियम, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम होने के कारण यह एक अच्छा एनर्जी ड्रिंक है। यह एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है और शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने और संक्रमण से लड़ने में सहायता करता है। कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होने के कारण यह शरीर में पानी के स्तर को कम नहीं होने देता और डीहाइड्रेशन से बचाता है। यह शरीर में प्रोटीन के स्तर को बढ़ा देता है, जिससे संक्रमणों से लड़ने में सहायता मिलती है।
जिन लोगों को कब्ज की समस्या है, उन्हें गन्ने के रस का सेवन करना चाहिए। यह बाउल मूवमेंट को ठीक करता है और कब्ज में आराम पहुंचाता है। यह अल्कलाइन (क्षारीय) होता है, इसलिए एसिडिटी और पेट की जलन में काफी कारगर है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इसलिए इसके सेवन से रक्त में शुगर का स्तर तेजी से नहीं बढ़ता।

व्हाइट शुगर 
सफेद चीनी को रिफाइंड शुगर भी कहा जाता है। इसे रिफाइन करने के लिए सल्फर और दूसरे रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। रिफाइनिंग के बाद इसमें मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स, प्रोटीन्स, एंजाइम्स और दूसरे लाभदायक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, केवल ग्लूकोज ही बचता है। सफेद चीनी में 99.96  प्रतिशत ग्लूकोज होता है। अधिकतर लोग चीनी को जहर मानते हैं। इसे सेहत के लिए इतना नुकसानदेह माना जाता है कि संतुलित और पोषक भोजन में इसे शामिल नहीं किया जाता।
लेकिन इसे लेकर बहुत सारे मिथ भी प्रचलित हैं। एक ग्राम चीनी में 4 कैलोरी होती है, जबकि एक ग्राम वसा में 9 कैलोरी होती है। इसलिए वसा इसकी तुलना में अधिक मोटापा बढ़ाती है। अगर चीनी को संतुलित मात्रा में खाया जाए तो हमारा शरीर इसे आसानी से पचा लेता है। इससे अनाज अधिक स्वादिष्ट और ऊर्जा के स्त्रोत हो जाते हैं, क्योंकि यह कार्बोहाइड्रेट होती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) के अनुसार, जिन लोगों को डायबिटीज नहीं है, वे चीनी की कुछ मात्रा अधिकतम रूप से खा सकते हैं। यह मात्रा  व्यक्ति विशेष के लिए अलग-अलग हो सकती है। अगर आप स्वस्थ, पतले और सक्रिय हैं तो एक सीमित मात्रा में चीनी का सेवन करने से कोई नुकसान नहीं होगा। आपका शरीर इसे आसानी से पचा लेगा, लेकिन यह भी सच है कि चीनी खाने से कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं होता। 

ब्राउन शुगर
इसे खंडसारी या अनरिफाइंड शुगर भी कहते हैं। यह भी सुक्रोज ही होती है, लेकिन इसमें सफेद चीनी की तुलना में मिनरल्स की मात्रा थोड़ी अधिक होती है। गन्ने के रस को क्रिस्टलीकरण करके इसका निर्माण किया जाता है। इसमें मोलेसेस (4-10 प्रतिशत) होता है, इसलिए इसका रंग ब्राउन होता है। ब्राउन शुगर या तो अनरिफाइंड या आंशिक रूप से रिफाइन होती है। इसमें कैलोरी की मात्रा भी रिफाइंड शुगर या सफेद चीनी से कम होती है। आयरन भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है और थोड़ी मात्रा में दूसरे मिनरल्स भी पाए जाते हैं। मोलेसेस के कारण इसका स्वाद भी थोड़ा अलग होता है।

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