चिकनपॉक्स (छोटी माता): घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

चिकनपॉक्स (छोटी माता): घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

चेचक एक वायरल संक्रमण (viral infection) है जिससे शरीर पर छाले की तरह दाने बनते हैं और उनमें खुजली (itching) होती है। चेचक ऐसे लोगों को ज्यादा होता है जो बीमार न पड़ते हों या जिन्होंने चेचक से बचने के लिए टीकाकरण न करवाया हो। पहले के समय में युवा होने तक हर कोई चेचक रोग से एक न एक बार जरूर प्रभावित होता था लेकिन आज के समय में इस तरह के रोगों में कमी आई है। ज्यादातर लोगों के लिए, चेचक एक हल्की बीमारी है। फिर भी, यह टीका लगाया जाना बेहतर है। चेचक के टीके चेचक और उसकी संभावित जटिलताओं को रोकने के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।

चेचक के लक्षण 

इनमें से कोई भी अवस्था होने पर चिकित्सक को दिखाएं-
– दानों का एक या दोनों आंखों में फैलना।
– दानों का बहुत अधिक लाल और सूजा हुआ दिखना, यह त्वचा के अन्य संक्रमण के लक्षण भी हो सकते हैं।
– दानों के साथ, चक्कर आना, दिल की धड़कनों का तेज होना, सांस तेजी से चलना, कांपना, मांसपेशियों में समन्वय के नुकसान की तकलीफ, बिगड़ती खांसी, उल्टी, गर्दन में अकड़न या बुखार तेज होना।
– घर में किसी को भी प्रतिरक्षा की कमी या 6 महीने से छोटा बच्चा होना ।

परहेज और आहार

लेने योग्य आहार

  • चूंकि भूख का न लगना चेचक की एक सामान्य लक्षण है, इससे आम तौर पर निर्जलीकरण भी हो जाता है। इस समस्या से बचने के लिए, और कुछ आवश्यक पोषक तत्वों को लेने के लिए, सुनिश्चित करें कि मरीज को प्रतिरक्षा को मज़बूत करने वाला ढेर सारा रस उसके शरीर को मिल रहा हो।
  • निश्चित रूप से, जब आप को चेचक हो तो फलों का सेवन बढा दें। जैसा कि बताया गया है, आपके शरीर को इस बीमारी से उभरने के लिए विषाणु से लड़ना और उसे मरना परता है! ये आपका कर्त्तव्य है की आप शरीर को पौष्टिक भोजन जैसे अंगूर, केले, सेब, खरबूजे आदि जैसे नरम फलों से पूरक करें। आप के मुँह और गले में फफोले हो सकते हैं जिससे अनार या नारंजी का सेवन दुःख दायक हो सकता हैं। इन फलों का मिल्कशेक या जूस बना लें और हर थोड़े थोड़े समय पे पीते रहें।
  • पूरे दिन दही की अच्छी मात्रा लें। न केवल दही कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स प्रदान करता है, यह त्वचा की अच्छी तरह से उपचार करने में भी मदद करता है।
  • सुबह सबसे पहले एक गिलास नर्म नारियल पानी पिये। यह भी महत्त्वपूर्ण विटामिन और खनिजों से भरा होता है, शून्य कैलोरी होने की वजह से ये शरीर को डंडा और प्रतीक्षा प्रणाली को मज़बूत बनता है।
  • दोपहर और रात्रिभोज दोनों के साथ एक कप दाल लें। टमाटर और नमक के साथ कुछ तूर या मूंग दाल को उबालें। अगर आप चाहें तो एक चुटकी हल्दी भी डाल सकते हैं। ताजी धनिया के पत्तों के साथ गार्निश करें और सूप की तरह लें।
  • संतरे और अन्य खट्टे फल प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए उत्कृष्ट हैं। रोज़ एक गिलास ओरेंज जूस स्वास्थ्य के लिए उचित माना जाता है। एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आपको जूस में मिलाय जाने वाले योजक (एडिटिव्स) से दूर रहना चाहिए। प्राकृतिक फल और सब्जी का रस इस समय आपके लिए सबसे अच्छा है।
  • ताजी सब्जियां और कच्चे फल लेना उचित है। तुलसी और कैमोमाइल जैसे हर्बल चाय भी इसमें मदद करती है। अन्य खाद्य पदार्थ जैसे गाजर, काजू, टोफू, अखरोट, अंडे, अदरक, लहसुन, चुकंदर और ब्लू बेरी भी इस में मददगार होते हैं। कच्चे फल और सब्ज़ी की सेवन करने की सलाह दी जाती है।
  • बहुत पानी वाले आहार का सेवन करने की सलाह भी दी जाती है क्योंकि शरीर इस तरह के आहार को आसानी से पचाने और उनमें पोषक तत्वों को आसानी से संसाधित कर देता है। ककड़ी, टमाटर, पालक तरबूज, कीवी, अंकुरित आहार, और पानी समृद्ध पदार्थ की श्रेणी में आते हैं।

इनसे परहेज करे

  • चेचक में डेयरी उत्पाद, मांस, रोटी या किसी अन्य प्रकार के भारी भोजन – जो पचाने में मुश्किल होते हैं – से परहेज़ करना चाहिए। प्रसंस्कृत (रिफाइंड) और जंक फूड से दूर रहें। शरीर को देने लायक उनमें कम या कोई पौष्टिक पदार्थ नहीं होते। रेड मांस और तले हुए भोजन या अन्य इसी तरह तैयार किए गए खाद्य पदार्थों से भी बचना चाहिए।
  • अपने भोजन में सख्ती से किसी तेल या मसाले का प्रयोग न करें। न ही स्वाद के लिए थोड़ा भी लाल मिर्च पाउडर का प्रयोग करें ये आपके मुंह और गले के फफोले को जला और खुजली उत्पन्न का सकता हैं।
  • चेचक में पाचन तंत्र आम तौर पर धीमा होता है और आपको चेचक के पहले कुछ दिनों में कुछ भी खाने का मन नहीं कर सकता है। इसलिए जी मिचलाना और उलटी से बचने के लिए तेल का इस्तेमाल न करें साथ ही सामान्य वसा-मुक्त खाद्य पदार्थों को पचाना भी आसान होता है और कोई अम्लता संबंधित समस्याएँ नहीं होती।
  • चेचक के दौरान मांस और अंडे से बचना अच्छा होता है। वे प्राकृतिक रूप से फैटी होते हैं और शरीर उन्हें आसानी से पचा भी नहीं पता।
  • अतिरिक्त शक्कर वाले खाद्य पदार्थों से बचे, या अधिक काबोर्हाइड्रेट वाले भोजन जैसे रोटी, पास्ता, कच्चा बादाम और बीज, क्योंकि ये इलाज को धीमा कर देता है।
  • संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थ सूजन पैदा कर सकते हैं, जो खीजे हुए क्षेत्र को ठीक होने में विलम्बित कर सकते हैं।

घरेलू उपाय (उपचार)

  • घाव को साफ रखें। खून बहना जब बंद हो जाये तो घाव को साफ़ पानी से अच्छी तरह धोएं। घाव के चारों ओर साबुन और एक साफ़ कपडे से साफ करें। यदि घाव में कुछ घुसा हुआ है, तो अपने डॉक्टर को दिखाए।
  • एंटीबायोटिक्स का उपयोग करें। घाव को साफ करने के बाद, एंटीबायोटिक्स क्रीम या मलहम की एक पतली परत लगाए। ये एंटीबायोटिक्स दवाइयां घाव को तेज़ी से ठीक तो नहीं करती, लेकिन वे जीवाणु वृद्धि और संक्रमण को आगे बढ़ने से रोक सकती हैं।
  • कुछ मलहम के कुछ घटक के कारण कुछ लोगों को हल्के दिदोरे हो सकते हैं। यदि दिदोरे दिखाई देते हैं, तो मरहम का उपयोग करना बंद कर दें।
  • घाव को ढक कर रखें। हवा लगने से घाव भरने में तेज़ी आ सकती है, लेकिन पट्टियां घाव को साफ रखती हैं और हानिकारक जीवाणुओं से बचाव करती हैं। बहते हुए फफोले में संक्रमण जल्दी होता है। उन्हें ढक कर रखें जब तक उन पे पपड़ी न जम जाए।
  • ड्रैसिंग बदले। एक दिन में कम से कम एक बार या जब भी ड्रैसिंग गीला या गंदे हो जाये को बदले इससे संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है। यदि आप को पट्टियों में इस्तेमाल किये जाने वाले गोंद से एलर्जी है तो गोंद-मुक्त पट्टियों या विसंक्रमित पट्टी और पेपर टेप का इस्तेमाल करें।
  • ख़ूब पानी पीजिये। चेचक में निर्जलीकरण महत्त्वपूर्ण लक्षणों में से एक है! सुनिश्चित करें कि पानी उबला हुआ और कमरे के तापमान पर ठंडा किया हो। किसी के साथ अपना ग्लास या पानी की बोतल साझा न करें।
  • छाले के बहार आते ही उन पे नारियल का तेल लगाए। चेचक के पस को उंगलियों पे लगने से बचने के लिए एक रुई की कली से छालों पे तेल लगाए।
  • खरोंच करते समय त्वचा में बैक्टीरिया को स्थनांतरित करने से बचने के लिए नियमित रूप से उँगली के नाखूनों को साफ़ और काट के रखें।
  • बेकिंग सोडा, समुद्री नमक या जड़ी बूटियों जैसे कैमोमाइल, जई, या आवश्यक तेलों जैसे लैवेंडर, चाय के पेड़ की कुछ बूंदों के साथ गुनगुने पानी से स्नान करें। सेब के सिरके को खुजली से तुरन्त राहत देने के लिए स्नान के पानी में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • एक कटा गाजर और एक कप कटा हुआ धनिया पत्ता को दो कप पानी में उबाल लें। पानी को छान लें और दिन में एक बार सूप के रूप में इसे पिये।
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