पीठ दर्द से मिलेगा तुरंत छुटकारा

पीठ दर्द से मिलेगा तुरंत छुटकारा

काम में ज्यादा व्यस्त होने के कारण पीठ दर्द, सरवाइकल, कमर दर्द आज के समय एक बड़ी समस्या बनकर उभर रही है। मांसपेशियों में अत्याधिक तनाव, जोड़ों में खिचाव, कैल्शियम की कमी, लगातार एक जगह बैठे रहना, कम्प्यूटर पर कई-कई घंटे काम करते रहना, व्यायाम न करना ये कुछ ऐसे कारण हैं जो आपकी पीठ और कमर दर्द की समस्या को और ज्यादा बढ़ाती है। अगर आप इस तरह की समस्या से पीड़ित हैं तो रोजाना मकरासन का अभ्यास करें। इससे आपको कमरदर्द से जल्द आराम मिलेगा।

अनियमित दिनचर्या ने लोगों को कई बीमारियां दी हैं, इनमें से एक है- पीठ दर्द। उठने-बैठने की सही मुद्रा का ध्यान न रखने और व्यायाम की कमी की वजह से गर्दन, पीठ और कमर दर्द की समस्याएं बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। जहां पहले पीठ व कमर दर्द से जुड़े मामले उम्रदराज लोगों में देखने को मिलते थे, वहीं अब स्वस्थ व सक्रिय जीवनशैली के प्रति लापरवाह 20-30 साल के युवा भी बड़ी संख्या में बैक पेन की गिरफ्त में आ गये हैं। हमारी रीढ़ की हड्डी कई तरह के वर्टेब्र से मिल कर बनती है, यही वर्टेब्र एक दूसरे के ऊपर गोल आकार में रखे होते हैं। इनके बीच में एक कुशन या गद्दे के समान सॉफ्ट डिस्क होती है, जो वर्टेब्र को आपस में रगड़ने या टकराने से रोकती है। इस डिस्क के कारण ही रीढ़ की हड्डी में लचीलापन भी होता है। लेकिन घंटों मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप पर समय बिताने और व्यायाम की कमी के कारण पीठ दर्द के मामले बढ़ रहे हैं।

रीढ़ पर पड़ता दबाव

जब रीढ़ या स्पाइन सही अवस्था में नहीं रहती तो पीठ की मांसपेशियां, लिगमेंट्स और डिस्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। मज़्ाबूत मांसपेशियां रीढ़ को उचित सीध में रखती हैं और पीठ दर्द से बचाती हैं। ये रीढ़ को सामान्य लचक से अधिक मुडऩे से भी रोकती हैं। रीढ़ के किसी भी हिस्से पर दबाव पडऩे से पीठ में दर्द हो सकता है। यह दर्द गर्दन से लेकर कमर के निचले हिस्से तक हो सकता है। ख़्ाासतौर पर यह समस्या लोअर बैक में ज्य़ादा होती है। रीढ़ का ढांचा नाडिय़ों और रक्त नलिकाओं के जाल से मिल कर बनता है। स्लिप डिस्क की समस्या में इसके आसपास वाले हिस्से में नसों व मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ सकता है।

उपचार के समय क्‍या करें

  • पीठ दर्द के समय जकड़न हो सकती है, इसे दूर करने के लिए गर्दन और पीठ पर गर्म पट्टी का प्रयोग करें। इससे गर्दन और पीठ की कसी हुई मांसपेशियां ढीली होंगी और जकड़न से छुटकारा मिल सकता है।
  • पीठ दर्द की शिकायत होने पर शरीर को सही मुद्रा में बनायें, इससे पीठ दर्द को कम करने में मदद मिलती है और इसके कारण भविष्य में भी पीठ दर्द की शिकायत नहीं होती है।
  • लैपटॉप पर काम करते समय आगे की तरफ अधिक न झुकें, बल्कि लैपटॉप को ऊंचे स्थान पर रखें, इससे गर्दन और सिर से ऊपर रखने में मदद मिलेगी। यदि आप कई घंटों तक लैपटॉप पर काम करेंगे तब भी इस मुद्रा से दर्द कम होगा।
  • लगातार काम करने की बजाय छोटे-छोटे ब्रेक अवश्‍य लें, नियमित अन्तराल पर ब्रेक लेने से लगातार बैठने के अभ्यास पर ब्रेक लगेगा।
  • इसके अलावा य‍ह भी सलाह दी जाती है कि काफी मात्रा में पानी पियें। खाने के बाद एक छोटी वॉक पर जाइए, और और कुछ न हो तो ऑफिस में दूसरी तरफ बैठे अपने दोस्त के पास एक चक्कर जरूर लगा आइये।
  • नियमित व्यायाम और योग को अपनी दिनचर्या में शामिल कीजिए, शरीर को लचीला और अच्छी शारीरिक मुद्रा बनाये रखने के लिए योग और व्यायाम सबसे सही तरीके हैं। इससे तनाव भी कम होता है और यह शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है।

उपचार के समय क्‍या न करें

  • बैक पेन की शिकायत होने पर लगत मुद्रा में बिलकुल न बैठें, अपने बैठने व सोने की मुद्रा को ठीक करें। कुर्सी पर बैठते समय मेज की ऊंचाई का ध्यान रखें। गलत मुद्रा में बैठने से पीठ की मांसपेशियों में लचक आ जा सकती है।
  • लेट कर टीवी बिलकुल भी न देखें, लेटकर टीवी देखने से आपके शरीर का पोस्‍चर सही नहीं होता और पीठ का दर्द बढ़ सकता है।
  • बाईक और कार चलाते समय भी ध्‍यान रखें, लंबे समय तक बिलकुल भी गाड़ी न चलाएं और लांग ड्राइव पर जाने के बारे में सोचिये भी मत।
  • भारी सामान न उठायें, भारी सामान उठाने से पीठ की हड्डी में दर्द हो सकता है, इसलिए यदि आपको पीठ दर्द की शिकायत हो तो भारी सामान उठाने से परहेज करें।
  • झुकते समय अपने घुटनों को मोड़ें और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और वजन को शरीर के दोनों भागों में बराबर रखें।

    दर्द के वक्त करें काम

    • रीढ़ और गर्दन को सीधा रखें। लगातार झुक कर काम करने से दर्द हो सकता है।
    • की-बोर्ड या टाइपराइटर पर काम करते हों तो कलाइयां सीधी रखें। कलाइयां मुडऩे से नसों में रक्त-संचार धीमा हो सकता है और उस पर दबाव पडऩे लगता है। कुहनी लगभग 60 डिग्री पर मोड़ कर रखें।
    • कुर्सी का डिजाइन भी दर्द की वजह बन सकता है। कुर्सी कार्य के अनुरूप होनी चाहिए। यानी पीठ वाला हिस्सा कंधे के स्तर से थोड़ा ऊपर हो, कुर्सी में हाइट बढ़ाने-घटाने की व्यवस्था हो और इसमें हत्थे हों। खराब कुर्सी में बैठने से शरीर की पॉजिशन भी खराब हो जाती है।
    • कुर्सी की ऊंचाई इतनी रखें कि पैर फर्श पर आसानी से टिकें। घुटनों को 90 डिग्री तक मोड़ कर रखें।
    • हर दो घंटे में 5-10 मिनट का ब्रेक लें। एक ही अवस्था में ज्य़ादा देर तक बैठने से पीठ, गर्दन व अंगुलियों पर अधिक दबाव पड़ता है। इससे बचने के लिए वॉशरूम जाएं, कॉरीडोर या छत पर थोड़ी-थोड़ी देर वॉक करें।
    • बीच-बीच में अंंगुलियों व कलाइयों की एक्सरसाइज करते रहें।
    • छह-सात घंटे लगातार डेस्क जॉब के बीच कम से कम दो बार खड़े होकर बांहें फैलाएं और उन्हें आगे-पीछे करते रहें, ताकि एक ही अवस्था में बैठे रहने से कंधे में होने वाली अकडऩ से बच सकें।
    • टाइप करते समय फोन को कान से सटा कर गर्दन एक ओर झुका कर बात करने से बचें। इससे गर्दन व कमर में दर्द हो सकता है। बेहतर हो कि टाइपिंग छोड़ कर पहले फोन ही सुन लें।
    • ओवरवेट हैं तो वजन कम करने की कोशिश करें।
    • नियमित व्यायाम करें। दर्द के लिए फिजियोथेरेपी करा रहे हों तो डॉक्टर की हर सलाह मानें। पीठ दर्द में वॉकिंग सबसे अच्छी एक्सरसाइज है। दर्द या स्लिप डिस्क जैसी स्थिति में भारी चीजें उठाने, आगे झुकने या झटके से उठने-बैठने से बचें।
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