मधुमेह का आयुर्वेदिक उपचार

मधुमेह का आयुर्वेदिक उपचार

1. काला जीरा :- मसाले न सिर्फ स्वाद बढ़ाने का काम करते हैं बल्कि ये स्वास्थ्य के लिए भी बेजोड़ होते हैं। ये मसाले अपने आप में हमारे लिए बेहतरीन दवा का काम करते हैं। इन्ही मसालो में एक विशेष हैं काला जीरा। हर रोज़ सिर्फ दो ग्राम की मात्रा में काला जीरा खाने से मधुमेह में विशेष लाभ होता हैंकाला जीरा दो प्रकार से मधुमेह को नियंत्रित करता हैं।

काला जीरा पैंक्रियास को उत्तेजित कर के अधिक इन्सुलिन का निर्माण करवाता हैं। जिस से शरीर में मौजूद ग्लूकोस शरीर के cell (उत्तकों) द्वारा आसानी से ग्रहण कर लिए जाते हैं। ऐसा इसमें मौजूद थायमोक़्यीनॉन के कारण होता हैं। जिस से प्राकृतिक रूप से शरीर में रक्त शर्करा का लेवल कम हो जाता हैं।

Advanced Glycation end products (AGE) जो सीधे तौर पर बहुत सारी डी जेनेरटिव बीमारियो का कारण हैं जिनमे विशेष तौर पर मधुमेह, atherosclerosis , chronic renal failure, अल्ज़ाइमर हैं। और इस से किडनी और लिवर को भी बहुत अधिक नुक्सान पहुंचता हैं। काला जीरा सीधे सीधे इस Advanced Glycation end products (AGE) को बनने से रोक कर इन सब बीमारियो से बचाता हैं।
काला जीरे के सेवन से मधुमेह के कारण हुए आँखों के रोग विशेष कर मोतियाबिंद और दृष्टि मंदता में भी लाभ पहुँचता हैं।
2 . मखाना : मखाना पोषक तत्वों से भरपूर एक जलीय उत्पाद है। मखाना स्वास्थ्य के लिये भी काफी फायदेमंद है। डायबिटीज चयापचय विकार है, जो उच्च रक्त शर्करा के स्तर के साथ होता है। इससे इंसुलिन हार्मोंन का स्राव करने वाले अग्न्याशय के कार्य में बाधा उत्पन्न होती है। लेकिन मखाने मीठा और खट्टा बीज होता है। और इसके बीज में स्टार्च और प्रोटीन होने के कारण यह
डायबिटीज के लिए बहुत अच्छा होता है।
3 चना हमारे सेहत के लिए कितना फायदेमंद है हम इस पोस्ट में जानने का प्रयास करेगे. काले चने भुने हुए हों, अंकुरित हों या इसकी सब्जी बनाई हो, यह हर तरीके से सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स पाए जाते हैं। डायबिटीज से छुटकारा दिलाता है चना ताकतवर होने के साथ ही शरीर में एक्स्ट्रा ग्लूकोज की मात्रा को कम करता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए कारगर होता है। लेकिन इसका सेवन सुबह-सुबह खालीपेट करनाचाहिए। चने का सत्तू डायबिटीज़ से बचाता है। एक से दो मुट्ठी ब्लड चने का सेवन ब्लड शुगर की मात्रा को भी नियंत्रित करने के साथ ही जल्द आराम पहुंचाता है।
4 आंवला मधुमेह रोगियों के लिये आमला जूस वर्दान है। इसे शहद और हल्दीप पाउडर के साथ पीने से मधुमेह कंट्रोल होता है।
5 मैथीदाना 250 ग्राम, अजवाइन 100 ग्राम और काली जीरी(Vernonia Anthelmintica) 50 ग्राम लें। तीनों को बारीक पीस कर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण रोज आधा चम्मच मात्रा में रात को सोते समय गर्म पानी के साथ लिया जाए तो पेट के तमाम रोगों में फायदा करता है मेथी एक चम्मच मेथी को पूरी रात 100 मिलीलीटर पानी में भिगो दे और फिर सुबह खाली पेट इस पानी को पिए इससे डायबिटीज कंट्रोल रहती है।
6. टमाटर का रस हर सुबह खाली पेट टमाटर के रस में नमक और काली मिर्च मिलकर पिए
7 भिगोया बादाम रोज़ 6 बादाम (रात भर पानी में भिगो कर) का सेवन भी मधुमेह पर नियंत्रण रखने में सहायक है।
8 उच्च फाइबर वाली सब्जियाँ मटर, सेम, ब्रोकोली, पालक और पत्तेदार सब्जियां आपने आहार में शामिल करे। इसी तरह दाल और स्प्राउट्स भी एक स्वस्थ विकल्प है।
9 फाइबर वाले फल पपीता, सेब, संतरा, नाशपाती और अमरूद जैसे फलों का सेवन करना चाहिए क्यों की इनमें अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है। और आम, केले, और अंगूर जैसे फलों का कम सेवन करना चाहिए क्यों की इनमें चीनी की मात्रा ज्यादा पाई जाती है।
10 धनिया हरा धनिया में प्रोटीन, वसा, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, खनिज पदार्थ, जैसे- कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थियामीन, पोटोशियम और विटामिन सी जैसे तत्व पाये जाते हैं। ये खाने को तो स्वादिष्ट बनाती है और पाचन शक्ति को दुरूस्त कर डाइबिटीज भागती है। 
धनिया को दही में मिलाकर पीने से बदहजमी,पेचिश और कोलाइटिस में आराम मिलता है। धनिया, टाइफाइइड व् डाइबिटीज में भी उपयोगी है। यही नहीं धनिया कोलेस्ट्राल को भी संयमित करता है। गठिए की समस्या हो तो पानी में धनिए का बीज डालकर काढ़ा बनाकर पीएं। इसके सेवन से ब्लड में इंसुलिन की मात्रा नियंत्रित रहती है। इसके साथ ही यह शरीर में बैड कोलेस्ट्रोल की मात्रा घटाने और अच्छे कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करता है।
11 डायबिटीज के उपचार में जामुन का फल,बीज,पेड़ की छाल का खासा महत्व है।
दरअसल, जामुन गुणों का भंडार है। इसमें विटामिन बी और आयरन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। एनीमिया (खून की कमी) के मर्ज को दूर करने में और रक्त में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए जामुन का सेवन लाभप्रद है। यही नहीं जामुन सेवन से त्वचा का रंग निखरता है। जिन लोगों को 'सफेद दाग' का मर्ज है, उन्हे जामुन खाना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार मधुमेह टाइप-2 को नियंत्रित करने में भी जामुन सहायक है। इसके लिए जामुन की गुठली के चूर्ण की 5 ग्राम मात्रा का सुबह नाश्ते में और दोपहर के भोजन के बाद और फिर शाम के नाश्ते में और रात के भोजन के बाद सेवन करना चाहिए। इस प्रकार मधुमेह के रोगी दिन में 15 से 25 ग्राम मात्रा में जामुन की गुठली के चूर्ण का प्रयोग कर सकते है।
जामुन का फल और इसकी गुठली असाधारण रुप से रक्त शर्करा की अधिकता को नियंत्रित करने की अद्भुत क्षमता रखती है। औसतन 100 ग्राम जामुन में 62 किलो कैलौरी ऊर्जा, 1.2 मिली ग्राम लोहा, 15 मिली ग्राम कैल्शियम, 15 मिली ग्राम फास्फोरस 18 मिलीग्राम विटामिन सी, 48 माइक्रोग्राम कैरोटीन,55 मिलीग्राम पोटेशियम,35 मिली ग्राम मैग्नीशियम और 25 मिलीग्राम सोडियम पाया जाता है।

 

 

 

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