व्रत से जुड़ी गलतफहमियां

व्रत से जुड़ी गलतफहमियां

नवरात्र आते ही चारों ओर उत्सव का माहौल छा जाता है और इसके साथ ही शुरू हो जाता है नौ दिनों के व्रत का सिलसिला। आमतौर पर व्रत के पारंपरिक आहार में बहुत ज्यादा कैलोरी होती है। इससे व्रत के दौरान पाचन संबंधी समस्याएं परेशान करने लगती हैं और व्रत के बाद वजन भी बढ़ जाता है। दरअसल, पुराने समय में लोग ज्यादा शारीरिक श्रम करते थे इसलिए व्रत के दौरान कुट्टू की पकौडिय़ां, सिंघाड़े का हलवा, मखाने की खीर या रबड़ी जैसी चीजें आसानी से हजम हो जाती थीं, पर अब जीवनशैली बदल चुकी है। शहरों में लोग छोटे-छोटे फ्लैट्स में रहते हैं, घरेलू कामकाज को आसान बनाने के लिए वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर और फूड प्रोसेसर जैसे आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। छोटी दूरी के लिए भी गाडिय़ों का इस्तेमाल आम है। ऐसी जीवनशैली में अगर खानपान का सही ढंग से खयाल न रखा जाए तो व्रत के दौरान या उसके बाद भी कब्ज, एसिडिटी और नॉजिया जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।

व्रत से जुड़ी गलतफहमियां

नवरात्र में ज्यादातर महिलाएं नौ दिनों का व्रत यह सोच कर भी रखती हैं कि इसी बहाने वजन कम हो जाएगा, पर यह मात्र भ्रम है। नवरात्र के व्रत के दौरान ज्यादातर लोगों के खानपान की दिनचर्या नियमित नहीं होती और इस वजह से ओवरईटिंग हो जाती है। नवरात्र में ज्यादातर लोग केवल दो वक्त का ही भोजन करते हैं। दो बार के खाने में ज्यादा गैप होने की वजह से वे ओवरईटिंग कर लेते हैं। इससे शरीर के मेटाबॉलिक रेट में गड़बड़ी हो जाती है। इससे हार्ट अटैक और टाइप-2 डायबिटीज के स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा व्रत के दौरान कुछ लोग नमक छोड़ देते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं। इससे लो बीपी की समस्या होने लगती है। इसलिए कम से कम एक वक्त सेंधा नमक का सेवन जरूर करना चाहिए। एसिडिटी की समस्या से बचने के लिए हर दो घंटे के अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाएं।

इन बातों का रखें ध्यान

-व्रत के दौरान भूख ज्यादा लगती है। इससे राहत पाने के लिए प्रतिदिन सुबह नीबू-पानी में शहद मिलाकर पीएं।

-कब्ज की समस्या से बचने के लिए फाइबर से भरपूर चीजों का सेवन जरूरी है। इसके लिए फ्रूट चाट या मिली-जुली सब्जियों के स्टीम्ड सैलेड का सेवन करें।

-लो फैट मिल्क और दही का सेवन करें।

-आजकल रेस्त्रां में व्रत की थाली के नाम पर कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन आकर्षक ढंग से सर्व किए जाते हैं, पर इसमें बहुत ज्यादा कैलोरी होती है। इसलिए जहां तक संभव हो ऐसे भोजन से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए।

-नवरात्र के दौरान काब्र्स, फैट और प्रोटीन की सही मात्रा लेना आवश्यक है। डाइट में कमी या अत्यधिक भोजन, दोनों ही शरीर के लिए घातक होते हैं। नौ दिनों के व्रत में अगर डाइट कंट्रोल के साथ व्यायाम भी शामिल कर लिया जाए तो वजन कम करना आसान हो जाता है। 45 मिनट की एरोबिक्स और 15 मिनट की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज नवरात्र के दिनों में स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है।

-अगर आपको एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या है तो लंबे समय तक खाली पेट न रहें। हर घंटे में थोड़ा-थोड़ा जरूर खाएं। मखाना इसके लिए अच्छा विकल्प होता है। ठंडा दूध पिएं।

-डायबिटीज से ग्रस्त लोग साबूदाना, सिंघाडे का आटा, शकरकंद, आलू और अरबी से बचें। फलों में केला और चीकू से दूर रहें। संतरा, मौसमी और अंगूर जैसे सिट्रस फ्रूट्स ले सकते हैं। स्टार्च रहित ग्रिल्ड डिशेज भी ठीक रहते हैं।

-व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी की वजह से अकसर यूरिनरी ट्रैक से जुडी समस्याएं हो जाती हैं। इससे बचने के लिए अधिक मात्रा में लिक्विड डाइट जैसे, लो फैट दही से बनी लस्सी, शहद के साथ मिल्क शेक और छाछ लें। हर एक घंटे के अंतराल पर पानी पिएं। इनसे भरपूर एनर्जी मिलती है और शरीर में फ्लूइड लेवल बरकरार रहता है। दही और फल कूलिंग एजेंट का काम करते हैं।

-पूरी और पकौड़े की जगह कुट्टू की रोटी, फ्राइड की जगह उबले आलू की चाट, खीर की बजाए दही के साथ फ्रूट सैलेड ले सकते हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि व्रत में फ्राइड नहीं, बल्कि हेल्दी फूड की जरूरत होती है।

-कुट्टू के आटे से बना चीला, सांवा के चावल से बनी इडली या पोहा नारियल की चटनी के साथ खाएं।

व्रत के बाद आहार

नौ दिनों के व्रत के बाद अकसर लोगों को पेट में दर्द और बदहजमी जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। इसकी प्रमुख वजह है कि नौ दिनों में हमारा पाचन तंत्र सादे और सात्विक आहार के साथ काम करने का आदी हो चुका होता है। ऐसे में जब हम अचानक पूरी, पराठे, दाल-चावल और ज्यादा मिर्च-मसाले वाली सब्जियों का सेवन शुरू करते हैं तो पाचन तंत्र को ऐसा भोजन पचाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसी वजह से ज्यादातर लोगों को नवरात्र के बाद पेट में भारीपन महसूस होता है। ऐसी समस्या से बचने के लिए व्रत के उद्यापन के अगले दिन सुबह सबसे पहले दो-तीन ग्लास गुनगुना पानी पीएं। नाश्ते में नमकीन दलिया या ओट्स और एक कप दूध लें। लंच से पहले एक-एक घंटे के अंतराल पर जूस, नीबू-पानी, छाछ या कोई एक फल लें। शाम को मुरमुरे जैसे हल्के स्नैक्स के साथ चाय, डिनर से एक घंटा पहले सूप और खाने में एक कटोरी हरी सब्जी, दाल, दही और सैलेड के साथ एक या दो रोटी लें। इससे आपके पाचन तंत्र को कोई परेशानी नहीं होगी और अगले दो-तीन दिनों में वह आपके रोजाना के सामान्य खानपान के साथ एडजस्ट हो जाएगा

 

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