स्वास्थ्य समाचार

बाइपोलर डिस-ऑर्डर को न्योता?

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण, बाइपोलर डिसऑर्डर क्या है, बाइपोलर डिसऑर्डर के घरेलू उपाय, बाइपोलर मीनिंग इन हिंदी, मूड डिसऑर्डर

इस पेपर में मनोचिकित्सकों ने नीली रोशनी के हमारी नींद और शरीर की अंदरूनी घड़ी पर पड़ने वाले बुरे असर के प्रति आगाह किया था. हम जिस तरह से अपनी सेहत के लिए डिजिटल ऐप और दूसरी मशीनें इस्तेमाल कर रहे हैं, इससे किशोरों और युवाओं में एलईडी लाइट्स के कई बुरे प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.

नीली रोशनी के ख़तरे?

पेरिस से लेकर ब्रुकलिन तक स्थानीय परिषदों और निकायों ने ज़्यादा बिजली खाने और गर्मी पैदा करने वाले पीले सोडियम बल्बों की जगह एलईडी बल्ब लगाने का अभियान छेड़ रखा है. एलईडी बल्ब में एक डायोड होता है, जिससे नीली रोशनी निकलती है. ये पुराने बल्बों की पीली रोशनी के मुक़ाबले आंखों को चुभने वाली हो सकती है.

स्मार्टफ़ोन बिगाड़ रहा है आंखों की सेहत

स्मार्टफ़ोन बिगाड़ रहा है आंखों की सेहत

स्मार्टफ़ोन अब स्मार्टनेस का स्टेटस सिंबल बन चुका है. लेकिन यही स्मार्टफ़ोन अब धीरे-धीरे आंखों के स्मार्टनेस को ख़त्म करने का कारण भी बनता जा रहा है.

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक़, अंधेरे में स्मार्टफ़ोन का उपयोग करने से आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगती है. रिपोर्ट के अनुसार दो महिलाओं में इसके लक्षण भी देखे गए जो इन दिनों स्मार्टफ़ोन ब्लाइंडनेस से पीड़ित हैं.

दिमागी ताकत व तरावट लानेवाला प्रयोग

दिमागी ताकत व तरावट लानेवाला प्रयोग

पहला प्रयोग :

 

 ५०० ग्राम बबूल की गोंद शुद्ध घी में तलें व फुल जाने पर निकाल के बारीक़ पीस लें |
★ इसमें बराबर मात्रा में पिसी मिश्री मिला लें |
★ २५० ग्राम बीज निकाला हुआ मुनक्का और १०० ग्राम बादाम की गिरी दोनों को कूट-पीसकर इसमें मिला लें |

लाभ :

★ यह योग शरीर के लिए तो पौष्टिक है ही, साथ ही दिमागी ताकत और तरावट के लिए भी बहुत गुणकारी है |
★ विद्यार्थियों के लिए यह नुस्खा विशेष लाभदायी है |

लिक्विड सोप से हाथ धोते हैं तो सतर्क हो जाएं!

लिक्विड सोप से हाथ धोते हैं तो सतर्क हो जाएं!

अगर आप ट्रेन, जिम, ऑफिस या रिजॉर्ट में रोगाणुओं को लेकर चिंतित रहते हैं और हैंड जेल से मात देना चाहते हैं तो फिर से सोचिए.

हैंड जेल आपको दिमाग़ी संतुष्टि देता है, लेकिन उतना प्रभावी नहीं होता. कई बार तो यह उल्टा ही असर डालता है. आप जितना इस हैंड जेल के बारे में जानते हैं, क्या उतना ही सच है?

हैंड जेल्स की लोकप्रियता हर देश में है. ब्रिटेन में एक तिहाई लोग एक महीने में एक बार ज़रूर इसे ख़रीदते हैं. हैंड जेल्स में 60 फ़ीसदी एल्कोहल होता है.

अगर इसका इस्तेमाल आप ज़्यादा मात्रा में करते हैं, तो तत्काल रोगाणु नष्ट हो सकते हैं, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव कुछ और है.

दस सेकंड के एक चुंबन के दौरान क़रीब आठ करोड़ जीवाणु चुंबन करने वालों के मुंह में चले जाते हैं.

दस सेकंड के एक चुंबन के दौरान क़रीब आठ करोड़ जीवाणु चुंबन करने वालों के मुंह में चले जाते हैं.

नीदरलैंड के वैज्ञानिकों का एक दल इस नतीजे पर पहुंचा है.  इन वैज्ञानिकों ने 21 जोड़ों के चुंबन क्रिया पर निगरानी रखने के बाद पाया कि जो लोग दिन भर में नौ बार एक-दूसरे का चुंबन लेते हैं, उनमें लार के ज़रिए जीवाणु स्थानांतरित करने की संभावना ज़्यादा होती है. अध्ययन के मुताबिक़ इंसान के मुंह में 700 प्रकार के जीवाणु करोड़ों की संख्या में मौजूद होते हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही ज़्यादा तेज़ी से स्थानांतरित होते हैं.

डच वैज्ञानिकों का ये अध्ययन जर्नल माइक्रोबिओम में प्रकाशित हुआ है.

दिल के दौरे में है ब्लड ग्रुप का भी हाथ

ब्लड ग्रुप का

शोधकर्ताओं ने कहा है कि ऐसा शायद इसलिए है क्योंकि ब्लड ग्रुप ए, बी और एबी में ख़ून जमाने वाले प्रोटीन का स्तर ज़्यादा होता है.

उनका कहना है कि इन नतीजों से ये समझने में मदद मिलेगी कि किस पर दिल के दौरे का ख़तरा अधिक है.

यूरोपियन सोसाइटी ऑफ़ कार्डियोलॉजी कांग्रेस में पेश की गई इस रिपोर्ट में क़रीब 13 लाख लोगों पर अध्ययन किया गया है.

इससे पहले हुई रिसर्च में पता चला था कि दुर्लभ ब्लड ग्रुप एबी वाले लोगों पर दिल के दौरे का सबसे ज़्यादा ख़तरा रहता है.

असल में ब्रिटेन में ओ ब्लड ग्रुप सबसे आम है. ऐसे लोगों की संख्या 48 प्रतिशत है.

उंगलिया चटकाने पर आवाज़ क्यों होती है?

अमरीका और फ्रांस के शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका कारण गणित के तीन समीकरणों की मदद से बताया जा सकता है. उनके मॉडल से ये साबित होता है कि ये आवाज़ हड्डियों के जोड़ में जो तरल पदार्थ होता है, उसमें बुलबुले फूटने की वजह से होती है.

हैरानी की बात ये है कि इस प्रक्रिया पर एक पूरी सदी तक बहस होती रही.

फ्रांस में विज्ञान के छात्र विनीत चंद्रन सुजा क्लास में अपनी उंगलिया चटका रहे थे जब उन्हें इसके बारे में पता लगाने का ख़्याल आया.

सुबह उठ कर खाली पेट कैसे पानी पीना चाहिए

सुबह उठ कर खाली पेट कैसे पानी पीना चाहिए

 पानी पीने का क्या तरीका होता है

    उत्तर -    सिप सिप करके व नीचे बैठ कर पानी पीये 

 सुबह उठ कर कैसा पानी पीना चाहिए

    उत्तर -     हल्का गर्म

 खाना कितनी बार चबाना चाहिए

 उत्तर. -    32 बार

 पेट भर कर खाना कब खाना चाहिए

     उत्तर. -     सुबह

. आईसक्रीम कब खानी चाहिए

       उत्तर. -      कभी नही

. फ्रिज़ से निकाली हुई चीज कितनी देर बाद
      खानी चाहिए

      उत्तर. -    1 घण्टे बाद

 क्या कोल्ड ड्रिंक पीना चाहिए

       उत्तर. -      नहीं

बाजरा खाइए, हड्डियों के रोग नहीं होंगे

बाजरा खाइए

बाजरा खाइए, हड्डियों के रोग नहीं होंगे
बाजरे की रोटी का स्वाद जितना अच्छा है, उससे अधिक उसमें गुण भी हैं।
- बाजरे की रोटी खाने वाले को हड्डियों में कैल्शियम की कमी से पैदा होने वाला रोग आस्टियोपोरोसिस और खून की कमी यानी एनीमिया नहीं होता
- बाजरा लीवर से संबंधित रोगों को भी कम करता है।
- गेहूं औरचावल के मुकाबले बाजरे में ऊर्जा कई गुणा होती हैं
- बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो हड्डियों के लिए रामबाण औषधि है। उधर आयरन भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते।

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