स्वास्थ्य समाचार

टी .बी से बचाब के घरेलु तरीके

टी .बी से बचाब के घरेलु  तरीके

 टीबी के घरेलू उपाय
1. लहसुन
इसमें काफी मात्रा में सल्फयूरिक एसिड पाया जाता है जो टीबी के कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करता है। इसके लिए आधा चम्मच लहसुन, 1 कप दूध और 4 कप पानी को एक साथ उबालें। जब यह मिश्रण 1 चौथाई रह जाए तो इसे दिन में 3 बार पीने से टीबी रोग में फायदा होता है। इसके अलावा गर्म दूध में लहसुन मिलाकर भी पीया जा सकता है। इसके लिए दूध में लहसुन की कलियां उबालें और फिर इसका सेवन करें।

कान में दर्द है तो करें ये उपाय

कान में दर्द की समस्या किसी को भी हो सकती है। कान में दर्द होने पर आपका मन किसी काम में नहीं लगता है और आप बेचैन हो जाते हैं। कई बार यह दर्द इतना बढ़ जाता है कि खाना-पीना, उठना-बैठना यहां कि आराम से सोना तक दूभर हो जाता है। आइए जानते हैं इससे बचने के उपाय…

तुलसी की पत्तियों को पीसकर उसके रस की दो-तीन बूंदें कान में डालें। तुलसी के इस रस से कान का इन्फेक्शन ठीक होता है और दर्द दूर होता है। कान के अंदरूनी जख्मों को भी यह रस ठीक करता है।

गुर्दे की बीमारियों की चपेट में अब युवा भी

मधुमेह और उच्च रक्तचाप गुर्दे की स्थाई समस्या के मुख्य कारण हैं, लेकिन जानकारी के अभाव के कारण जब तक इस बीमारी का पता चलता है तब तक बीमारी असाध्य रूप ले चुकी होती है।

सर गंगाराम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ कंसल्टेंट डा. ए के भल्ला कहते हैं कि इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाना सर्वाधिक जरूरी है। क्योंकि यह बीमारी एक 'साइलेंट किलर' है और ज्यादातर मामलों में इसका पता तब चलता है जब गुर्दा 80 फीसदी खराब हो चुका होता है।

 

 

सीने में जलन से तुरंत छुटकारा दिलाते हैं ये 10 सस्‍ते घरेलू नुस्‍खे

एसिड रिफ्लक्स ऐसी स्थिति है जिसमें पेट में एसिड आहार नली में उठ आता है। इस समस्‍या में पेट को खाने की नली से संपर्क को अलग करने वाला वाल्व ठीक से काम नहीं करता। पेट और ग्रसनी के बीच की ट्यूब आहार नली है, जो शरीर में गले के पीछे की तरफ होती है।

क्यों होता है एसिड रिफलक्स

ब्रेन ट्यूमर के उपाय

  • मस्तिष्क हमारे शरीर का वह महत्वपूर्ण और नाजुक हिस्सा है, जिसका संबंध संपूर्ण शरीर से है। अगर मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में कोई तकलीफ हो तो उसका प्रभाव शरीर के दूसरे अंगों की गतिविधियों पर भी पड़ता है। सिर में किसी भी तरह की तकलीफ या मस्तिष्क से जुड़ी किसी समस्या का आभास होने पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। बीमारी सही समय पर पकड़ में आए तभी निदान आसान हो पाता है।'

गर्भावस्था के बाद महिलाएं अपनाएं ऐसी डाइट, नहीं होगी कमजोरी

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को जितनी देखभाल की जरुरत पड़ती है, उतनी ही देखभाल और पोषण की जरूरत उन्हें प्रसव के बाद भी पड़ती है। प्रसव के बाद उनकी दिनचर्या में काफी बदलाव आ जाता है। उन्हें सारा दिन बच्चे के साथ लगा रहना पड़ता है, इसलिए उन्हें काफी उर्जा की जरूरत होती है। ऐसे में महिलाओं को विटामिन, कैलारी एवं प्रोटीन युक्त भोजन खाना चाहिए। सही खान-पान और नियमित व्यायाम से ही महिला को दोबारा शक्ति मिलती है।

गर्भावस्था के बाद का खान-पान

अचानक बढ़ जाती है दिल की धड़कन तो हो सकती है ये खतरनाक बीमारी

दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब तक ये दिल धड़क रहा है हमारे शरीर में जान है और जब इसका धड़कना बंद हो जाए तो इंसान का सारा शरीर काम करना बंद कर देता है और उसकी मौत हो जाती है। इसलिए दिल का लगातार धड़कते रहना हमारी जिंदगी के लिए बहुत जरूरी है। कई बार कुछ शारीरिक परेशानियों की वजह से दिल की धड़कन घटती-बढ़ती रहती है। दिल की धड़कन के घटने या बढ़ने से कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ये स्थिति दिल के साथ-साथ शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों जैसे फेफड़ा, लिवर, किडनी और दिमाग को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

 

इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया

कई रोगों में चमत्कार का काम करती है दूब घास, जानें इसके फायदे

दूब का नाम तो आपने जरूर सुना होगा। यह पूजा में भगवान गणेश को अर्पित की जाने वाली कोमल दूब को आयुर्वेद में महाऔषधि माना जाता है। पौष्टिक आहार तथा औषधीय गुणों से भरपूर दुर्वा यानी दूब को हिन्दू संस्कारों एवं कर्मकांडों में उपयोग के साथ ही यौन रोगों, लीवर रोगों, कब्ज के उपचार में रामबाण माना जाता है। पतंजलि आयुर्वेद हरिद्वार के आचार्य बाल कृष्ण ने कहा कि दूब की जड़ें, तना, पत्तियां सभी को आयुर्वेद में अनेक असाध्य रोगों के उपचार के लिए सदियों से उपयोग में लाया जा रहा है।

पेट में दर्द तथा पेट फूलना

पेट में गैस बनने की समस्या काफी तकलीफदेह साबित होती है। यह कई बार आपको शर्मिदा तो कर ही सकती है, आपके पाचन तंत्र की भी सेहत बिगाड़ सकती है। इस गैस के दुष्प्रभाव, कारण और बचाव के बारे में बता रही हैं शमीम खान

आखें लाल हो तो करें ये उपाय

आँखों के रोग (aankh ke rog) में आँखों का लाल होना एक ऐसी समस्या है जिसमें आपकी आँखों में जलन (aankhon mein jalan) एवं खुजलाहट होती है। इसे कंजंक्टिवाइटिस कहते हैं और इसके होने के कई कारण होते हैं जैसे एलर्जी, बैक्टीरिया और वायरस और धुल, प्रदूषण, मेकअप, धुएं और आँखों के ड्राप से ये स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। इसमें आँखों में दर्द, आँख लाल होना,आँख से पानी आना,खुजली और जलन जैसे लक्षण देखे जाते हैं।

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