स्वास्थ्य समाचार

पीलिया होने पर घरेलु इलाज

पीलिया होने पर घरेलु इलाज

पाचन तंत्र कमजोर होना पीलिया का प्रमुख कारण है। पीलिया(Jaundice) के रोग का प्रभाव शरीर में खून बनने पर पड़ता है जिससे शरीर में ब्लड की कमी होने लगती है। इस रोग में अगर लापरवाही की जाये तो ये काला पीलिया बन जाता है जो जानलेवा रोग हो सकता है। पीलिया पुराना हो या नया घरेलू देसी नुस्खे और आयुर्वेदिक दवा से आप इसका उपचार कर सकते है। इस बीमारी से छुटकारा पाने में इलाज के साथ परहेज करना भी जरुरी है और जैसे ही पीलिये के लक्षण आपको दिखने लगे इसका उपचार शुरू करे। पीलिया तीन तरह का होता है, हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया), हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस ए। इस लेख में हम जानेंगे 

हार्मोन और स्किन को नुकसान पहुंचाते हैं ये आहार

त्वचा को आंतरिक सेहत का आइना कहा जाता है। चमकती-दमकती त्वचा अच्छी सेहत की पहचान है। हार्मोंनल गड़बड़ी, पोषक तत्वों की कमी, तनाव व प्रदूषण की वजह से त्वचा अपनी चमक खोने लगती हैं, जिसकी वजह से वह बेजान और उम्र से पहले ही एजिंग दिखाई देने लगती हैं। सिर्फ कास्मेटिक्स के इस्तेमाल से ही आप इसे ग्लोइंग नहीं बना सकते बल्कि आपका स्वस्थ होना भी बहुत जरूरी है। साथ ही त्वचा की बाहरी परत की देखभाल करना भी बहुत आवश्यक है क्योंकि त्वचा की बाहरी परत अंदरूनी अंंगों को हर तरह के वातावरण से सुरक्षा क्वच प्रदान करती हैं इसलिए त्वचा को कोमलता और पोषण प्रदान करना बहुत जरूरी है। 

उम्र के अंतर का संबंधों पर प्रभाव

उम्र के अंतर का संबंधों पर प्रभाव

मतौर पर किसी भी रिलेशन में खासतौर पर दांपत्य जीवन में पुरूष महिला से उम्र में बढ़ा होता है और शादी के लिए आदर्श जोड़े में भी पुरूष महिलाओं से आमतौर पर एकाध साल बड़ी उम्र के ही होते हैं। लेकिन आज के दौर में छोटी उम्र का पुरूष और बड़ी उम्र की महिला के बीच भी आसानी से संबंध बन जाते हैं। पति-पत्नी की उम्र के अंतर का संबंधों पर प्रभाव निश्चय ही पड़ता है। दरअसल, अकसर यह कहा जाता है कि महिला अपनी उम्र से पहले ही मैच्योर हो जाती है जबकि पुरूष अपनी उम्र के बाद ही मैच्योर होता है। आइए जानें उम्र के अंतर का संबंधों पर प्रभाव।

 

सुबह उठ कर खाली पेट कैसे पानी पीना चाहिए

 पानी पीने का क्या तरीका होता है

    उत्तर -    सिप सिप करके व नीचे बैठ कर पानी पीये 

 सुबह उठ कर कैसा पानी पीना चाहिए

    उत्तर -     हल्का गर्म

 खाना कितनी बार चबाना चाहिए

 उत्तर. -    32 बार

 पेट भर कर खाना कब खाना चाहिए

     उत्तर. -     सुबह

. आईसक्रीम कब खानी चाहिए

       उत्तर. -      कभी नही

. फ्रिज़ से निकाली हुई चीज कितनी देर बाद
      खानी चाहिए

      उत्तर. -    1 घण्टे बाद

 क्या कोल्ड ड्रिंक पीना चाहिए

       उत्तर. -      नहीं

जानें आपके पैरों में झुनझुनाहट क्यों होती है और आपकी सेहत के बारे में क्या कहते हैं!

पैरों में झुनझुनाहट
पैरों में झुनझुनाहट डायबिटीज़ का संकेत हो सकता है। अक्सर मधुमेह के रोगी उनके पैरों में झुनझुनी या जलन की शिकायत करते हैं। झुनझुनीवाले पैर पेरिफेरल न्यूरोपैथी का संकेत है और डायबिटीज़ न्यूरोपैथी का सबसे सामान्य कारण है।

टांसिल बढ़ना : :

परिचय  :

गले के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ मांस की एक गांठ सी होती है, जो लसिका ग्रंथि के समान होती है जिसे टांसिल कहते हैं।

गले में छोटे-छोटे गोल कृत (गोल आकार के) मांसल तन्तु टॉन्सिल कहलाते हैं। इनमें पैदा होने वाले शोथ (सूजन) को टाँन्सिलाइटिस कहा जाता है।

टांसिल बढ़ने का कारण :

याद्दाश्‍त खोना ही नहीं, ये लक्षण भी हैं अल्‍जाइमर के संकेत

याद्दाश्‍त खोना ही नहीं, ये लक्षण भी हैं अल्‍जाइमर के संकेत

अल्जाइमर रोग (Alzheimer's Disease) रोग 'भूलने का रोग' है। इस बीमारी के लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना तथा फिर इसकी वजह से सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं की गंभीर स्थिति आदि शामिल हैं। रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सर में कई बार चोट लग जाने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है। अमूमन 60 वर्ष की उम्र के आसपास होने वाली इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है। हालांकि बीमारी के शुरूआती दौर में नियमित जांच और इलाज से इस पर काबू पाया जा सकता है। हम आपको 10 ऐसे संकेत के बारे में बता रहे हैं, जो अल्‍जाइमर रोग होने की ओर इशारा करते हैं।

डायबिटीज यानि कि मधुमेह आजकल एक बहुत जटिल और गंभीर रोग बन कर उभर रहा है।

डायबिटीज यानि कि मधुमेह आजकल एक बहुत जटिल और गंभीर रोग बन कर उभर रहा है। एक सर्वे से पता चला है कि ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में हिंदुस्तानी महिलाएं सबसे ज्यादा डायबिटीज की शिकार हैं। जो महिलाएं गर्भवती होती हैं और डायबिटीज की रोगी होती हैं उन्हें खुद का ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत होती है। क्योंकि जेनेटिक होने के चलते यह रोग आपके बच्चे में भी जाने के पूरे चांस रहते हैं।

हड्डियों को मजबूत करते हैं ये

हड्डियों को मजबूत करते हैं ये 

 

कैल्शियम मजबूत दांत और हड्डियों, मांसपेशियों में संकुचन, और कुछ हार्मोन और एंजाइम के स्राव के विकास और रखरखाव के लिए आवश्यक होता है। इसलिए अपने आहार में भरपूर मात्रा में कैल्शियम लेना चाहिए।

  • कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ

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