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स्मार्ट कंडोम वो बताएगा जो आप भी नहीं जानते

स्मार्ट कंडोम वो बताएगा जो आप भी नहीं जानते

स्मार्ट वॉचेज़ और गूगल ग्लास के बाद पूरी दुनिया में वियरेबल टेक्नोलॉजी को लेकर रुझान बढ़ रहा है. घड़ियों और चश्मों के बाद अब इस कड़ी में नए-नए प्रोडक्ट बाज़ार में उतारे जा रहे हैं और उसी कड़ी में एक नया प्रोडक्ट है स्मार्ट कंडोम. इसकी बिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

इस स्मार्ट कंडोम को बनाने वाली कंपनी का दावा है कि ये ऐसे कई बारीक सवालों का जवाब भी देगा जिनके बारे में लोग अमूमन सोचते तक नहीं.

ब्रिटेन के एक ऑनलाइन स्टोर पर इसकी बिक्री की प्रक्रिया रजिस्ट्रेशन के ज़रिए शुरू की गई है. कंपनी ने इसे बाज़ार में पेश करने का दावा 2016 में ही किया था.

रोबोट निष्क्रिय करता है बम को

रोबोट निष्क्रिय करता है बम को

अभी हाल ही में अमरीका के डलास में पुलिस ने एकदम नया तजुर्बा किया. शूटआउट में कई पुलिसवालों को मारने वाले शख़्स को, पुलिस ने एक रोबोट की मदद से किए विस्फोट से मार दिया.

डलास की पुलिस का कहना था कि उसे ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि हमलावर बहुत शातिर था. उसे पकड़ने या मारने के चक्कर में ही कई पुलिसवालों की जान चली गई थी.

तब पुलिस ने एक और जान गंवाने का जोखिम लेने की जगह, हमलावर को खत्म करने के लिए रोबोट का इस्तेमाल किया.

इस घटना के बाद ख़तरनाक मिशन पर भेजे जाने वाले रोबोट पर पूरी दुनिया में चर्चा तेज़ हो गई.

एलईडी ने बचाई ढ़ाई करोड़ की बिजली!

एलईडी ने बचाई ढ़ाई करोड़ की बिजली!

मोदी सरकार की देश में बिजली संकट से निपटने के लिए एलईडी बल्ब से देश को रोशन करने की मुहिम लोगों को रास आने लगी है। सरकार ने घरेलू किफायती लाइटिंग कार्यक्रम के तहत सामने आए नतीजों में दावा किया है कि देश में पांच करोड़ एलईडी बल्ब वितरित हुए और 2500 करोड़ रुपये की बिजली बचत दर्ज की गई है। मसलन एलईडी बल्ब जलाने से रोजाना 1.75 करोड़ किलोवॉट बिजली की बचत होने का अनुमान लगाया गया है।

कृत्रिम अग्न्याशय 2018 तक उपलब्ध हो सकते हैं : वैज्ञानिक

कृत्रिम अग्न्याशय 2018 तक उपलब्ध हो सकते हैं : वैज्ञानिक

कृत्रिम अग्न्याशय 2018 तक उपलब्ध हो सकते हैं : वैज्ञानिक
मधुमेह के रोगियों के रक्त में ग्लूकोज का निरीक्षण करने वाले और शरीर में प्रवेश करने वाले इंसुलिन का स्तर स्वत: ही सही करने वाले कृत्रिम अग्नाशय 2018 तक उपलब्ध हो सकते हैं.

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