पौधे की उत्पादकता बढ़ाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान ने किया समझौता

पौधे की उत्पादकता बढ़ाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा क्यू गार्डंस के बीच संयुक्त अनुसंधान हेतु समझौता

इस छह वर्षीय समझौते से जलवायु परिवर्तन, दबाव जीवविज्ञान, उच्च स्तरीय कृषि तथा पोषण और संरक्षण विज्ञान से जुड़े संयुक्त अनुसंधान परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

वनस्पति विज्ञान तथा संरक्षण से जुड़े ब्रिटेन के विश्व प्रसिद्ध संगठन क्यू रॉयल बॉटेनिकल गार्डेंस ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत स्थानीय रूप से उगने वाले पौधों की प्रजातियों पर अनुसंधान कर उनके विभिन्न महत्वपूर्ण गुणों का विकास किया जाएगा। उनके प्रमुख गुणों में शामिल होंगे- रोगों के प्रति प्रतिरक्षा, पोषण गुणवत्ता तथा दबाव सहनशीलता। पौधों की ऐसी उपेक्षित और अप्रयुक्त प्रजातियां (एनयूएस) कृषि, वानिकी तथा उद्यान कृषि में इस्तेमाल होने वाली प्रजातियों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेंगी।

इस छह वर्षीय सहयोग से जलवायु परिवर्तन, दबाव जीवविज्ञान, उच्च स्तरीय कृषि तथा पोषण और संरक्षण विज्ञान से जुड़े संयुक्त अनुसंधान परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अंतर्गत आने वाले विषयों में शामिल होंगे- बीज पारिस्थितिकी, उच्च मूल्य वाले तिलहनों का लक्षण निर्धारण करना, खर-पतवार जीवविज्ञान तथा बीज सुषुप्तता, ऑर्किड बीज जैवप्रौद्योगिकी, फलदार वृक्ष का क्रायोप्रिजर्वेशन तथा बीज बैंक। दोनों ही संगठन आपस में कर्मचारियों का आदान-प्रदान करेंगे, पीएचडी तथा मास्टर्स करने वाले छात्रों को सह-निर्देशित करेंगे तथा वनस्पति जैवप्रौद्योगिकी तथा संरक्षण के क्षेत्र में वार्षिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का आयोजन करेंगे।

आइसीएआर के निदेशक, प्रो. अयप्पन ने कहा:

यह समझौता हमारे लिए काफी महत्व का है, क्योंकि यह आइसीएआर समेत राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली और क्यू के लिए संयुक्त रूप से नए अवसर उपलब्ध कराएगा। मुझे न केवल दोनों देशों के शोधकर्ताओं के बीच संवाद में तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि इससे युवा अनुसंधानकर्ताओं तथा वैज्ञानिकों के मानव संसाधन विकास में भी काफी मदद मिलेगी।

क्यू के निदेशक श्री रिचर्ड डेवेरेल ने कहा:

मुझे इस महत्वपूर्ण समझौते को अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों के अपने नेटवर्क में शामिल करने में हर्ष हो रहा है, जो क्यू के वैज्ञानिक तथा संरक्षण कार्यों की मौजूदा प्रासंगिकता के लिए काफी अहम है। आने वाले समय में आइसीएआर तथा राष्ट्रीय ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज के साथ काम करने को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं।

अधिक जानकारी:

आइसीएआर/कृषि अनुसंधान तथा शिक्षा विभाग तथा द रॉयल बॉटेनिक गार्डंस, क्यू के बीच होने वाले इस पहले औपचारिक समझौते पर गत 13 फरवरी 2014 को हस्ताक्षर किया गया।

रॉयल बॉटेनिकल गार्डंस, क्यू दुनिया का एक प्रमुख वनस्पति उद्यान है, जहां वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान करने और वनस्पतियों तथा कवकों की विविधता पर जानकारी साझा करने की व्यवस्था है। यह भविष्य में दुनिया भर की वनस्पतियों की रक्षा करने, उनके विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने तथा पेड़-पौधों तथा पर्यावरण के प्रति सम्मान जगाने के प्रयासों में मदद करता है। क्यू गार्डंस यूनेस्को का एक विरासत स्थल है, जो एक गैर-विभागीय सरकारी निकाय है, जिसे ब्रिटेन सरकार के पर्यावरण, खाद्य तथा ग्रामीण मामले विभाग (डीईएफआरए) से वित्तीय सहायता मिलती है। क्यू का बीज संरक्षण विभाग एक वैश्विक वनस्पति संरक्षण नेटवर्क का संचालन करता है, जिसे मिलेनियम सीड बैंक पार्टनरशिप के नाम से जाना जाता है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) कृषि अनुसंधान तथा शिक्षा विभाग (डीएआरई), भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। यह परिषद पूरे देश भर में उद्यान कृषि, वानिकी, मत्स्यपालन तथा पशुपालन विज्ञान समेत कृषि क्षेत्र में होने वाले अनुसंधान तथा शिक्षण के बीच समंवय स्थापित करने तथा मार्गदर्शन प्रदान करने वाला एक शीर्ष निकाय है।