सांस लेने की तकनीक प्राणायाम और ध्यान

सांस लेने की तकनीक प्राणायाम और ध्यान

सांस का नियंत्रण और विस्तार करना ही प्राणायाम है। साँस लेने की उचित तकनीकों का अभ्यास रक्त और मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन देने के लिए, अंततः प्राण या महत्वपूर्ण जीवन ऊर्जा को नियंत्रित करने में मदद करता है । प्राणायाम भी विभिन्न योग आसन के साथ साथ चलता जाता है।  योग आसन और प्राणायाम का संयोग शरीर और मन के लिए, शुद्धि और आत्म अनुशासन का उच्चतम रूप माना गया है। प्राणायाम तकनीक हमें ध्यान का एक गहरा अनुभव प्राप्त करने हेतु भी तैयार करती है।

  1. कोई भी योगासन करते समय यदि आप अपने शरीर को फैला रहे हैं तो सांस अंदर ले|  जैसे कि, यदि आप योगासन करते समय अपने हाथों को फैला रहे हैं अथवा पीछे की तरफ झुक रहे हैं तब सास अंदर ले|
  2. कोई भी योगासन करते समय यदि आप शरीर को सिकोड़ रहे हैं तब सांस को बाहर छोड़े| जैसे कि, यदि आप योगासन करते समय आगे की ओर झुक रहे हैं अथवा मुड़ रहे हैं तब सांस को बाहर की ओर छोड़े|
  3. योगासन करते समय तब तक सांस को न रोकें जब तक आपको इसके लिए कोई निर्देश न दिया गया हो| यदि आप योगासन करते हुए सांस को रोक रहे हैं तो इसका अर्थ यह है कि आप आसन में पूरी तरह विश्राम नहीं कर रहे|

योग शरीर व मन का विकास करता है|योग के शारीरिक और मानसिक लाभ हैं परंतु इसका उपयोग किसी दवा आदि की जगह नही किया जा सकता| यह आवश्यक है की आप यह योगासन किसी प्रशिक्षित  प्रशिक्षक के निर्देशानुसार ही सीखें और करें| यदि आपको कोई शारीरिक दुविधा है तो योगासन करने से पहले अपने डॉक्टर या किसीभी श्री श्री योग प्रशिक्षक से अवश्य संपर्क करें| 

प्राणायाम दो शब्दो से बना है - प्राण यानि जीवन शक्ति और आयाम यानी नियमित करना। श्वास के सामान्य प्रतिमान को हम प्राणायाम के द्वारा तोड़ते है और श्वास ध्यान दे पाते है । श्वास पर ध्यान देने से हम मन को भी प्रभावित कर पाते है। इसलिए प्राणायाम करने से शरीर में भरपूर प्राण शक्ति का प्रवाह होता है औऱ व्यक्ति तरो ताज़ा महसूस करता है।

  •  

Vote: 
No votes yet