क्यों मच्छर के काटने पर खुजली होती है जानिए

क्यों मच्छर के काटने पर खुजली होती है जानिए

 मच्छर और उसके साथ जुड़े सभी अप्रिय चीजें हैं। चलो यह समझते हैं कि मच्छरों रक्त पीता है और वास्तव में, मच्छर के काटने के कारण खुजली होती है।

मच्छर कौन है जानिये

ल्यूकेमिया: लक्षणों को जानिये यह क्या है

ल्यूकेमिया: लक्षणों को जानिये यह क्या है

तीव्र और पुरानी रूपों के लक्षण अलग-अलग हैं। जब एक पुराने रोगी लगातार बीमारियों का सामना कर रहा है जो अन्य बीमारियों के लक्षणों से भ्रमित हो सकता है। यह तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए कि ये सभी बीमारियां स्थायी नहीं हैं, लेकिन दिखाई देती हैं और पूरी तरह अप्रत्याशित रूप से गायब हो जाती हैं पुरानी ल्यूकेमिया के साथ, काम करने की क्षमता हमेशा कम होती है। यहां तक ​​कि छोटे से शारीरिक श्रम को बहुत मेहनत के साथ किया जाएगा। जीर्ण ल्यूकेमिया, जिन लक्षणों पर हम विचार कर रहे हैं, नींद की गड़बड़ी का कारण बनता है यह सिर्फ अनिद्रा के बारे में नहीं है, लेकिन नींद की निरंतर इच्छा के बारे में दूसरे मामले में, क

पानी पीने का मन नहीं होता तो इन भोजन को करें डायट में शामिल

पानी पीने का मन नहीं होता तो इन भोजन को करें डायट में शामिल

सर्दियों मे आपके शरीर में अक्सर पानी की कमी देखने को मिलती है क्योंकि इस समय आप पानी बहुत कम पीने लगते है। इसलिए आपकी सेहत को खतरा रहता है। आपके शरीर को सर्दियों में भी पानी की काभी आवश्यकता रहती है।

आपको सर्दियों में कम से कम 10 गिलास पानी रोजाना पीना चाहिए। आपको बता दें कि अगर आप ऐसा नहीं करते है तो आपके शरीर में ऊर्जा कम होने लगती है और आपका शरीर बीमार हो सकता है।

आज आपको बताएंगे कि अगर आप पानी नहीं पी पाते है तो कुछ भोजन को अपनी डायट में शामिल कर सकते है जो कि आपके शरीर से पानी की कमी सर्दियों में नहीं होनो देते है।

राजमा की खेती कैसे करें और कब

राजमा की खेती कैसे करें और कब

समस्तीपुर। राजमा की खेती रबी ऋतु में की जाती है। अभी इसके लिए उपयुक्त समय है। यह मैदानी क्षेत्रों में अधिक उगाया जाता है। राजमा की अच्छी पैदावार हेतु 10 से 27 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान की आवश्यकता पड़ती है। राजमा हल्की दोमट मिट्टी से लेकर भारी चिकनी मिट्टी तक में उगाया जा सकता है।

राजमा उन्नतशील प्रजातियां है

राजमा में प्रजातियां जैसे कि पीडीआर 14, इसे उदय भी कहते है। मालवीय 137, बीएल 63, अम्बर, आईआईपीआर 96-4, उत्कर्ष, आईआईपीआर 98-5, एचपीआर 35, बी, एल 63 एवं अरुण है।

खेत की तैयारी

यौगिक ध्यान से लाभ

महर्षि पतंजलि के योगसूत्र में ध्यान भी एक सोपान है।
चित्त को एकाग्र करके किसी एक वस्तु पर केन्द्रित कर देना ध्यान कहलाता है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि भगवान का ध्यान करते थे। ध्यान की अवस्था में ध्यान करने वाला अपने आसपास के वातावरण को तथा स्वयं को भी भूल जाता है। ध्यान करने से आत्मिक तथा मानसिक शक्तियों का विकास होता है। जिस वस्तु को चित मे बांधा जाता है उस मे इस प्रकार से लगा दें कि बाह्य प्रभाव होने पर भी वह वहाँ से अन्यत्र न हट सके, उसे ध्यान कहते है।
ध्यान से लाभ
ऐसा पाया गया है कि ध्यान से बहुत से मेडिकल एवं मनोवैज्ञानिक लाभ होते हैं।

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