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मिडिया

फिज़िका माइंड पोर्टल में आपका हार्दिक स्वागत है ,फिज़िका माइंड आपका अपना वेब पोर्टल है इस वेबसाइट में आप हमें समाज से जुडी न्यूज़, कृषि से जुडी न्यूज़ , शिक्षा,समाज न्यूज़ पेपर कटिंग , न्यूज़ के विडियो क्लिप भेज सकते है समाज से जुडी सभी जानकारियो को एक ही जगह समाहित करने का प्रयास किया गया है।

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घरबैठे कंप्यूटर सर्टिफिकेट कोर्स

फिजिका माइड भारत सरकार के लघुरूप सुक्षम मंत्रालय से पंजीकृत संस्था है | संस्था २००४ से सेवा में प्रयासरत है | फिज़िका माइंड के द्वारा अब आप घर बैठे कंप्यूटर के सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं जो कि आपको लेटेस्ट ज्ञान से भरपूर होगा और सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी को आप सीखेंगे|

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व्यापार में सफलता के उपाय

आप की कामयाबी को ही हम अपनी कामयाबी मानते हैं आपके व्यापार को सफल बनाने के लिए फिज़िका माइंड आपके लिए वेबसाइट और Android ऐप बनाना चाहता है , और भी बहुत सारे मार्केटिंग के उपाय हमारे पास आप के लिए हैं | हमारी सफलता का कारवां बढ़ता ही जा रहा है जिसमें आपका भी स्वागत है

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ओशो डाइनैमिक ध्‍यान

ओशो डाइनैमिक ध्‍यान

ओशो डाइनैमिक ध्‍यान ओशो के निर्देशन में तैयार किए गए संगीत के साथ किया जाता है। यह संगीत ऊर्जा गत रूप से ध्‍यान में सहयोगी होता है और ध्‍यान विधि के हर चरण की शुरूआत को इंगित करता है|

निर्देश
डायनमिक ध्‍यान आधुनिक मनुष्‍य को ध्‍यान अपलब्‍ध करवाने के लिए ओशो के प्रमुख योगदानों में से एक है।

नासाग्र को देखना (ध्‍यान)—ओशो

नासाग्र को देखना (ध्‍यान)—ओशो

लाओत्‍से ने कहा: व्‍यक्‍ति नासाग्र की और देखे।

क्‍यों—क्‍योंकि इससे मदद मिलती है, यह प्रयोग तुम्‍हें तृतीय नेत्र की रेखा पर ले आता है। जब तुम्‍हारी दोनों आंखें नासाग्र पर केंद्रित होती है तो उससे कई बातें होती है। मूल बात यह है कि तुम्‍हारा तृतीय नेत्र नासाग्र की रेखा पर है—कुछ इंच ऊपर, लेकिन उसी रेखा में। और एक बार तुम तृतीय नेत्र की रेखा में आ जाओ तो तृतीय नेत्र का आकर्षण उसका खिंचाव, उसका चुम्‍बकत्‍व रतना शक्‍तिशाली है कि तुम उसकी रेखा में पड़ जाओं तो अपने बावजूद भी तुम उसकी और खींचे चले आओगे। तुम बस ठीक उसकी रेखा में आ जाना है, ताकि तृतीय नेत्र का आकर्षण, गुरुत्वाकर्षण सक्रिय हो जाए। एक बार तुम ठीक उसकी रेखा में आ जाओं तो किसी प्रयास की जरूरत नहीं है।

क्या जीवन को सीधा देखना संभव नहीं है?

क्या जीवन को सीधा देखना संभव नहीं है?

शिक्षाशास्त्र से भी मेरी दृष्टि भिन्न और विरोधी हो सकती है। मैं न तो शिक्षाशास्त्री ही हूं और न समाजशास्त्री ही। किंतु यह सौभाग्य की बात है। क्योंकि जो जितना अधिक शास्त्र को जानते हैं, उनके लिए जीवन को जानना उतना ही कठिन हो जाता है। शास्त्र सदा ही सत्य के जानने में बाधा बन जाते हैं। शास्त्र से भरे हुए चित्त में चिंतन समाप्त हो जाता है। चिंतन के लिए तो निर्भार और पक्षपात मुक्त चित्त चाहिए न!

ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं

ध्वनि विशेष को नाद

ध्वनि, झरनों की झरझर, पक्षियों का कूजन किसने नहीं सुना है। प्रकृति प्रदत्त जो नाद लहरी उत्पन्न होती है, वह अनहद नाद का स्वरूप है जो कि प्रकृति की स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन जो नाद स्वर लहरी, दो वस्तुओं के परस्पर घर्षण से अथवा टकराने से पैदा होती है उसे लौकिक नाद कहते हैं।
वातावरण पर अपने नाद को बिखेरने के लिये, बाह्य हवा पर कंठ के अँदर से उत्पन्न होने वाली वजनदार हवा जब परस्पर टकराती है, उसी समय कंठ स्थित 'स्वर तंतु' (Vocal Cords) नाद पैदा करते हैं। अत: मानव प्राणी द्वारा निर्मित आवाज लौकिक है।

 

नया गूगल ग्‍लास : बिना कांच के

गूगल ग्‍लास

गूगल अपने बहुचर्चित प्रोजेक्‍ट गूगल ग्‍लास को दोबारा लॉन्‍च करने की तैयारियां पूरी करने में जुटा हुआ है। ऐसी खबरें हैं कि कंपनी बिना ग्‍लास वाला गूगल ग्‍लास भी लॉन्‍च कर सकती है।

यानी नए गूगल ग्‍लास को बिना ग्‍लास के लॉन्‍च किया जा सकता है लेकिन इसमेमं ऑडियो की सुविधा बनी रहेगी। ग्‍लास प्रोजेक्‍ट पर गूगल के आरा प्रोजेक्‍ट की टीम ही काम कर रही है।

आपको याद होगा कि गूगल ग्‍लास का पहला प्रोटोटाइप 2013 में पेश किया गया था, हालांकि तकनीकी कारणों से कंपनी ने उसे जनवरी 2015 में बाजार से वापस ले लिया था।

सांस लेने की तकनीक प्राणायाम और ध्यान

सांस लेने की तकनीक प्राणायाम और ध्यान

सांस का नियंत्रण और विस्तार करना ही प्राणायाम है। साँस लेने की उचित तकनीकों का अभ्यास रक्त और मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन देने के लिए, अंततः प्राण या महत्वपूर्ण जीवन ऊर्जा को नियंत्रित करने में मदद करता है । प्राणायाम भी विभिन्न योग आसन के साथ साथ चलता जाता है।  योग आसन और प्राणायाम का संयोग शरीर और मन के लिए, शुद्धि और आत्म अनुशासन का उच्चतम रूप माना गया है। प्राणायाम तकनीक हमें ध्यान का एक गहरा अनुभव प्राप्त करने हेतु भी तैयार करती है।

प्राणायाम के लाभ और कैसे करे

प्राणायाम  के लाभ

प्राण का अर्थ, ऊर्जा अथवा जीवनी शक्ति है तथा आयाम का तात्पर्य ऊर्जा को नियंत्रित करनाहै। इस नाडीशोधन प्राणायाम के अर्थ में प्राणायाम का तात्पर्य एक ऐसी क्रिया से है जिसके द्वारा प्राण का प्रसार विस्तार किया जाता है तथा उसे नियंत्रण में भी रखा जाता है.

यहाँ 3 प्रमुख प्राणायाम के बारे में चर्चा की जा रही है:-

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

 प्राणायाम की विधि:-

आंवला खाये, निरोगी हो जाए

आंवला खाये, निरोगी हो जाए

आंवले में एंटी ओक्सिडेंट होते हैं जो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाता है और ये मौसम में होने वाले बदलाव के कारन होने वाले वाइरल संक्रमण से भी बचाता है.

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