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घरबैठे कंप्यूटर सर्टिफिकेट कोर्स

फिजिका माइड भारत सरकार के लघुरूप सुक्षम मंत्रालय से पंजीकृत संस्था है | संस्था २००४ से सेवा में प्रयासरत है | फिज़िका माइंड के द्वारा अब आप घर बैठे कंप्यूटर के सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं जो कि आपको लेटेस्ट ज्ञान से भरपूर होगा और सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी को आप सीखेंगे|

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व्यापार में सफलता के उपाय

आप की कामयाबी को ही हम अपनी कामयाबी मानते हैं आपके व्यापार को सफल बनाने के लिए फिज़िका माइंड आपके लिए वेबसाइट और Android ऐप बनाना चाहता है , और भी बहुत सारे मार्केटिंग के उपाय हमारे पास आप के लिए हैं | हमारी सफलता का कारवां बढ़ता ही जा रहा है जिसमें आपका भी स्वागत है

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प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली क्या है ?

प्राकृतिक चिकित्सा

प्राकृतिक−चिकित्सा−प्रणाली का अर्थ है प्राकृतिक पदार्थों विशेषतः प्रकृति के पाँच मूल तत्वों द्वारा स्वास्थ्य−रक्षा और रोग निवारण का उपाय करना। विचारपूर्वक देखा जाय तो यह कोई गुह्य विषय नहीं है और जब तक मनुष्य स्वाभाविक और सीधा−सादा जीवन व्यतीत करता रहता है तब तक वह बिना अधिक सोचे−विचारे भी प्रकृति की इन शक्तियों का प्रयोग करके लाभान्वित होता रहता है। पर जब मनुष्य स्वाभाविकता को त्याग कर कृत्रिमता की ओर बढ़ता है, अपने रहन−सहन तथा खान−पान को अधिक आकर्षक और दिखावटी बनाने के लिये प्रकृति के सरल मार्ग से हटता जाता है तो उसकी स्वास्थ्य−सम्बन्धी उलझनें बढ़ने लगती हैं और समय−समय पर उसके शरीर में कष Read More : प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली क्या है ? about प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली क्या है ?

योगासनों का सबसे बड़ा गुण

योगासनों का सबसे बड़ा गुण

 यह हैं कि वे सहज साध्य और सर्वसुलभ हैं। योगासन ऐसी व्यायाम पद्धति है जिसमें न तो कुछ विशेष व्यय होता है और न इतनी साधन-सामग्री की आवश्यकता होती है। योगासन अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं। आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोड़ने और ऐंठने वाली क्रियायें करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियायें भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापिस मिल जाती है। शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अलग महत्त्व है। Read More : योगासनों का सबसे बड़ा गुण about योगासनों का सबसे बड़ा गुण

जामुन की खेती

गहरे काले रंग का अंडाकार छोटा सा फल है जामुन, हल्के खट्टे, मीठे और कसौले स्वाद से भरपूर इस फल को खाने के बाद जीभ का रंग बैंगनी हो जाता है। बचपन में जामुन खाने के बाद अधिकतर बच्चे अपनी बैंगनी जीभ एक दूसरे को दिखाते रहते हैं.... लेकिन बचपन में जामुन के स्वाद और खेल में हमें यह नही पता होता कि जामुन न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी है, बल्कि इसकी खेती भी किसानों के लिए आर्थिक तौर पर लाभदायक है।

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सेब की खेती

स्थान का चुनाव

फलों का बाग के लिए स्थान चुनते समय निम्नलिखि बातें ध्यान में रखनी चाहिए :

१. सदा ऐसे स्थान को बाग लगाने के लिए चुनना चाहिए, जहाँ की भूमि उपजाऊ हो। कंकड़ पत्थरवाली और ऊँची नीची जमीन फल के पेड़ों के लिए उपयुक्त नहीं होती। क्षारवाली, जिसमें नोना हों और रेतवाली भूमि भी फल के पेड़ों के लिए खराब होती है। हलकी दमट भूमि, जिसमें पानी का निकास अच्छा हो, सब प्रकार के फलों के पेड़ों के लिए उत्तम होती है। Read More : सेब की खेती about सेब की खेती

मयूरासन

इस आसन में आकृति मोर के समान बनती है इसलिए इसे मयूरासन कहते हैं। इस आसन को प्रतिदिन करने से कभी मधुमेह रोग के आप शिकार नही होते।

विधि-   Read More : मयूरासन about मयूरासन

योग से सेहत को कितना फायदा?

योग से सेहत को कितना फायदा?

आना ट्रोएकेस: हम जानते हैं कि आजकल ज्यादातर बीमारियों का तनाव से कुछ ना कुछ संबंध होता है. रोजमर्रा के जीवन का तनाव शरीर के कई हिस्सों, हृदय के रोग से लेकर शरीर के पूरे प्रतिरोधी तंत्र पर पड़ता है. हजारों सालों से योग में इन तनावों से निपटने के तरीकों का विकास हुआ है, जिनसे जीवन में तनाव से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.

किन बीमारियों में योग के फायदे सिद्ध हो चुके हैं? Read More : योग से सेहत को कितना फायदा? about योग से सेहत को कितना फायदा?

स्नान संबंधी आचार

स्नान संबंधी आचार

१. स्नान का महत्त्व

        ‘स्नान करने से जीव के देह के सर्व ओर आए कष्टदायक शक्ति के आवरण एवं देह के रज-तम का उच्चाटन होता है तथा देह रोम-रोम में चैतन्य ग्रहण करने योग्य बनती है । मुखशुद्धि एवं शौचक्रिया के कारण भी जीव के देह से बाहर न निकलनेवाले कष्टदायक घटकों का स्नान के माध्यम से विघटन होता है ।’

२. स्नान करने के लाभ

अ. ‘स्नान के कारण जीव की देह के रज-तम कणों की मात्रा न्यून होती है तथा जीव वायुमंडल में प्रक्षेपित सत्त्वतरंगें सहजता से ग्रहण कर सकता है । Read More : स्नान संबंधी आचार about स्नान संबंधी आचार

साप्ताहिक ध्यान : काम ऊर्जा से मुक्ति

काम ऊर्जा से मुक्ति

जब काम ऊर्जा वैसी नहीं बह रही जैसी बहनी चाहिए, तो यह बहुत सी समस्याएं पैदा करती है।

 

यदि काम ऊर्जा बिल्कुल सही बह रही है तब हर चीज सही गूंजेगी, हर चीज लयबद्ध रहती है। तब तुम सरलता से सुर में हो और एक किस्म का तारतम्य होगा। एक बार काम ऊर्जा कहीं अटक जाती है तो सारे शरीर पर प्रभाव होते हैं। और पहले वे दिमाग में आएंगे हैं, क्योंकि सेक्स और दिमाग विपरीत धुरी हैं। 

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