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घरबैठे कंप्यूटर सर्टिफिकेट कोर्स

फिजिका माइड भारत सरकार के लघुरूप सुक्षम मंत्रालय से पंजीकृत संस्था है | संस्था २००४ से सेवा में प्रयासरत है | फिज़िका माइंड के द्वारा अब आप घर बैठे कंप्यूटर के सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं जो कि आपको लेटेस्ट ज्ञान से भरपूर होगा और सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी को आप सीखेंगे|

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व्यापार में सफलता के उपाय

आप की कामयाबी को ही हम अपनी कामयाबी मानते हैं आपके व्यापार को सफल बनाने के लिए फिज़िका माइंड आपके लिए वेबसाइट और Android ऐप बनाना चाहता है , और भी बहुत सारे मार्केटिंग के उपाय हमारे पास आप के लिए हैं | हमारी सफलता का कारवां बढ़ता ही जा रहा है जिसमें आपका भी स्वागत है

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ग्लास डिस्क' पर अरबों साल तक स्टोर रहेंगे डेटा

ग्लास डिस्क

स्टोरेज डिवाइसेज के क्षेत्र में अब एक ऐसी तकनीक आ गई है, जिससे अरबों साल तक आपके डेटा स्टोर रहेंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ हैम्पटन के शोधकर्ताओं ने साधारण ग्लास जैसे दिखने वाले "इंटरनल स्टोरेज सिस्टम" का निर्माण किया है। इस पर लेजर तकनीक के जरिए 360 टीबी (टेराबाइट्स) तक का डेटा रिकॉर्ड किया जा सकता है।

ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं ने इस "सुपरमैन ग्लास क्रिस्टल" का निर्माण किया है। फिलहाल शोधकर्ता ऐसी कंपनियों की तलाश में हैं जो इसे मार्केट में उपलब्ध करवा सके। ऐसे स्टोर होगा डेटाग्लास डिस्क में तीन लेयर्स हैं जिनमें पांच माइक्रोमीटर्स की दूरी है।

जब पृथ्वी पर अधिकतर प्रजातियां नष्ट हो गईं...

जब पृथ्वी पर अधिकतर प्रजातियां नष्ट हो गईं...

हम आप जो भी चीज़ देख रहे हैं, उसका अतीत बन जाना तय है. पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व भी इसमें शामिल है. एक दिन ये भी अतीत बन जाएगा. लेकिन कब?

आपको भले यकीन ना हो, लेकिन जीवाश्मों के अध्ययन के मुताबिक पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को करीब 3.5 अरब साल हो चुके हैं. इतने समय में पृथ्वी ने कई तरह की आपदाएँ झेली हैं - जम जाना या अंतरिक्ष की चट्टानों का टकराना, प्राणियों में बड़े पैमाने पर ज़हर का फैलना, जला कर सब कुछ राख कर देने वाली रेडिएशन....

wi-fi से 100 गुना तेज़ है li-fi

wi-fi  से 100 गुना तेज़ है li-fi

अब डेटा ट्रांसफर के लिए ऐसी तकनीक आ चुकी है जो वाई-फ़ाई के मुक़ाबले 100 गुना तेज़ है.

और इस तकनीक को विकसित करने वाले हैं भारतीय तकनीशियन. लाई-फ़ाई का इसी सप्ताह एस्तोनिया के टालिन में परीक्षण किया गया.

लाई-फ़ाई से वाई-फ़ाई के मुक़ाबले आप 100 गुना तेज़ इंटरनेट चला सकते हैं और इसकी रफ़्तार एक गीगाबिट प्रति सेकेंड तक हो सकती है.

स्टार्टअप कंपनी वेलमेनी के सह संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक सोलंकी ने बीबीसी को बताया कि यह तकनीक कॉल ड्रॉप जैसी समस्याओं के लिए रामबाण साबित हो सकती है.

मंगल पर मीथेन की मौजूदगी से जीवन के संकेत

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वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के उल्कापिंडों में मीथेन के निशान पाए हैं जो जीवन के मौजूदगी की तरफ इशारा करती है. वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के उल्कापिंडों में मीथेन के निशान पाए हैं और यह एक ऐसी खोज है जो रक्ताभ ग्रह पर गर्म, नम और रासायनिक रूप से प्रतिक्रियाशील वातावरण की मौजूदगी की तरफ इशारा करती है, वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह से जुड़ी ज्वालामुखीय चट्टानों के उल्कापिंडों के नमूनों की जांच की है, उल्कापिंडों में मंगल ग्रह के वायुमंडल के ही अनुपात और उसी समस्थानिक संरचना में गैसें पाई गई हैं, सभी छह नमूनों में मीथेन गैस पाई गई है.

क्या आप वही रंग देखते हैं जो मैं देखता हूं?

क्या आप वही रंग देखते हैं जो मैं देखता हूं?

कुछ हफ्ते पहले एक तस्वीर में ड्रेस का रंग, एक बड़ा मसला बनकर इंटरनेट पर चर्चित रहा.

कहीं भी उस ड्रेस के रंग को लेकर मत एक जैसा नहीं था. दफ्तरों में, घरों में जैसे दो ख़ेमे बन गए - एक, जिन्हें ड्रेस गोल्ड-व्हाइट दिखी और दूसरे, जिन्हें ड्रेस ब्लू-ब्लैक दिखी.

तो फिर असलियत क्या है? वही तस्वीर, दो इंसानों को नंगी आंख से अलग-अलग रंग की कैसे दिख सकती है?

दिमाग पर है सब निर्भर

दरअसल दिलचस्प बात ये जानने में है कि किसी वस्तु के रंग को लेकर हमारे दिमाग में क्या चलता है. क्या आप जानते हैं इसका विज्ञान क्या है?

नष्ट होते तारों से आया धरती पर सोना

सोना पुराने समय से ही मनुष्य को आकर्षित करता रहा है. इस सोने की खोज में कइयों ने अपनी जान गंवाई. इसी सोने के कारण कई युध्द लड़े गये. एक ओर जहां यह आभूषण बनाने के काम आता है तो दूसरी ओर इसकी कमी इसका मूल्य बढ़ा देती है.

सोना केवल धरती पर ही कम मात्रा में नहीं है, बल्कि ब्रह्मांड में भी इसकी कमी है. पिछले दिनों एक खगोलीय घटना के विश्लेषण से वैज्ञानिकों ने यह संकेत दिया कि सोने का जन्म नष्ट होते तारों के टकराने से हुआ है. कार्बन और लोहे के विपरीत सोना तारों के अंदर नहीं पैदा होता है बल्कि इसका जन्म और भी जटिल घटना से होता है.

पृथ्वी के थे दो चांद

पृथ्वी के थे दो चांद

शोधकर्ताओं ने अध्ययन के आधार पर परिकल्पना की है कि संभवतः चार अरब साल पहले पृथ्वी का एक दूसरा चांद था जो धीमी गति से बड़े चांद के साथ टकराया और नष्ट हो गया। इस परिकल्पना का विस्तृत ब्यौरा नेचर पत्रिका में छपा है। शोधकर्ताओं ने संकेत दिया है कि दूसरा छोटा चांद नष्ट होने से पहले लाखों साल तक अस्तित्व में रहा। वैज्ञानिकों का मानना है कि धीमी गति से छोटे चांद के बड़े चांद से टकराने के कारण ही संभवतः चांद की पृथ्वी से नजर आने वाली सतह पर कई खाइयां है (जिन्हें साहित्यकार चांद में दाग बताते हैं), लेकिन चांद का जो भाग पृथ्वी से नजर नहीं आता है, उस ओर इस टकराव की वजह से लगभग 3000 मीटर ऊंचे पहाड़ पैद

चमकेगा पृथ्वी पर दूसरा सूरज

कब चमकेगा पृथ्वी पर दूसरा सूरज

कहानी के मुताबिक एक असाधारण ग्रहण की वजह से जब उस ग्रह पर उन छहों सूर्यों की रोशनी आनी बंद हो गई तो उसके निवासियों ने रोशनी को बचाए रखने की जिद में जमीन पर मौजूद हर चीज को जला डाला। पर क्या सचमुच किसी नक्षत्र मंडल में एक से ज्यादा सूर्य हो सकते हैं?

इसाक असिमोव ने 1941 में 'नाइटफॉल' नाम की एक विज्ञान कथा लिखी थी, जिसने उस जमाने में दुनिया भर के खगोलविदों को सोचने पर मजबूर कर दिया था। उस गल्प में एक ऐसी दुनिया की कल्पना की गई थी, जिसमें छह-छह सूर्य मौजूद हैं। 

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