कौशल भारत कुशल भारतप्रधानमंत्री कौशल विकास योजना

कौशल भारत कुशल भारत

मिडिया

फिज़िका माइंड पोर्टल में आपका हार्दिक स्वागत है ,फिज़िका माइंड आपका अपना वेब पोर्टल है इस वेबसाइट में आप हमें समाज से जुडी न्यूज़, कृषि से जुडी न्यूज़ , शिक्षा,समाज न्यूज़ पेपर कटिंग , न्यूज़ के विडियो क्लिप भेज सकते है समाज से जुडी सभी जानकारियो को एक ही जगह समाहित करने का प्रयास किया गया है।

Read more

घरबैठे कंप्यूटर सर्टिफिकेट कोर्स

फिजिका माइड भारत सरकार के लघुरूप सुक्षम मंत्रालय से पंजीकृत संस्था है | संस्था २००४ से सेवा में प्रयासरत है | फिज़िका माइंड के द्वारा अब आप घर बैठे कंप्यूटर के सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं जो कि आपको लेटेस्ट ज्ञान से भरपूर होगा और सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी को आप सीखेंगे|

Read more

व्यापार में सफलता के उपाय

आप की कामयाबी को ही हम अपनी कामयाबी मानते हैं आपके व्यापार को सफल बनाने के लिए फिज़िका माइंड आपके लिए वेबसाइट और Android ऐप बनाना चाहता है , और भी बहुत सारे मार्केटिंग के उपाय हमारे पास आप के लिए हैं | हमारी सफलता का कारवां बढ़ता ही जा रहा है जिसमें आपका भी स्वागत है

Read more

संकल्प कैसे काम करता है?

अचेतन है संकल्प का मार्ग, और ध्यान की सीढ़ी है संकल्प ।

हमारा संकल्प बहुत ही क्षीण हो गया है । नाम मात्र को ही रह गया है। सुबह जिस बात का संकल्प हम लेते हैं शाम होते - होते वह बात ही भूला देते हैं । जीवन की छोटी - छोटी बातों को ही हम नहीं समझ पाते हैं, तंबाखू और धूम्रपान जैसे व्यसनों ने हमें अपना गुलाम बना लिया है । रोज यह कह कर कि "आज आखरी बार है... कल से ऐसा नहीं होगा..." हम अपने मन की चालबाजियों में फंसते चले जाते हैं ।

साधक के लिए पहली सीढ़ी शरीर है

साधक के लिए

साधक के लिए पहली सीढ़ी क्या है?

साधक के लिए पहली सीढ़ी शरीर है। लेकिन शरीर के संबंध में न तो कोई ध्यान है, न शरीर के संबंध में कोई विचार है। और थोड़े समय से नहीं, हजारों वर्षों से शरीर उपेक्षित है। यह उपेक्षा दो प्रकार की है। एक तो उन लोगों ने शरीर की उपेक्षा की है, जिन्हें हम भोगी कहते हैं—जों जीवन में खाने—पीने और कपड़े पहनने के अतिरिक्त और किसी अनुभव को नहीं जानते। उन्होंने शरीर की उपेक्षा की है, शरीर का अपव्यय, शरीर को व्यर्थ खोया है, शरीर की वीणा को खराब किया है।

संन्यासी और गृहस्थी में क्या फर्क है?

संन्यासी और गृहस्थी

संन्यासी और गृहस्थी में क्या फर्क है?

घर छोड़कर भागो मत - घर में ही संन्यासी की तरह रहो

संन्यासी और गृहस्थी में जगह का फर्क नहीं है, भाव का फर्क है। संन्यासी और गृहस्थी में परिस्थिति का फर्क नहीं है, मनःस्थिति का फर्क है

ओशो स्टाॅप मेडिटेशन

तुम कहीं भी इसका प्रयोग कर सकते हो। तुम स्नान कर रहे हो; अचानक अपने को कहो: स्टॉप! अगर एक क्षण के लिए भी यह एकाएक रुकना घटित हो जाए तो तुम अपने भीतर कुछ भिन्न बात घटित होते पाओगे। तब तुम अपने केंद्र पर फेंक दिए जाओगे। और तब सब कुछ ठहर जाएगा। तुम्हारा शरीर तो पूरी तरह रुकेगा ही, तुम्हारा मन भी गति करना बंद कर देगा।

ओशो – तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है

ओशो – तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है

एक, तीसरी आँख की ऊर्जा वही है जो ऊर्जा दो सामान्‍य आंखों को चलाती है। ऊर्जा वही है, सिर्फ वह नई दिशा में नए केंद्र की और गति करने लगती है। तीसरी आँख है; लेकिन निष्‍क्रिय है। और जब तक सामान्‍य आंखे देखना बंद नहीं करती, तीसरी आँख सक्रिय नहीं हो सकती है। देख नहीं सकती। उसी उर्जा को यहां भी बहना है। जब उर्जा सामान्‍य आँखो में बहना बंद कर देती है तो वह तीसरी आँख में बहने लगती है। और जब ऊर्जा तीसरी आँख में बहती है तो सामान्‍य आंखों में देखना बंद कर देती है। अब उनके रहते हुए भी तुम उनके द्वारा कुछ नहीं देखते हो। जो ऊर्जा उनमें बहती थी वह वहां से हट कर नये केंद्र पर गतिमान हो जाती है। यह केंद्र दो

प्रत्येक ध्यान के शीघ्र बाद करुणावान रहो

करुणावान व्यक्ति सर्वाधिक धनी होता है, वह सृष्टि के शिखर पर विराजमान है। उसकी कोई परिधि नहीं, कोई सीमा नहीं। वह बस देता है और अपनी रास्ते चला जाता है। वह तुम्हारे धन्यवाद की भी प्रतीक्षा नहीं करता। वह अत्यंत प्रेम से अपनी उर्जा को बांटता है। इसी को मैं स्वास्थ्य्प्रद कहता हूं।

श्वास सजगता : प्राणायाम पूर्वतयारी

श्वसन ही शरिरात जन्मापासून मृत्यूपर्यंत अखंड सुरू असलेली क्रिया आहे. या क्रियेतील श्वास किंवा पूरकाच्या द्वारे हवेतील प्राणवायूच्या स्वरूपात शरिराला उर्जेचा पुरवठा होतो आणि प्रश्वास किंवा रेचकाद्वारे शरिरातील सूक्ष्म मळ असलेल्या रक्तातील कर्बाम्लवायूचे निष्कासन होते.
वातावरणातील हवा शरिरातील श्वसन यंत्रात प्रवेश करण्यासाठी श्वासनलिकेतला हवेचा दाब (758 mm hg) वातावरणातल्या हवेच्या दाबापेक्षा (760mm hg) कमी असतो, त्यामुळे हवा जास्त दाबाकडून कमी दाबाकडे या नियमाप्रमाणे वातावरणातून श्वासनलिकेत प्रवेश करते.
श्वसन प्रक्रिया

Language: 

कैसे लें खुद हाफ बाथ?

सबसे पहले खुद के ल‍िए बाथ टब का इंतजाम करें। इसके बाद इसे आधा गर्म पानी से भरें। इतना गर्म पानी होना चाहिए कि आप इसके तापमान को सहन कर सकें। इस बात का ध्‍यान रखें कि पानी इतना गर्म होना चाहिए कि आपकी त्‍वचा जल न जाएं। पानी का इतना तापमान होना चाहिए कि आप आराम से इसमें कम्‍फर्टटेबल होकर इसमें 10 से 15 मिनट तक गुजार सकें। अच्‍छे रिजल्‍ट के ल‍िए आप पानी में समुद्री नमक और एसेंशियल ऑयल भी मिला सकती है। इससे आप ज्‍यादा आराम महसूस करेंगी। अब आप बाथटब में जाएं और इस बात का ध्‍यान रखें कि आपके शरीर का निचला हिस्‍सा ही पानी में भीगना चाहिए। सिर्फ नाभि तक ही पानी आना चाहिए। अगर ये पानी आपकी नाभि तक आ

Pages

आप भी अपने लेख फिज़िका माइंड वेबसाइट पर प्रकाशित कर सकते है|

आप अपने लेख WhatsApp No 9259436235 पर भेज सकते है जो की पूरी तरह से निःशुल्क है | आप 1000 रु (वार्षिक )शुल्क जमा करके भी वेबसाइट के साधारण सदस्य बन सकते है और अपने लेख खुद ही प्रकाशित कर सकते है | शुल्क जमा करने के लिए भी WhatsApp No पर संपर्क करे. या हमें फ़ोन काल करें 9259436235