इनसोमनिया का कारण है मोबाइल

इनसोमनिया का कारण है मोबाइल

मोबाइल की रेडिएशन से इंसान को इनसोमनिया, सर दर्द और कंफ्यूज होने की परेशानियां हो सकती हैं।

दुनिया का हर तीसरा व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी अनिद्रा का शिकार होता है। आमतौर पर एक व्यस्क पुरुष को सात से आठ घंटे जरूर सोना चाहिए और जब ऐसा नहीं होता तो व्यक्ति कई परेशानियां, जैसे तनाव, थकान और चिड़चिड़ापन होने लगता है। क्रोध, तनाव, चिंता और रोजमर्रा की परेश‍ानियां इसकी वजह हो सकती हैं। डायबिटीज, दिल की बीमारी, उच्च रक्तचाप आदि बीमारियां भी नींद की दुश्मन हो सकती हैं। कैफीन और एल्कोहल का अधिक सेवन, शाम को भारी कसरत, तैलीय भोजन भी अनिद्रा की वजह हो सकती है।आपको नींद की दवायें खाने से बचना चाहिए।

अनिद्रा और कम नींद उन समस्याओं में से है, जिनसे महिलाएं अक्सर ग्रस्त रहती हैं। एक अनुमान के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अनिद्रा और नींद से जुड़ी समस्याएं दोगुनी होती हैं और इन समस्याओं के कारण उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इससे वे कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो जाती हैं। अनिद्रा, जिसे इनसोमनिया भी कहते हैं, से ग्रस्त महिलाएं उच्च रक्त चाप, दिल के दौरे और मस्तिष्क आघात जैसी जानलेवा समस्याओं से ग्रस्त हो सकती हैं।

महिलाएं ज्‍यादा होती हैं शिकार...
अनिद्रा की बीमारी से यूं तो करीब एक तिहाई आबादी ग्रस्त है, लेकिन महिलाओं में इस बीमारी का असर बहुत ज्‍यादा है। हर दूसरी-तीसरी महिला को रात-रात भर नींद नहीं आने की शिकायत होती है। हालांकि नींद न आने के कई कारण हैं, लेकिन मौजूद समय में महिलाओं पर खासकर शहरी महिलाओं पर घर-दफ्तर की दोहरी जिम्मेदारी आने के कारण उत्पन्न तनाव और मानसिक परेशानियों ने भी ज्यादातर महिलाओं की आंखों से नींद चुरा लिया है। वहीं, नौकरीपेशा एवं महत्वाकांक्षी महिलाओं में शराब और सिगरेट का फैशन बढ़ने से भी उनमें यह बीमारी बढ़ी है।

महिलाएं क्‍यों होती हैं शिकार
प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डा. सुनील मित्तल के अनुसार, महिलाओं में कुदरती तौर पर ही अनिद्रा और कम नींद आने की समस्या ज्‍यादा होती है। इसकी बहुत सारी वजहें हैं, जिनमें खास हार्मोन का बनना, ज्‍यादा जिम्मेदारियां होना, डिप्रेशन और एंजाइटी जैसी मानसिक समस्याएं ज्‍यादा होना वगैरह अहम है।
डा. सुनील मित्तल बताते हैं कि अक्सर कई महिलाओं में यह देखा गया है कि उन्हें नींद आने में दिक्कत होती है और बीच रात में या बहुत सबेरे नींद खुल जाती है। इसका इलाज नहीं होने पर दिन भर थकान रहने, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, कार्य क्षमता में कमी, दुर्घटना और चोट लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

क्‍या हैं खतरे
अनिद्रा की शिकार महिलाओं में उच्च रक्त चाप, दिल के दौरे और मस्तिष्क आघात जैसी जानलेवा और गंभीर बीमारियां होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। रोजाना सात-आठ घंटे की नींद जरूरी है, लेकिन अगर अच्छी और गहरी नींद आए तब चार-पांच घंटे की नींद ही पर्याप्त होती है।
महिलाओं में नींद कम आने की समस्या केवल भारत में ही नहीं दुनिया में हर जगह है। महिलाओं में कम नींद आने के अलावा नींद के दौरान पैरों में छटपटाहट यानी रेस्टलेस लेग सिन्ड्रॉम और नींद से उठकर खाना खाने की समस्या ज्‍यादा पाई जाती है। टेलीविजन के दौर में देर रात तक धारावाहिक देखने की आदत के कारण भी महिलाओं की नींद खराब हो रही है।

न करें नजरअंदाज
अक्सर महिलाएं नींद से संबंधित परेशानियों को नजरअंदाज करती हैं, लेकिन उन्हें इन समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और चिकित्सकों से संपर्क करना चाहिए क्योंकि नींद की कमी के कारण लोगों, खास तौर पर युवकों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दिल से संबंधित रोग और मोटापा जैसी कई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और इस पर ध्यान नहीं दिए जाने के नतीजे घातक भी हो सकते हैं।
भरपूर नींद लेने से हमारी शारीरिक ऊर्जा को बनाए रखने में भी मदद मिलती है। नींद हमारे दिमाग और शरीर के लिए कई तरह से जरूरी है। नींद की स्वस्थ आदत किसी भी उम्र के व्यक्ति के स्वास्थ्य और उसकी बेहतरी के लिए जरूरी है।
हालांकि नींद से जुड़ी खरार्टे की समस्या भी अहम है। लेकिन यह समस्य पुरुषों में ज्‍यादा पाई जाती है। ज्यादा वजन की महिलाओं के अलावा रजोनिवृत महिलाओं को यह समस्या हो जाती है।

क्‍या है अनिद्रा यानी इनसोमनिया
अनिद्रा यानी इनसोमनिया की बीमारी कई रूपों में सामने आती है। आम तौर पर यह किसी छिपी बीमारी का लक्षण है। इनसोमनिया किसी भी उम्र में हो सकती है और महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों को भी होती है, लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस बीमारी से ज्‍यादा ग्रस्त रहती हैं।
इनसोमनिया कई कारणों से हो सकती है, जिनमें से एक कारण रेस्टलेस लेग सिन्ड्रॉम है। ऐसे रोगियों की टांगें नींद में छटपटाती रहती है, जिससे दिमाग के अंदर नींद बार-बार टूटती और खुल जाती है। ज्‍यादा समय तक इस बीमारी से ग्रस्त रहने पर मरीज डिप्रेशन का भी शिकार हो जाता है, क्योंकि इनसोमनिया के लक्षण उसे मानसिक रोगी बना देते हैं।

क्‍या हैं लक्षण
इनसोमनिया की पहचान इसके लक्षणों से ही हो जाती है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए रोगी की नींद का अध्ययन करना जरूरी है क्योंकि जब तक रोगी की नींद का अध्ययन नहीं किया जाएगा बीमारी की गंभीरता का भी पता नहीं चल पाएगा।
शयन अध्ययन यानी स्लीप स्टडीज के दौरान मरीज की दिल की गति, आंखों की गति, शारीरिक स्थिति, सांस की स्थिति, खून प्रवाह वगैरह को मानीटर किया जाता है। इससे यह पता लग जाता है कि रोगी को सोने के समय क्या दिक्कत आती है। अनिद्रा अपने आप में बीमारी ही नहीं, बल्कि दूसरी बीमारी या बीमारियों का लक्षण भी है और इसलिए इनसोमनिया का इलाज करने के लिए उसके मूल कारण को जानना और उस कारण का इलाज करना आवश्यक है।

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