क्या है नोमोफोबिया

नोमोफोबिया

असल में फोबिया शब्द जो है वो ग्रीक भाषा के एक शब्द हाइड्रोफीबिया से आया है जिसका मतलब होता है पानी से सम्पर्क में आने का मानसिक भय और फोबिया किसी भी तरह का हो सकता है जिसका मतलब है अगर हमे किसी चीज़ का फोबिया है तो हम उस चीज़ के लिए मानसिक तौर पर थोड़े असहज है इसे किसी भी स्थान वस्तु या गतिविधि से जोड़ा जा सकता है और हमारी तकनीक की सदी यानि के इक्कीसवी सदी हो है उसमे टेक्नोलोज़ी के बढ़ते इस्तेमाल ने मानवीय जीवन को सुगम बनाने के साथ साथ कई तरह की मानसिक समस्याएं हमे सौगात में दी है जिसमे से नोमोबिया भी एक है और मेल ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक हम में से ६६ प्रतिशत लोग इस से पीड़ित है इसमें व्यक्ति को अपने मोबाइल फ़ोन के गुम हो जाने का भय रहता है और वो भी इस कदर कि ये लोग जब टॉयलेट भी जाते है तो अपना मोबाइल फ़ोन साथ लेके जाते है और दिन में औसतन तीस से अधिक बार ये अपना फ़ोन चेक करते है ।

असल में इन्हे डर होता है कि फ़ोन के घर पर या कंही भूल जाने पर इनका कोई मैसेज या कॉल छूट जायेगा जबकि यही डर इनके व्यवहार और व्यक्तित्व में भी बदलाव का कारण बनता है और अगर ये अपना फ़ोन घर भूल भी जाएँ तो उच्च रक्तचाप और हृदयगति बढ़ जाने जैसी समस्या सामने आती जबकि असल में ये तो हर कोई बताएगा कि इस से ग्रस्त लोग अठारह से चौबीस के बीच होती है लेकिन ये कोई नहीं बताएगा की भारतीय समाज में चूँकि प्रेम प्रसंगो को लेकर कुछ अधिक सामाजिक पाबंदियां है और मेरे जैसे नौजवान लड़के और लड़कियों को हमेशा यही डर लगता है कि फ़ोन घर पर भूले नहीं कि पापा या मम्मी कंही गर्लफ्रेंड का फोन न उठाले और ‘मेरी वाली’ के साथ ये समस्या है कि कंही उसके पापा मेरे से जुडी कोई भी जानकारी फ़ोन में न देखले जबकि भारत के बाहर कुछ अलग समस्या हो सकती है क्योकि भारत में तो यही एक मात्र मुख्य कारण है नोमोफोबिया का |

 

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