भारत सरकार ने तोड़ा बिल गेट्स से रिश्ता?

भारत सरकार

दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति बिल गेट्स और भारत सरकार के बीच हुआ एक अहम करार अब तोड़ दिया गया है। ये करार भार प्रतिरक्षीकरण तकनीती सहायक यूनिट यानि इम्युनाइजेशन टेक्निकल सपोर्ट यूनिट से बिल गेट्स की तरफ से मिल रही फंडिंग बिल को खत्म कर दिया है। अब इस काम के लिए भारत सरकार स्वयं फंडिंग करेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय इस कार्य के लिए फंडिंग करेगा। पिछले कई वर्षों से हो रही थी फंडिंग बिल गेट्स का फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से I

TSU (इम्युनाइजेशन टेक्निकल सपोर्ट यूनिट) के लिए फंडिंग कर रहा था। जिसके तहत करीब 2.7 करोड़ शिशुओं का हर साल टीका करण किया जाता था। गेट्स फाउंडेशन राजधानी में टीकाकरण के काम को देखती थी उसकी रणनीति तय करती थी और सरकार को सलाह देती थी। नीतियों में दखलअंदाजी मंजूर नहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी सौम्या स्वामीनाथन ने गेट्स फाउंडेशन से फंडिंग संबंधी बातें खत्म करने की पुष्टि की। मंत्रालय के मुताबिक सरकार ये नहीं चाहती था कि फंडिंग की वजह से कोई सरकारी योजनाओं में दखल दे इसलिए ऐसा किया गया। हालांकि उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि अब तक ऐसा कोई उदाहण नहीं दिखा जिसमें नीतियों को प्रभावित किया गया हो। मंत्रालय से चल रही है बात वहीं गेट्स फाउंडेशन के प्रवक्ता ने बताया कि I

TSU (इम्युनाइजेशन टेक्निकल सपोर्ट यूनिट) को दी जाने वाली फंडिंग इस महीने खत्म हो जाएगी, प्रवक्ता ने ये भी बताया कि वह मंत्रालय से आगे के फेज में तकनीकी समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं। टीकाकरण कार्यक्रमों को मिलती थी मदद भारत में टीकाकरण कार्यक्रम बच्चों के प्रतिरक्षीकरण (वैक्सिनेशन) में सबसे ज्यादा सहायक हैं। इसमें खसरा व पोलियो जैसे खतरनाक बीमारियों से बच्चों को बचाया जाता है। NGO पर लगी लगाम यह फैसला भारत में बड़े स्तर पर NGO द्वारा प्रमुख सरकारी नीतियों में की जाने वाली मनमानी रोकने के लिए लिया गया है। पिछले वर्ष भारत में सार्वजनिक कल्याण योजनाओं के तहत काम करने वाले स्वास्थ्य विशेषज्ञों की विदेशी फंडिंग रोकने के आदेश दिए गए थे। गेट्स फाउंडेशन की मदद रोकने को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि एनजीओ को मदद करने वाली विदेशी एजेंसियों पर सख्ती जरूरी है। 

 

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