धान के पोषण में विभिन्न पोषक तत्वों की भूमिका

धान की नाइट्रोजन आवश्यकता बहुत अधिक है। फसल लगभग पकने के समय तक नाइट्रोजन चाहती है फिर भी कल्ले बनने की अवस्था में नाइट्रोजन की मांग विशेष अधिक रहती है। धान में नाइट्रोजन की कमी से पौधों की वृद्धि रुक जाती है, कल्ले कम निकलते हंै, पत्तियां आकार में छोटी हो जाती है और पीली पड़ जाती है बालें छोटी हो जाती हैं और उपज कम हो जाती है। नाइट्रोजन के अभाव के कारण दाने आकार में छोटे हो जाते हैं और उनमें प्रोटीन की मात्रा कम हो जाती है।
  Read More : धान के पोषण में विभिन्न पोषक तत्वों की भूमिका about धान के पोषण में विभिन्न पोषक तत्वों की भूमिका

मेढऩाली पद्धति से सोयाबीन की खेती-

मेढ़़वाली पद्धति से सोयाबीन की बुवाई करने से वर्षा की अनिश्चितता से होने वाली हानि की संभावना को कम किया जा सकता है। मेढऩाली पद्धति में बीजाई मेढ़ो पर की जाती है तथा दो मेढ़ों के मध्य लगभग 15 से.मी. Read More : मेढऩाली पद्धति से सोयाबीन की खेती- about मेढऩाली पद्धति से सोयाबीन की खेती-

जैविक खेती का एक आसान तरीका.

जैविक खाद ( एक एकड़ खेत के लिए ) कैसे बनाये !
एक पलास्टिक के ड्रम में नीचे लिखी पाँच चीजों को आपस में मिला लें.
10 किलो गोबर ( देशी गाय का, बैल का, या भैंस का )
10 लीटर मूत्र (देशी गाय का, बैल का, या भैंस का )
1 किलो गुड़ ( कैसा भी चलेगा, जो सड़ गया हो आपके उपयोग का ना हो तो वो ज्यादा अच्छा है )
अब इसमे 1 किलो पिसी हुई दाल या चोकर (कैसा भी चलेगा, आपके उपयोग का ना हो तो ज्यादा अच्छा )
Read More : जैविक खेती का एक आसान तरीका. about जैविक खेती का एक आसान तरीका.

किसी भी जीवित पोधे के शरीर में सबसे ज्यादा मात्रा किस तत्व/योगिक की होती है, दूसरे नं पर क्या और बाकी क्या ?

भारात्मक आधार पर रासायनिक रूप से पेड़-पौधों 65 से 70 प्रतिशत जल 25 से 30 प्रतिशत कार्बन एवं ढाई से तीन प्रतिशत सूक्ष्म तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) होते हैं. 
पदार्थों के प्रकार के अनुसार सर्वाधिक रूप से जल की मात्रा होती है। इसे पेड़ पौधे भूमि से जड़ों द्वारा अवशोषित करते हैं। इसके पश्चात कार्बन होता है जोकि जटिल कार्बनिक यौगिकों के रूप में होता है। पौधों के लिए इसका मुख्य स्रोत वायुमंडल में उपलब्ध CO2 गैस है। 
पेड़-पौधे के समुचित विकास निम्न पोषक तत्वों की आवश्यकता पड़ती है, इन तत्वों को निम्न चार वर्गों में बाँटा गया है:
मूल तत्व - कार्बन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन
Read More : किसी भी जीवित पोधे के शरीर में सबसे ज्यादा मात्रा किस तत्व/योगिक की होती है, दूसरे नं पर क्या और बाकी क्या ? about किसी भी जीवित पोधे के शरीर में सबसे ज्यादा मात्रा किस तत्व/योगिक की होती है, दूसरे नं पर क्या और बाकी क्या ?

उर्वरकों का सही समय व सही तरीके से उपयोग

सघन खेती एवं असंतुुलित उर्वरक उपयोग के कारण कृषि भूमि में पोषक तत्वों की उपलब्ध मात्रा में कमी एवं असंतुलन की स्थिति उत्पन्न होती जा रही है, फलस्वरूप भूमि की उर्वरता एवं उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस उत्पादन में पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण योगदान है इसलिए उर्वरकों के बढ़ते मूल्यों को देखते हुए इनके कुशल समुचित और समन्वित उपयोग करना आवश्यक हो गया है परंतु महत्वपूर्ण तो यह है कि उर्वरकों की क्षमता को कैसे बढ़ाया जाए अर्थात् जो उर्वरक हम उपयोग कर रहे हैं उनका पौधा भरपूर उपयोग कैसे करें। क्योंकि जो हम नत्रजन उपयोग करते हैं उसका 40 से 60 प्रतिशत तथा फास्फोरस का 15 से 20 प्रतिशत ही पौ Read More : उर्वरकों का सही समय व सही तरीके से उपयोग about उर्वरकों का सही समय व सही तरीके से उपयोग

लोक कला की ध्वजवाहिका

लोक कला की ध्वजवाहिका

गिरिजा देवी ने दशकों तक न सिर्फ शास्त्रीय और उप शास्त्रीय गायन की हर उंचाई को छुआ बल्कि ठुमरी को और परिष्कृत करते हुए उसे नवीनतम प्रतिमान दिए. संगीत के प्रारंभिक गुरु उनके पिता रहे लेकिन बाद में उन्होंने पंडित सरजू प्रसाद मिश्र और पंडित महादेव मिश्र से भी शिक्षा ली, लेकिन उनकी प्रतिभा को विस्तार दिया पंडित श्रीचंद्र मिश्र ने. उन्होंने अपनी जीवन यात्रा में बनारस घराना और पूरब अंग की गायकी का अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व किया. Read More : लोक कला की ध्वजवाहिका about लोक कला की ध्वजवाहिका

शास्त्रीय संगीत क्या है

शास्त्रीय संगीत क्या है

भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। आज से लगभग ३००० वर्ष पूर्व रचे गए वेदों को संगीत का मूल स्रोत माना जाता है। ऐसा मानना है कि ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को संगीत वरदान में दिया था। चारों वेदों में, सामवेद के मंत्रों का उच्चारण उस समय के वैदिक सप्तक या समगान के अनुसार सातों स्वरों के प्रयोग के साथ किया जाता था। Read More : शास्त्रीय संगीत क्या है about शास्त्रीय संगीत क्या है

मेवाती घराने की पहचान हैं पंडित जसराज

मेवाती घराने की पहचान हैं पंडित जसराज

इस घराने के प्रतिनिधि गायक नाज़िर खान थे. इस घराने की गायकी में वैष्णव भक्ति का प्रभाव भी सुनने को मिलता है. इस घराने के गायक आम तौर पर अपनी गायकी खत्म करने से पहले एक भजन जरूर सुनाते हैं. विश्वविख्यात कलाकार पंडित जसराज इस घराने के मौजूदा प्रतिनिधि कलाकार हैं. नए कलाकारों में पंडित संजीव अभ्यंकर का नाम भी बड़े अदब से लिया जाता है.

भारतीय शास्त्रीय संगीत के विश्वविख्यात गायक, पण्डित जसराज ८० वर्ष के हो गए हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत को उनका योगदान पिछले छह दशकों से भी ज़्यादा समय से मिल रहा है। Read More : मेवाती घराने की पहचान हैं पंडित जसराज about मेवाती घराने की पहचान हैं पंडित जसराज

बड़े गुलाम अली खान: जिन्होंने गाने के लिए रफी और लता से 50 गुना फीस ली

कर्नाटक संगीत

कर्नाटक संगीत

कर्नाटक संगीत या संस्कृत में कर्णाटक संगीतं भारत के शास्त्रीय संगीत की दक्षिण भारतीय शैली का नाम है, जो उत्तरी भारत की शैली हिन्दुस्तानी संगीत से काफी अलग है। कर्नाटक संगीत ज्यादातर भक्ति संगीत के रूप में होता है और ज्यादातर रचनाएँ हिन्दू देवी देवताओं को संबोधित होता है। इसके अलावा कुछ हिस्सा प्रेम और अन्य सामाजिक मुद्दों को भी समर्पित होता है। जैसा कि आमतौर पर भारतीय संगीत मे होता है, कर्नाटक संगीत के भी दो मुख्य तत्व राग और ताल होता है। कर्नाटक शास्त्रीय शैली में रागों का गायन अधिक तेज और हिंदुस्तानी शैली की तुलना में कम समय का होता है। त्यागराज, मुथुस्वामी दीक्षितार और श्यामा शास्त्री को Read More : कर्नाटक संगीत about कर्नाटक संगीत

बेहद लोकप्रिय है शास्त्रीय गायकी का किराना घराना

बेहद लोकप्रिय है शास्त्रीय गायकी का किराना घराना

किराना घराने की बात करने से पहले आपको बताते चलें कि शास्त्रीय गायकी के भारत रत्न से सम्मानित पंडित भीमसेन जोशी किराना घराने से ही थे.

किराना घराना का प्रतिनिधि गायक अब्दुल करीब खान को माना जाता है. महान कलाकार सवाई गंधर्व भी किराना घराने से ही थे. इस घराने की गायकी में मींड और गमक को वीणा के सुर की तरह पैदा किया जाता है. सुरों की साधना इस घराने के कलाकारों की पहचान है. Read More : बेहद लोकप्रिय है शास्त्रीय गायकी का किराना घराना about बेहद लोकप्रिय है शास्त्रीय गायकी का किराना घराना

चेतना की वह अकेली अवस्था ध्यान है।

अवस्था ध्यान है।

वही आदमी प्रेम करता है, जो बस प्रेम करता है और किसका कोई सवाल नहीं है। क्योंकि जो आदमी ‘किसी से’ प्रेम करता है, वह शेष से क्या करेगा? वह शेष के प्रति घृणा से भरा होगा। जो आदमी ‘किसी का ध्यान’ करता है, वह शेष के प्रति क्या करेगा? Read More : चेतना की वह अकेली अवस्था ध्यान है। about चेतना की वह अकेली अवस्था ध्यान है।

परफेक्ट फिगर के लिए करें त्रिकोणासन

परफेक्ट फिगर के लिए करें त्रिकोणासन

यह आसन खड़े होकर किया जाता है। इस आसन में शरीर में अलग-अलग तीन कोण बनते हैं, इसलिए इसको त्रिकोणासन कहा जाता है। Read More : परफेक्ट फिगर के लिए करें त्रिकोणासन about परफेक्ट फिगर के लिए करें त्रिकोणासन

पॉजीटिव सोच के लिए कपालभाति योग करें

कपालभाति योग करें

एकांत में और आराम की स्थिति में किया जाने वाला योग है कपालभाती। इसे किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं। 

लाभ

डायबिटीज, जोड़ों का दर्द, आर्थराइटिस, सांस व पेट संबंधी रोग, कब्ज, मोटापा व तनाव जैसी बीमारियों को दूर करने के साथ ही सकारात्मक सोच विकसित होती है। दिल के रोगियों को धीमी गति से इस योग को करना चाहिए। 

कब करें  Read More : पॉजीटिव सोच के लिए कपालभाति योग करें about पॉजीटिव सोच के लिए कपालभाति योग करें

पेट-पीठ को स्वस्थ बनाए उष्ट्रासन

स्वस्थ बनाए उष्ट्रासन

वर्तमान युग में हममें से अधिकांश व्यक्तियों की आम शिकायत या तो पीठ के बारे में होती है या पेट के बारे में। उष्ट्रासन के नियमित अभ्यास से इन दोनों परेशानियों से हम बच सकते हैं।  Read More : पेट-पीठ को स्वस्थ बनाए उष्ट्रासन about पेट-पीठ को स्वस्थ बनाए उष्ट्रासन

उत्तान पादासन से तुरंत पेट अंदर

उत्तान पादासन से तुरंत पेट अंदर

आधुनिकता की अंधी दौड़ में खान-पान, रहन-सहन, आचार-विचार और जीवन पद्धति के विकृत हो जाने से आज सारा समाज अनेक प्रकार के रोगों से ग्रस्त हैं। खासकर वह अपच, कब्ज, मोटापा, तोंद और अन्यपेट संबंधी बीमारियों से परेशान हो गया है। सभी के निदान के लिए लिए योग ही एकमात्र उपाय है। यहां प्रस्तुत है पेट को अंदर करने के लिए अचूक आसन उत्तान पादासन।

सावधानी : जब कमर में दर्द तथा मांसपेशियों में ऐंठन की शिकायत हो, उस समय इस आसन का अभ्यास नहीं करें। गर्भावस्था के दौरान महिलाएं अभ्यास न करें। Read More : उत्तान पादासन से तुरंत पेट अंदर about उत्तान पादासन से तुरंत पेट अंदर

डिप्रेशन हो या माइग्रेन, योग से ठीक रहेगा ब्रेन

डिप्रेशन हो या माइग्रेन, योग से ठीक रहेगा ब्रेन

योग से सेहत संवारने में थोड़ा वक्त जरूर चाहिए लेकिन इसका असर रामबाण है। बदलती जीवनशैली से जो बीमारियां आम हो चुकी हैं उनको चंद आसन ठीक कर सकते हैं। योग में ऐसे आसन भी हैं जिनसे रोग जिस्म पर सवार होने की हिम्मत नहीं कर सकता।

1- सूक्ष्म आसन ;- चालीस की उम्र पार कर चुकी महिलाओं में खानपान की अनियमितता आदि से कैल्शियम की कमी हो जाती है। इसका नतीजा यह है कि घुटनों में दर्द और स्पांडलाइटिस की तकलीफ परेशान करने लगती है। इस आसन को करने से काफी लाभ होता है। Read More : डिप्रेशन हो या माइग्रेन, योग से ठीक रहेगा ब्रेन about डिप्रेशन हो या माइग्रेन, योग से ठीक रहेगा ब्रेन

ब्लड प्रेशर को कैसे रखें नियंत्रित

ब्लड प्रेशर को कैसे रखें नियंत्रित

उच्च रक्तचाप को काबू में करने के लिए हमें अपने डॉक्टर की सलाह अनुसार नियमित दवा लेनी चाहिए। दवा लेने के साथ-साथ हमें कुछ विशेष बातों का ख्याल भी रखना चाहिए जिससे की दवा की मात्रा कम रहे और शरीर के अन्य उपयोगी अंग जैसे की गुर्दे / Kidney, यकृत / Liver, ह्रदय / Heart और रक्त वाहिनियों पर होनेवाले side effects से बचा जा सके।उच्च रक्तचाप या Hypertension, जिसे हम बोलचाल की भाषा में High BP भी कहते हैं यह एक ज्वालामुखी की तरह हैं। उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति को काफी समय तक कोई लक्षण नजर नहीं आता हैं। ज्वालामुखी की तरह ही यह ऊपर से शांत रहता है पर जब यह फूटता है तब रोगी को लकवा, ह्रदय रोग, गुर् Read More : ब्लड प्रेशर को कैसे रखें नियंत्रित about ब्लड प्रेशर को कैसे रखें नियंत्रित

डायरिया होने पर अपनाएं घरेलू उपचार!

वैसे तो सभी मां-बाप चाहते है कि उनका बच्चा हमेशा शारीरिक रूप से स्वस्थ रहे। इसके लिए वह उसकी सेहत को लेकर हमेशा सचेत रहते है लेकिन बच्चों में दस्त यानी डायरिया रोग आम देखने को मिलता है। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स अक्सर चिंता में पड़ जाते है। दरअसल, मां के दूध में यदि किसी प्रकार का दोष हो जाए तो बच्चे को कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होना का डर बना रहता है जिसमें दस्त भी शामिल है। 

दस्त लगने के काऱण

- मां के दूध में पौष्टिकता की कमी
- पेट में गर्मी हो जाना
- दांत निकालते समय

दस्त होने पर करें ये प्राकृतिक उपचार Read More : डायरिया होने पर अपनाएं घरेलू उपचार! about डायरिया होने पर अपनाएं घरेलू उपचार!

मौसमी को खाने और मौसमी के जूस को पीने के फायदे और नुकसान

मौसमी को खाने और मौसमी के जूस को पीने के फायदे और नुकसान

आज हम आपको मौसमी जूस पीने के कुछ ऐसे फायदे बताएँगे, आईये जानते हैं मौसमी खाने और जूस पीने के कुछ अनसुने फायदे।

1. मौसमी का जूस पीने से या खाने से स्कर्वी रोग में लाभ मिलता हैं,इसमे मसूडो मे सूजन और जुकाम जैसे रोग होते हैं।

2. मौसमी खाने से और जूस पीने से हमारी पाचन शक्ति बढती हैं।

3. मौसमी का जूस पीने से कब्ज से भी छुटकारा पाया जा सकता हैं।

4.मौसमी हमारी त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं,इसे खाने से चेहरा साफ रहता हैं।

5. मधुमेह के रोगियों के लिए मौसमी बहुत ही फायदेमंद होती हैं। Read More : मौसमी को खाने और मौसमी के जूस को पीने के फायदे और नुकसान about मौसमी को खाने और मौसमी के जूस को पीने के फायदे और नुकसान

Pages