गुड़ और मूंगफली खाना सेहत और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

गुड और मूंगफली खाना स्वास्थ्य के लिए आत्याधिक लाभकारी है आइये जाने  

हाई बीपी और माइग्रेन में मेंहदी इस प्रकार फायदेमंद

 माइग्रेन माइग्रेन की समस्या आजकल आम होती जा रही है। हर कोई सिर दर्द जैसी समस्या से परेशान है। अगर आप भी माइग्रेन के दर्द से झुझ रहे है तो रात को सोने से पहले 200 ग्राम पानी में सौ ग्राम मेहंदी के पत्तों को कूटकर भिगों ले। फिर सुबह उठते ही इस पानी को छानकर पिये किसी शादी या त्योहार में महिलाएं मेंहदी लगाने की रस्म जरूर अदा करती है। मेंहदी जहां हाथों की खूबसूरती बढ़ा देती है, वहीं इससे कई स्वास्थ्य लाभ भी मिलते है। जी हां, मेंहदी लगाने से बहुत सी बीमारियां छुमंतर हो जाती है

संगीत से सम्बन्धित 'स्वर' के बारे में है

संगीत में वह शब्द जिसका कोई निश्चित रूप हो और जिसकी कोमलता या तीव्रता अथवा उतार-चढ़ाव आदि का, सुनते ही, सहज में अनुमान हो सके, स्वर कहलाता है। भारतीय संगीत में सात स्वर (notes of the scale) हैं, जिनके नाम हैं - षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत व निषाद।
यों तो स्वरों की कोई संख्या बतलाई ही नहीं जा सकती, परंतु फिर भी सुविधा के लिये सभी देशों और सभी कालों में सात स्वर नियत किए गए हैं। भारत में इन सातों स्वरों के नाम क्रम से षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद रखे गए हैं जिनके संक्षिप्त रूप सा, रे ग, म, प, ध और नि हैं।

रागों का सृजन

रागों का सृजन

रागों का सृजन बाईस श्रुतियों के विभिन्न प्रकार से प्रयोग, विभिन्न रस या भावों को दर्शाने के लिए किया जाता है। प्राचीन समय में रागों को पुरुष व स्त्री रागों में अर्थात राग व रागिनियों में विभाजित किया गया था। सिर्फ़ यही नहीं, कई रागों को पुत्र राग का भी दर्जा प्राप्त था। उदाहरणत: राग भैरव को पुरुष राग और भैरवी, बिलावली सहित कई अन्य रागों को उसकी रागिनियाँ तथा राग ललित, बिलावल आदि रागों को इनके पुत्र रागों का स्थान दिया गया था। बाद में आगे चलकर पंडित विष्णुनारायण भातखंडे ने सभी रागों को दस थाटों में बॉंट दिया। अर्थात एक थाट से कई रागों की उत्पत्ति हो सकती थी। अगर थाट को एक पेड़ माना जाए व उसस

योगासनों का सबसे बड़ा गुण यह हैं कि वे सहज साध्य और सर्वसुलभ हैं

योगासनों का सबसे बड़ा गुण यह हैं कि वे सहज साध्य और सर्वसुलभ हैं। योगासन ऐसी व्यायाम पद्धति है जिसमें न तो कुछ विशेष व्यय होता है और न इतनी साधन-सामग्री की आवश्यकता होती है। योगासन अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं। आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोड़ने और ऐंठने वाली क्रियायें करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियायें भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापिस मिल जाती है। शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अल

Pages