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नोएडा में श्रमिकों की जीत: ओवरटाइम का डबल पैसा और 10 तारीख तक सैलरी

समाचार

मजदूरों के हक की लड़ाई आखिरकार रंग लाई। योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री of उत्तर प्रदेश सरकार के कड़े निर्देशों के बाद नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हजारों मजदूरों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। 13 अप्रैल, 2026 को सरकार ने श्रम कानूनों में ऐसे बदलाव किए हैं जो सीधे तौर पर मजदूरों की जेब और उनकी गरिमा से जुड़े हैं। यह पूरा मामला गौतम बुद्ध नगर जिले के फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र में भड़के उस गुस्से का नतीजा है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी थी।

असल में, पिछले तीन दिनों से हजारों निजी क्षेत्र के कर्मचारी सड़कों पर थे। मामला सिर्फ पैसों का नहीं था, बल्कि उस शोषण का था जो सालों से चुपचाप चल रहा था। सैलरी में देरी और ओवरटाइम के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी ने मजदूरों को मजबूर किया कि वे काम छोड़ दें और सड़कों पर उतर आएं। प्रशासन ने जब स्थिति की गंभीरता को समझा, तो मेहा रूपम, जिला मजिस्ट्रेट of गौतम बुद्ध नगर ने औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ मैराथन बैठकें कीं और इन नए नियमों को लागू करने का फैसला लिया।

अब क्या बदल गया? जानिए नए वेतन नियम

नए नियमों के मुताबिक, अब मजदूरों के साथ 'मनमानी' नहीं चलेगी। सबसे बड़ा बदलाव ओवरटाइम पेमेंट को लेकर हुआ है। अब किसी भी कर्मचारी को यदि उसकी तय शिफ्ट से ज्यादा काम करना पड़ता है, तो उसे नियमित मजदूरी से दोगुना पैसा दिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि इस ओवरटाइम भुगतान में से कोई भी कटौती नहीं की जा सकेगी।

सैलरी आने की तारीख को लेकर भी एक पक्का नियम बनाया गया है। अब हर महीने की 10 तारीख तक पूरी सैलरी एक ही किस्त में कर्मचारी के खाते में आ जानी चाहिए। अब तक क्या होता था? कंपनियाँ किस्तों में पैसे देती थीं या हफ्तों की देरी करती थीं, जिससे मजदूर कर्ज के जाल में फंस जाते थे। बोनस के मामले में भी बड़ा सुधार हुआ है; अब हर साल 30 नवंबर तक बोनस सीधे बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य होगा। (यह दिवाली के समय होने वाले विवादों को रोकने के लिए किया गया है)।

इसके अलावा, साप्ताहिक छुट्टी का अधिकार अब केवल कागजों पर नहीं रहेगा। हर कर्मचारी को हफ्ते में एक छुट्टी मिलेगी, और अगर किसी को रविवार (निर्धारित अवकाश) को काम पर बुलाया जाता है, तो उसे उस दिन की दिहाड़ी का डबल भुगतान करना होगा। पारदर्शिता लाने के लिए अब हर मजदूर को 'वेज स्लिप' (सैलरी पर्ची) देना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि उन्हें पता हो कि उनका पैसा कहाँ कटा और कहाँ जुड़ा।

सुरक्षा और शिकायतों के लिए नया सिस्टम

सिर्फ पैसा ही नहीं, कार्यस्थल पर सम्मान और सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। सभी औद्योगिक इकाइयों में अब 'आंतरिक शिकायत समितियां' बनानी होंगी, जो कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई करेंगी। खास बात यह है कि इन समितियों की अध्यक्षता अनिवार्य रूप से महिला अधिकारी ही करेंगी।

मजदूरों की आवाज सरकार तक पहुँचाने के लिए हर फैक्ट्री में शिकायत बॉक्स लगाए जाएंगे। साथ ही, प्रशासन ने एक समर्पित कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। अगर कोई कंपनी इन नियमों को तोड़ती है, तो मजदूर सीधे इस हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकते हैं। अधिकारियों का दावा है कि नियमित मॉनिटरिंग होगी और नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विरोध की आग और पुलिस का एक्शन

विरोध की आग और पुलिस का एक्शन

हालाँकि सरकार ने 13 अप्रैल को ये घोषणाएं कर दी थीं, लेकिन मजदूरों का भरोसा जीतना इतना आसान नहीं था। 14 अप्रैल, सोमवार को भी फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र में प्रदर्शन जारी रहा। मजदूरों का कहना था कि कागजों पर नियम बनाना अलग बात है और उन्हें लागू करना अलग।

स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब भीड़ अनियंत्रित होने लगी और पुलिस को भीड़ को हटाने के लिए हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। यह एक अजीब विरोधाभास था—एक तरफ सरकार सुधारों का दावा कर रही थी और दूसरी तरफ उन्हीं मजदूरों पर लाठियाँ चल रही थीं। फिर भी, जिला मजिस्ट्रेट मेहा रूपम ने शांति की अपील की और भरोसा दिलाया कि इन उपायों से औद्योगिक शांति बहाल होगी और गौतम बुद्ध नगर को श्रम सुधारों का एक 'मॉडल' बनाया जाएगा।

ऐतिहासिक संदर्भ: क्यों आई यह नौबत?

ऐतिहासिक संदर्भ: क्यों आई यह नौबत?

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में यह पहली बार नहीं है जब मजदूर सड़कों पर उतरे हों। लंबे समय से यहाँ प्राइवेट कंपनियों में सैलरी देरी से मिलने और ओवरटाइम का पैसा न मिलने की शिकायतें आती रही हैं। अक्सर देखा गया है कि त्योहारों के समय बोनस को लेकर विवाद होता था, जिससे काम पूरी तरह ठप हो जाता था। इस बार का विरोध पिछले सभी प्रदर्शनों से बड़ा था क्योंकि इसमें हजारों कर्मचारी एक साथ एकजुट हुए थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

ओवरटाइम भुगतान के नए नियम क्या हैं?

अब नोएडा की सभी औद्योगिक इकाइयों में निर्धारित कार्य समय से अधिक काम करने पर कर्मचारियों को सामान्य वेतन से दोगुना (Double) भुगतान करना होगा। इसमें किसी भी प्रकार की कटौती की अनुमति नहीं होगी।

सैलरी और बोनस कब तक मिलने चाहिए?

नियमों के अनुसार, मासिक वेतन हर महीने की 10 तारीख तक एक बार में भुगतान करना होगा। वहीं, वार्षिक बोनस 30 नवंबर तक सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में जमा किया जाना अनिवार्य है।

रविवार को काम करने पर क्या मिलेगा?

यदि किसी कर्मचारी को उसकी साप्ताहिक छुट्टी (रविवार) के दिन काम पर बुलाया जाता है, तो उसे उस दिन की दिहाड़ी का दोगुना भुगतान करना होगा।

महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम हैं?

सभी फैक्ट्रियों में आंतरिक शिकायत समितियां बनाई जाएंगी, जिसकी अध्यक्षता महिला अधिकारी करेंगी। यह समितियां कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच और समाधान करेंगी।

शिकायत दर्ज कराने का तरीका क्या है?

मजदूर कार्यस्थल पर लगे शिकायत बॉक्स का उपयोग कर सकते हैं या प्रशासन द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर और कंट्रोल रूम के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।